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कैशलेस व्यवस्था का नहीं दिख रहा असर
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:04 PM IST
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नो कैश से परेशान उपभोक्ताओं ने किया हाईवे जाम
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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सरकार के कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा दिए जाने का अभी तक दूकानदारों पर कोई खास असर नहीं है। अभी तक कस्बा में मात्र तीन दूकानों पर पेमेंट के लिए स्वाइप मशीन लगाई जा सकी है। नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने में केवल दो दिन बचे हैं लेकिन बैंकों से लोगों को पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि अब कई बैंक आरबीआई के गाइडलाइन के अनुसार सप्ताह में 24 हजार रुपये दिए जाने का अनुपालन कर रहे हैं लेकिन ग्रामीण बैंकों के खाताधारकों को अभी भी पैसा मिलने में काफी दिक्कते आ
रही है।
केंद्र सरकार द्वारा देश में नोटबंदी की घोषित समय सीमा समाप्त होने को है। नोटबंदी के चलते आम आदमी, किसान, मजदूर व्यापारी आदि हर तबके को परेशानी झेलनी पडी़ है। अभी तक समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सका है। कुछ राष्ट्रीकृत बैंकों ने तो एक सप्ताह में कम से कम 24 हजार रूपये देने के निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया है, लेकिन ग्रामीण बैंकों की स्थिति में अभी तक कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीण बैंक के खाताधारकों की समस्या यह है कि इसमें अधिकांश किसान, गरीब, मजदूर और लो बजट वालों का खाता है। पैसा न मिलने से गेहूं फसल की बोआई जुताई से लेकर खाद पानी व मजदूरी को लेकर काफी समस्या का सामना करना पडा़ है।
जहां तक कैशलेस व्यवस्था का सवाल है तो अभी तक मुहम्मदाबाद गोहना के व्यापारिक प्रतिष्ठानो में इसका कोई खास असर नहीं हुआ है। कस्बा के एक इलेक्ट्रानिक सामानों के विक्रेता प्रकाश इलेक्ट्रानिक्स और टूर व ट्रवेल्स का कार्य करने वाले दूकानदार इकरा ट्रवेल्स और एक अन्य रेडिमेड कपड़ा की दूकान पर स्वैप मशीन लगाई जा सकी है।
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रही है।
केंद्र सरकार द्वारा देश में नोटबंदी की घोषित समय सीमा समाप्त होने को है। नोटबंदी के चलते आम आदमी, किसान, मजदूर व्यापारी आदि हर तबके को परेशानी झेलनी पडी़ है। अभी तक समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सका है। कुछ राष्ट्रीकृत बैंकों ने तो एक सप्ताह में कम से कम 24 हजार रूपये देने के निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया है, लेकिन ग्रामीण बैंकों की स्थिति में अभी तक कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीण बैंक के खाताधारकों की समस्या यह है कि इसमें अधिकांश किसान, गरीब, मजदूर और लो बजट वालों का खाता है। पैसा न मिलने से गेहूं फसल की बोआई जुताई से लेकर खाद पानी व मजदूरी को लेकर काफी समस्या का सामना करना पडा़ है।
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जहां तक कैशलेस व्यवस्था का सवाल है तो अभी तक मुहम्मदाबाद गोहना के व्यापारिक प्रतिष्ठानो में इसका कोई खास असर नहीं हुआ है। कस्बा के एक इलेक्ट्रानिक सामानों के विक्रेता प्रकाश इलेक्ट्रानिक्स और टूर व ट्रवेल्स का कार्य करने वाले दूकानदार इकरा ट्रवेल्स और एक अन्य रेडिमेड कपड़ा की दूकान पर स्वैप मशीन लगाई जा सकी है।
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