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Mau News: मऊ जंक्शन पर पार्किंग विवाद के बाद तीन और चार पहिया वाहन का ठेका निरस्त
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मऊ जंक्शन के बाहर नो पार्किंग जोन में खड़ी ई-रिक्शा और ऑटो। संवाद
मऊ। मऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर तीन और चार पहिया वाहनों की पार्किंग का संचालन करने वाले ठेकेदार की समस्याओं और परिसर में लगातार हो रहे विवादों को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। वाराणसी मंडल के सहायक वाणिज्य प्रबंधक ने मऊ स्टेशन के तीन और चार पहिया वाहन पार्किंग ठेके को प्रशासनिक आधार पर समाप्त कर दिया है।
पार्किंग ठेकेदार द्वारा 8 और 12 सितंबर को दिए गए आवेदनों में बताया गया था कि पार्किंग संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। विशेष रूप से ई-रिक्शा और ऑटो चालक पार्किंग शुल्क देने से साफ इन्कार कर रहे थे। चालक निर्धारित पार्किंग क्षेत्र के बजाय सर्कुलेटिंग एरिया और संपर्क मार्ग पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इसके अलावा, पार्किंग के निर्धारित क्षेत्र में वाहन खड़ा करने को लेकर आए दिन कहासुनी, विवाद और झगड़े की स्थिति बन रही थी। इसमें उन्हें मऊ आरपीएफ और जीआरपी की तरफ से सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।
ठेका समाप्त होने के बाद अब ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की मनमानी से स्टेशन परिसर में लग रहे जाम से यात्रियों और दूसरे वाहनों को परेशानी हो रही है। ठेकेदार राजेश सिंह द्वारा रेलवे के उच्चाधिकारियों से शिकायत करने के बाद बीते 11 सितंबर को मऊ स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ठेकेदार के आरोपों की पुष्टि हुई और पाया गया कि अधिकतर वाहन चालक मनमाने ढंग से गाड़ियां खड़ी कर यात्रियों को उतारते-बिठाते हैं, जिससे स्टेशन मार्ग पर अक्सर जाम लग जाता है।
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टेंडर की शर्तों के तहत कार्रवाई
निरीक्षण रिपोर्ट और पार्किंग संचालन में हो रही आर्थिक हानि को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने माना कि वर्तमान व्यवस्था के तहत ठेके का सुचारू संचालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। यात्री सुविधा और स्टेशन पर सुचारू आवागमन को प्राथमिकता देते हुए पार्किंग ठेके को प्रशासनिक आधार पर निरस्त कर दिया गया।
पांच सितंबर को हुई थी मारपीट
बीते 5 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे पार्किंग रसीद काटने और शुल्क वसूली को लेकर पार्किंग ठेकेदार और ई-रिक्शा चालक के बीच नोकझोंक के बाद मारपीट हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पार्किंग ठेकेदार और उनके तीन कर्मचारियों के खिलाफ एससी, एसटी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। जबकि ठेकेदार का आरोप है कि वो वहां रेलवे के नियमानुसार शुल्क की वसूली करते हैं। वो किसी भी वाहन चालक को व्यक्तिगत नहीं पहचानते, जिससे उन्हें पता हो कि वो किस जाति का है। उनके खिलाफ किया गया एससी एसटी का मुकदमा गलत है।
रेलवे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, 23 सितंबर की मध्यरात्रि से पार्किंग का संचालन पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश जारी किया गया है। ठेकेदार को रेलवे परिसर में उपलब्ध कराई गई संपत्ति व स्थान संबंधित अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। ठेका निरस्त होने के बाद नियमानुसार ठेकेदार की जमा पूर्ण जमानत राशि और बची हुई लाइसेंस फीस बिना किसी ब्याज के वापस की जाएगी। नियमों में कुछ बदलाव करके दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। - सुजीत सिंह राठौर, वाणिज्य मंडल निरीक्षक
रेलवे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, 23 सितंबर की मध्यरात्रि से पार्किंग का संचालन पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश जारी किया गया है। ठेकेदार को रेलवे परिसर में उपलब्ध कराई गई संपत्ति व स्थान संबंधित अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। ठेका निरस्त होने के बाद नियमानुसार ठेकेदार की जमा पूर्ण जमानत राशि और बची हुई लाइसेंस फीस बिना किसी ब्याज के वापस की जाएगी। नियमों में कुछ बदलाव करके दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। - सुजीत सिंह राठौर, वाणिज्य मंडल निरीक्षक
