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भाकपा माले ने फूूंका प्रधानमंत्री का पुतला
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 05 Oct 2015 11:43 PM IST
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दादरी में हुई घटना के विरोध में भाकपा माले और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को नगर क्षेत्र के डीसीएसके पीजी कालेज मोड़ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। इस दौरान उन्होंने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
पुतला फूंकने के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव बसंत कुमार ने कहा कि जब से देश मेें भाजपा की सरकार बनी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने हैं।
तब से हिंदुत्ववादी संगठन देश की साझी संस्कृति की विरासत को चोट करने में लगे हुए हैं। देश की एकता और विरासत को बचाने के बजाय इस तरह के ताकतों को मोदी सरकार संरक्षण दे रही है।
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उन्होंने कहा कि गरीबों , मजदूरों किसानों के सवालों से पीछे हटने के कारण और देश के कारपोरेट और पूंजीपतियों के पक्ष में बनाई जा रही नीतियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए देश में सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद ,आतंकवाद का फर्जी मुद्दा मोदी सरकार द्वारा उछाला जा रहा है।
इस दौरान दयाशंकर सिंह ने कहा कि जो भी ताकतें साझी संस्कृति की हिफाजत में काम कर रही हैं वे इनके निशाने पर हैं। इसी कड़ी में तर्कवादी व अंधविश्वास विरोधी नरेंद्र दोभालकर, गोविंद पंसारे और कन्नड़ साहित्याकार एमएम कलबुर्गी की हत्याएं कराई गई।
पुतला फूंकने के दौरान मुख्य रुप से मिट्ठू, संतोंष, शिवकुमार, राजकुमार, विद्याधर, फैयाज, पप्पू, अख्तर, जुबैर, इंद्रमल चौहान, अनिल चौहान, नन्दू, राजेश, राजेंद्र, इसरार रजा आदि मौजूद रहे।
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पुतला फूंकने के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव बसंत कुमार ने कहा कि जब से देश मेें भाजपा की सरकार बनी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने हैं।
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तब से हिंदुत्ववादी संगठन देश की साझी संस्कृति की विरासत को चोट करने में लगे हुए हैं। देश की एकता और विरासत को बचाने के बजाय इस तरह के ताकतों को मोदी सरकार संरक्षण दे रही है।
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उन्होंने कहा कि गरीबों , मजदूरों किसानों के सवालों से पीछे हटने के कारण और देश के कारपोरेट और पूंजीपतियों के पक्ष में बनाई जा रही नीतियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए देश में सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद ,आतंकवाद का फर्जी मुद्दा मोदी सरकार द्वारा उछाला जा रहा है।
इस दौरान दयाशंकर सिंह ने कहा कि जो भी ताकतें साझी संस्कृति की हिफाजत में काम कर रही हैं वे इनके निशाने पर हैं। इसी कड़ी में तर्कवादी व अंधविश्वास विरोधी नरेंद्र दोभालकर, गोविंद पंसारे और कन्नड़ साहित्याकार एमएम कलबुर्गी की हत्याएं कराई गई।
पुतला फूंकने के दौरान मुख्य रुप से मिट्ठू, संतोंष, शिवकुमार, राजकुमार, विद्याधर, फैयाज, पप्पू, अख्तर, जुबैर, इंद्रमल चौहान, अनिल चौहान, नन्दू, राजेश, राजेंद्र, इसरार रजा आदि मौजूद रहे।