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बीपीएल सूची में कितने हैं गरीब, पता नहीं
BEARU, AMAR UJALA, MAU
Updated Sat, 23 Apr 2016 11:41 PM IST
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- फोटो : file photo
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जद्दोजहद और काफी इंतजार के बाद शासन ने किसी प्रकार बीपीएल सूची तो जारी कर दी, लेकिन जिले में कितने गरीब परिवार हैं। इसका पता नहीं चल सका है। बीपीएल सूची को लेकर न सिर्फ संबंधित विभाग बल्कि ग्राम पंचायतों के लोग भी ऊहापोह में है।
कितनी संख्या जिले में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है इसकी अभी सूची तैयार कर गणना की जा रही है। हालांकि अभी इन सूची का सत्यापन भी होना है और नाम घट भी सकते हैं जब कि सूची में नाम बढ़ने की संभावना पात्रता या अपात्रता के आधार पर संभव नहीं है, ऐसा जिला प्रशासन का मानना है।
शासन द्वारा जारी इस सूची में डेढ़ लाख से अधिक नाम तो बताए जा रहे हैं। लेकिन सही मायने में कितने बीपीएल धारक घटे या बढ़े विभाग अभी सही सही आंकलन करने में असक्षम है। विभाग का कहना है कि शासन से जारी सूची का ब्लाकवार सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद ही सही बीपीएल परिवारों का पता लग सकेगा। इसके चलते आम लोगों में भी ऊहापोह की स्थिति है।
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वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर जनपद की जनसंख्या तो घोषित कर दी गई लेकिन कई वर्षों से जनपद के बीपीएल सूची का लोगों को इंतजार था। जनपद की जनसंख्या 2205170 है जब कि परिवारों की संख्या 320884 है।
2002 में जनपद की जनसंख्या 1853997 थी। इसमें बीपीएल परिवारों की संख्या 116424 थी। 14 साल बाद बीपीएल की सूची तो जारी हो गई लेकिन शासन ने सभी बीपीएल परिवारों की सूची बिना संख्या के ही ग्राम पंचायतवार घोषित कर दी है। इसका डीआरडीए द्वारा सत्यापन कराया जाना है। सूची के घोषित होने के बाद विभाग अभी यह निर्धारित नहीं कर पाया है कि जिले में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की संख्या कितनी है।
यह परिवार पहले की अपेक्षा बढ़े है या कम हुए हैं यह भी विभाग पता नहीं कर पाया है। सूची को संबंधित ग्राम पंचायतों के हिसाब से ब्लाकवार बेवसाइट से डाउन लोड कर सभी बीडीओ को यह निर्देश जारी कर दिया गया है कि वह सूची के अनुसार स्थलीय सर्वे करें। गांवों में सर्वे का काम भी हो रहा है।
ग्रामीण अपने गांव में बीपीएल सूची में नाम को लेकर ऊहापोह में है कि आखिर किस आधार पर यह सूची जारी की गई है और सत्यापन के बाद क्या उनका नाम जुड़ पाएगा या कट जाएगा। इसे लेकर वह ब्लाक तक का चक्कर भी लगा रहे हैं।
इस संबंध में परियोजना निदेशक हरिचरन का कहना है कि शासन से जारी सूची में संख्यात्मक आंकड़े नहीं है। जारी सूची को ग्राम पंचायतवार, ब्लाकवार सूचीबद्ध कर सभी बीडीओ को निर्देश दिए गए है कि वह सूची के अनुसार सर्वे कर रिपोर्ट दें ताकि उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा सके। बताया कि सत्यापन के लिए गाइड लाइन तय की गई है।
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कितनी संख्या जिले में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है इसकी अभी सूची तैयार कर गणना की जा रही है। हालांकि अभी इन सूची का सत्यापन भी होना है और नाम घट भी सकते हैं जब कि सूची में नाम बढ़ने की संभावना पात्रता या अपात्रता के आधार पर संभव नहीं है, ऐसा जिला प्रशासन का मानना है।
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शासन द्वारा जारी इस सूची में डेढ़ लाख से अधिक नाम तो बताए जा रहे हैं। लेकिन सही मायने में कितने बीपीएल धारक घटे या बढ़े विभाग अभी सही सही आंकलन करने में असक्षम है। विभाग का कहना है कि शासन से जारी सूची का ब्लाकवार सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद ही सही बीपीएल परिवारों का पता लग सकेगा। इसके चलते आम लोगों में भी ऊहापोह की स्थिति है।
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वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर जनपद की जनसंख्या तो घोषित कर दी गई लेकिन कई वर्षों से जनपद के बीपीएल सूची का लोगों को इंतजार था। जनपद की जनसंख्या 2205170 है जब कि परिवारों की संख्या 320884 है।
2002 में जनपद की जनसंख्या 1853997 थी। इसमें बीपीएल परिवारों की संख्या 116424 थी। 14 साल बाद बीपीएल की सूची तो जारी हो गई लेकिन शासन ने सभी बीपीएल परिवारों की सूची बिना संख्या के ही ग्राम पंचायतवार घोषित कर दी है। इसका डीआरडीए द्वारा सत्यापन कराया जाना है। सूची के घोषित होने के बाद विभाग अभी यह निर्धारित नहीं कर पाया है कि जिले में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की संख्या कितनी है।
यह परिवार पहले की अपेक्षा बढ़े है या कम हुए हैं यह भी विभाग पता नहीं कर पाया है। सूची को संबंधित ग्राम पंचायतों के हिसाब से ब्लाकवार बेवसाइट से डाउन लोड कर सभी बीडीओ को यह निर्देश जारी कर दिया गया है कि वह सूची के अनुसार स्थलीय सर्वे करें। गांवों में सर्वे का काम भी हो रहा है।
ग्रामीण अपने गांव में बीपीएल सूची में नाम को लेकर ऊहापोह में है कि आखिर किस आधार पर यह सूची जारी की गई है और सत्यापन के बाद क्या उनका नाम जुड़ पाएगा या कट जाएगा। इसे लेकर वह ब्लाक तक का चक्कर भी लगा रहे हैं।
इस संबंध में परियोजना निदेशक हरिचरन का कहना है कि शासन से जारी सूची में संख्यात्मक आंकड़े नहीं है। जारी सूची को ग्राम पंचायतवार, ब्लाकवार सूचीबद्ध कर सभी बीडीओ को निर्देश दिए गए है कि वह सूची के अनुसार सर्वे कर रिपोर्ट दें ताकि उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा सके। बताया कि सत्यापन के लिए गाइड लाइन तय की गई है।