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रामलीला में भरत मिलाप
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
Updated Tue, 04 Oct 2016 11:41 PM IST
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रामलीला में भरत मिलाप
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श्री रामलीला मेला समिति की तरफ से आयोजित एेतिहासिक रामलीला में पांचवें दिन मंगलवार को वन गए प्रभु से भरत नगरवासियों के संग मिलने गए, साथ ही उन्होंने भगवान को वापस अयोध्या लाने की प्रयास किया। लेकिन प्रभु ने उन्हें पिता के बचन और कुल की मर्यादा का हवाला देकर समझाने का प्रयास किया। भरत राम संवाद को सुन लोग भाव विभोर हो गए।
जिस समय भगवान श्रीराम को वन भेजने की बात चली थी, उस समय भरत और शत्रुघभन दोनों ननिहाल गए थे। वापस लौटने पर उन्हें सारी बात की जानकारी हुई, उन्होंने कुबड़ी को दंड दिया और मां का तिरस्कार किया। वे प्रभु राम को वापस लाने पर विचार करने लगे। इस उद्देश्य से वे नगरवासियों के संग चित्रकूट रवाना हुए। भरत के संग नगरवासियों को आते देख भैया लखन भड़क गए।
उन्हें लगा कि भरत प्रभु से युद्ध करने के लिए आ रहें हैं, यह सोच लक्ष्मण भड़क गए। इस दौरान प्रभु श्रीराम ने उन्हें समझाया। भरत प्रभु के पास पहुंच गए और उनके चरण को पकड़कर रोने लगे। साथ ही उन्हें वापस ले जाने के लिए प्रयास करने लगें। प्रभु ने भरत को बहुत समझाया। साथ ही कुल की मर्यादा और पिता के द्वारा दिए गए वचन को निभाने की बात बोले।
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इस पर भरत ने संकल्प लिया, कि वो गद्दी पर तो नहीं बैठेंगे। सेवक थे और सेवक बनकर अयोध्या की सेवा करेंगे, बोले आपकी अनुपस्थिति में आपका खड़ाऊ रखकर वो अयोध्या का राज्य संभालेंगे।
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जिस समय भगवान श्रीराम को वन भेजने की बात चली थी, उस समय भरत और शत्रुघभन दोनों ननिहाल गए थे। वापस लौटने पर उन्हें सारी बात की जानकारी हुई, उन्होंने कुबड़ी को दंड दिया और मां का तिरस्कार किया। वे प्रभु राम को वापस लाने पर विचार करने लगे। इस उद्देश्य से वे नगरवासियों के संग चित्रकूट रवाना हुए। भरत के संग नगरवासियों को आते देख भैया लखन भड़क गए।
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उन्हें लगा कि भरत प्रभु से युद्ध करने के लिए आ रहें हैं, यह सोच लक्ष्मण भड़क गए। इस दौरान प्रभु श्रीराम ने उन्हें समझाया। भरत प्रभु के पास पहुंच गए और उनके चरण को पकड़कर रोने लगे। साथ ही उन्हें वापस ले जाने के लिए प्रयास करने लगें। प्रभु ने भरत को बहुत समझाया। साथ ही कुल की मर्यादा और पिता के द्वारा दिए गए वचन को निभाने की बात बोले।
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इस पर भरत ने संकल्प लिया, कि वो गद्दी पर तो नहीं बैठेंगे। सेवक थे और सेवक बनकर अयोध्या की सेवा करेंगे, बोले आपकी अनुपस्थिति में आपका खड़ाऊ रखकर वो अयोध्या का राज्य संभालेंगे।