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पार्किंग ठेकेदार द्वारा 8 और 12 सितंबर को दिए गए आवेदनों में बताया गया था कि पार्किंग संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। विशेष रूप से ई-रिक्शा और ऑटो चालक पार्किंग शुल्क देने से साफ इन्कार कर रहे थे। चालक निर्धारित पार्किंग क्षेत्र के बजाय सर्कुलेटिंग एरिया और संपर्क मार्ग पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इसके अलावा, पार्किंग के निर्धारित क्षेत्र में वाहन खड़ा करने को लेकर आए दिन कहासुनी, विवाद और झगड़े की स्थिति बन रही थी। इसमें उन्हें मऊ आरपीएफ और जीआरपी की तरफ से सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।
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ठेका समाप्त होने के बाद अब ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की मनमानी से स्टेशन परिसर में लग रहे जाम से यात्रियों और दूसरे वाहनों को परेशानी हो रही है। ठेकेदार राजेश सिंह द्वारा रेलवे के उच्चाधिकारियों से शिकायत करने के बाद बीते 11 सितंबर को मऊ स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ठेकेदार के आरोपों की पुष्टि हुई और पाया गया कि अधिकतर वाहन चालक मनमाने ढंग से गाड़ियां खड़ी कर यात्रियों को उतारते-बिठाते हैं, जिससे स्टेशन मार्ग पर अक्सर जाम लग जाता है।
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टेंडर की शर्तों के तहत कार्रवाई
निरीक्षण रिपोर्ट और पार्किंग संचालन में हो रही आर्थिक हानि को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने माना कि वर्तमान व्यवस्था के तहत ठेके का सुचारू संचालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। यात्री सुविधा और स्टेशन पर सुचारू आवागमन को प्राथमिकता देते हुए पार्किंग ठेके को प्रशासनिक आधार पर निरस्त कर दिया गया।
पांच सितंबर को हुई थी मारपीट
बीते 5 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे पार्किंग रसीद काटने और शुल्क वसूली को लेकर पार्किंग ठेकेदार और ई-रिक्शा चालक के बीच नोकझोंक के बाद मारपीट हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पार्किंग ठेकेदार और उनके तीन कर्मचारियों के खिलाफ एससी, एसटी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। जबकि ठेकेदार का आरोप है कि वो वहां रेलवे के नियमानुसार शुल्क की वसूली करते हैं। वो किसी भी वाहन चालक को व्यक्तिगत नहीं पहचानते, जिससे उन्हें पता हो कि वो किस जाति का है। उनके खिलाफ किया गया एससी एसटी का मुकदमा गलत है।
रेलवे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, 23 सितंबर की मध्यरात्रि से पार्किंग का संचालन पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश जारी किया गया है। ठेकेदार को रेलवे परिसर में उपलब्ध कराई गई संपत्ति व स्थान संबंधित अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। ठेका निरस्त होने के बाद नियमानुसार ठेकेदार की जमा पूर्ण जमानत राशि और बची हुई लाइसेंस फीस बिना किसी ब्याज के वापस की जाएगी। नियमों में कुछ बदलाव करके दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। - सुजीत सिंह राठौर, वाणिज्य मंडल निरीक्षक
रेलवे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, 23 सितंबर की मध्यरात्रि से पार्किंग का संचालन पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश जारी किया गया है। ठेकेदार को रेलवे परिसर में उपलब्ध कराई गई संपत्ति व स्थान संबंधित अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। ठेका निरस्त होने के बाद नियमानुसार ठेकेदार की जमा पूर्ण जमानत राशि और बची हुई लाइसेंस फीस बिना किसी ब्याज के वापस की जाएगी। नियमों में कुछ बदलाव करके दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। - सुजीत सिंह राठौर, वाणिज्य मंडल निरीक्षक