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Mau News: डिजिटल अरेस्ट कोई वैधानिक शब्द नहीं, इससे डरें नहीं
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साइबर सुरक्षा को लेकर सोमवार को पुलिस प्रशासन द्वारा बलिया माेड़ स्थित साई फार्मेसी कॉलेज में सोमवार को साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का किया गया। इसमें साइबर अपराधों के प्रकार और बचाव के तरीके बताए गए।
आयोजन डीआईजी सुनील कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। कार्यशाला में डीआईजी ने सुरक्षा के टिप्स दिया जबकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन ठगी/साइबर अपराधों से बचाव को लेकर विस्तार जानकारी दी गई।
कार्यशाला में नेशनल साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे और रक्षित टंण्डन ने अपने वर्चुवल संबोधन में बताया कि डिजिटल अरेस्ट नामक कोई वैधानिक शब्द नहीं है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इस नाम से लिंक या कॉल भेजे, तो उस पर भरोसा न करें।
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किसी भी अनजान लिंक, क्यूआर कोड या ऐप से पैसे ट्रांसफर न करें और न ही अज्ञात कॉलर के कहने पर कॉल मर्ज या कॉल फॉरवर्डिंग करें। बताया कि लिंक फ्रॉड, ई-कॉमर्स फ्रॉड, एपीके/एप इंस्टॉल फ्रॉड, फ्री वाई-फाई फ्रॉड, बिजली बिल फ्रॉड, ओलएक्स फ्रॉड जैसे अनेक तरीकों से साइबर ठगी की जा रही है।
इस दौरान विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि मोबाइल में सिम कार्ड लॉक सक्रिय करें, साथ ही मोबी आर्मर जैसे प्रमाणित सुरक्षा एप का प्रयोग करें, जो छह प्रकार से साइबर सुरक्षा प्रदान करता है।
इस दौरान दोनों विशेषज्ञों ने बताया कि यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है तो इसको लेकर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और अपने बैंक को ईमेल कर अकाउंट फ्रीज करवाएं।
इससे पहले डीआईजी सुनील कुमार सिंह ने कहा गया कि पुलिस विभाग लगातार तकनीकी उन्नयन कर रहा है ताकि साइबर अपराधों की जांच एवं निवारण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
पुलिस अधीक्षक इलामारन जी ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। यातायात नियमों का पालन जीवन की सुरक्षा का मूल मंत्र है और मिशन शक्ति अभियान महिला सुरक्षा व सम्मान की दिशा में एक सशक्त पहल है।
सत्र में थ्री एस फार्मूला की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान साइबर एक्सपर्ट मनीष कुमार सिंह द्वारा एक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने साइबर अपराधों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा के “थ्री एस फॉर्मूला –स्टॉप, स्कैन, शेयर, को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, ओटीपी ठगी, सुरक्षित पासवर्ड प्रबंधन, सोशल इंजीनियरिंग, फेक लिंक और डिजिटल भुगतान से जुड़ी ठगी के तरीकों की गहन जानकारी दी। लाइव डेमो के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि किस प्रकार यूपीआई फ्रॉड, फेक कॉल, एसएमएस स्कैम, और फिशिंग ईमेल के जरिए नागरिकों को ठगा जाता है, तथा उनसे बचने के लिए कौन-कौन से सावधानीपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए।
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आयोजन डीआईजी सुनील कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। कार्यशाला में डीआईजी ने सुरक्षा के टिप्स दिया जबकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन ठगी/साइबर अपराधों से बचाव को लेकर विस्तार जानकारी दी गई।
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कार्यशाला में नेशनल साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे और रक्षित टंण्डन ने अपने वर्चुवल संबोधन में बताया कि डिजिटल अरेस्ट नामक कोई वैधानिक शब्द नहीं है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इस नाम से लिंक या कॉल भेजे, तो उस पर भरोसा न करें।
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किसी भी अनजान लिंक, क्यूआर कोड या ऐप से पैसे ट्रांसफर न करें और न ही अज्ञात कॉलर के कहने पर कॉल मर्ज या कॉल फॉरवर्डिंग करें। बताया कि लिंक फ्रॉड, ई-कॉमर्स फ्रॉड, एपीके/एप इंस्टॉल फ्रॉड, फ्री वाई-फाई फ्रॉड, बिजली बिल फ्रॉड, ओलएक्स फ्रॉड जैसे अनेक तरीकों से साइबर ठगी की जा रही है।
इस दौरान विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि मोबाइल में सिम कार्ड लॉक सक्रिय करें, साथ ही मोबी आर्मर जैसे प्रमाणित सुरक्षा एप का प्रयोग करें, जो छह प्रकार से साइबर सुरक्षा प्रदान करता है।
इस दौरान दोनों विशेषज्ञों ने बताया कि यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है तो इसको लेकर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और अपने बैंक को ईमेल कर अकाउंट फ्रीज करवाएं।
इससे पहले डीआईजी सुनील कुमार सिंह ने कहा गया कि पुलिस विभाग लगातार तकनीकी उन्नयन कर रहा है ताकि साइबर अपराधों की जांच एवं निवारण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
पुलिस अधीक्षक इलामारन जी ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। यातायात नियमों का पालन जीवन की सुरक्षा का मूल मंत्र है और मिशन शक्ति अभियान महिला सुरक्षा व सम्मान की दिशा में एक सशक्त पहल है।
सत्र में थ्री एस फार्मूला की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान साइबर एक्सपर्ट मनीष कुमार सिंह द्वारा एक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने साइबर अपराधों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा के “थ्री एस फॉर्मूला –स्टॉप, स्कैन, शेयर, को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, ओटीपी ठगी, सुरक्षित पासवर्ड प्रबंधन, सोशल इंजीनियरिंग, फेक लिंक और डिजिटल भुगतान से जुड़ी ठगी के तरीकों की गहन जानकारी दी। लाइव डेमो के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि किस प्रकार यूपीआई फ्रॉड, फेक कॉल, एसएमएस स्कैम, और फिशिंग ईमेल के जरिए नागरिकों को ठगा जाता है, तथा उनसे बचने के लिए कौन-कौन से सावधानीपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए।