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Mau News: गलत जानकारी दे रहा कोच गाइडेंस सिस्टम
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मऊ जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 4 पर नही लगा कोच गाइडेंस सिस्टम।संवाद
पूर्वांचल के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में से एक मऊ जंक्शन पर यात्रियों की सुविधाएं रामभरोसे चल रही हैं। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन पर लगा कोच गाइडेंस सिस्टम पिछले तीन महीने से आधा-अधूरा काम कर रहा है।
अधिकारियों के निरीक्षण या किसी कार्यक्रम से पहले इसे वाराणसी से भेजा गया मैकेनिक बनाकर जाता है। दो दिन बाद फिर से खराबी आ जाती है, इसके कारण ट्रेनों के आने से पहले यात्रियों को अपने कोच की सही स्थिति जानने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तब होती है जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आती है और यात्रियों को अपने डिब्बे को ढूंढने के लिए सामान के साथ दौड़ लगानी पड़ती है।
प्लेटफॉर्म नंबर दो पर लगा कोच गाइडेंस सिस्टम अक्सर गलत जानकारी प्रदर्शित करता है। कई बार ट्रेन आने पर कोच पोजिशन आगे का पीछे और पीछे का आगे दिखने लगता है। वहीं, प्लेटफॉर्म नंबर तीन की स्थिति और भी बदतर है, जहां का कोच गाइडेंस सिस्टम पिछले तीन महीने से ट्रेन के चले जाने के बाद भी उसका कोच पोजिशन स्क्रीन से नहीं हटता है। इसके चलते दूसरी ट्रेन से यात्रा करने वाले लोग भ्रमित हो जाते हैं और अपनी बोगी ढूंढने के लिए यहां-वहां भटकने को विवश हैं। प्लेटफॉर्म नंबर चार को शुरू हुए 9 महीने से अधिक हो चुका है। इसके बावजूद वहां कोच गाइडेंस सिस्टम और स्पीकर भी नहीं लगा है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी साबित हो रही है।
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मरम्मत करने वाली टेलीकॉम कंपनी का टेंडर समाप्त होने के कारण सिस्टम की मरम्मत में देरी हो रही है। मऊ जंक्शन से रोजाना 44 ट्रेनें गुजरती हैं। 10 हजार लोग यात्रा करते हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 52.65 करोड़ रुपये की लागत से मऊ जंक्शन का पुनर्विकास किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में स्टेशन का स्वरूप बदला है। यात्रियों की सुविधा के लिए तीन नए एस्केलेटर और एक लिफ्ट लगाई जा रही है। इसके साथ ही 5500 वर्ग मीटर में ग्रेनाइट का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। यह स्टेशन नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, पुणे, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, जयपुर, रांची और अमृतसर जैसे प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेन सेवा से जुड़ा है।
प्लेटफाॅर्म पर हो रहे निर्माण कार्य की वजह से सीजीएस अभी क्रियाशील नहीं है। नए कोच गाइडेंस सिस्टम का टेंडर हो चुका है। इसके बाद मऊ जंक्शन के सभी प्लेटफाॅर्मों पर नए कोच गाइडेंस सिस्टम की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। - महेश गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी।
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अधिकारियों के निरीक्षण या किसी कार्यक्रम से पहले इसे वाराणसी से भेजा गया मैकेनिक बनाकर जाता है। दो दिन बाद फिर से खराबी आ जाती है, इसके कारण ट्रेनों के आने से पहले यात्रियों को अपने कोच की सही स्थिति जानने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तब होती है जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आती है और यात्रियों को अपने डिब्बे को ढूंढने के लिए सामान के साथ दौड़ लगानी पड़ती है।
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प्लेटफॉर्म नंबर दो पर लगा कोच गाइडेंस सिस्टम अक्सर गलत जानकारी प्रदर्शित करता है। कई बार ट्रेन आने पर कोच पोजिशन आगे का पीछे और पीछे का आगे दिखने लगता है। वहीं, प्लेटफॉर्म नंबर तीन की स्थिति और भी बदतर है, जहां का कोच गाइडेंस सिस्टम पिछले तीन महीने से ट्रेन के चले जाने के बाद भी उसका कोच पोजिशन स्क्रीन से नहीं हटता है। इसके चलते दूसरी ट्रेन से यात्रा करने वाले लोग भ्रमित हो जाते हैं और अपनी बोगी ढूंढने के लिए यहां-वहां भटकने को विवश हैं। प्लेटफॉर्म नंबर चार को शुरू हुए 9 महीने से अधिक हो चुका है। इसके बावजूद वहां कोच गाइडेंस सिस्टम और स्पीकर भी नहीं लगा है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी साबित हो रही है।
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मरम्मत करने वाली टेलीकॉम कंपनी का टेंडर समाप्त होने के कारण सिस्टम की मरम्मत में देरी हो रही है। मऊ जंक्शन से रोजाना 44 ट्रेनें गुजरती हैं। 10 हजार लोग यात्रा करते हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 52.65 करोड़ रुपये की लागत से मऊ जंक्शन का पुनर्विकास किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में स्टेशन का स्वरूप बदला है। यात्रियों की सुविधा के लिए तीन नए एस्केलेटर और एक लिफ्ट लगाई जा रही है। इसके साथ ही 5500 वर्ग मीटर में ग्रेनाइट का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। यह स्टेशन नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, पुणे, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, जयपुर, रांची और अमृतसर जैसे प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेन सेवा से जुड़ा है।
प्लेटफाॅर्म पर हो रहे निर्माण कार्य की वजह से सीजीएस अभी क्रियाशील नहीं है। नए कोच गाइडेंस सिस्टम का टेंडर हो चुका है। इसके बाद मऊ जंक्शन के सभी प्लेटफाॅर्मों पर नए कोच गाइडेंस सिस्टम की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। - महेश गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी।