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दूसरे दिन भी बैंकों पर लटके रहे ताले

Tue, 16 Mar 2021 11:49 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Mar 2021 11:49 PM IST
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Banks remain closed on second day of strike, account holders remain worried
हड़ताल के दूसरे दिन नगर के गाजीपुर तिराहा स्थित बड़ौदा यूपी बैंक के बाहर प्रदर्शन करते बैंक कर्म - फोटो : MAU
मऊ। बड़ौदा यूपी बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के बैनर तले बैंकों के निजीकरण के प्रयास के विरोध में राष्ट्रीय हड़ताल के दूसरे दिन भी बैंककर्मी हड़ताल पर रहे। बैंककर्मियों ने बैंक आफ बड़ौदा नरई बांध शाखा के सामने प्रदर्शन किया। इससे पूर्व वो जुुलूस निकालकर हर बैंकों पर पहुंचे। लगातार चार दिनों से बैंक बंद रहने से अधिकांश एटीएम में पैसा खत्म हो गया है और कई एटीएम बूथ बंद रहे। पैसा निकालने को लेकर लोग भटकते रहे। बैंकों की हड़ताल को अन्य संगठनों ने समर्थन दिया।
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यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियन के आह्वान पर बैंक अधिकारियों तथा बैंककर्मी दूसरे दिन मंगलवार को हड़ताल पर रहे। जनपद की सभी बैंक शाखाएं बंद रहीं। लगातार चार दिनों से बैंक बंद रहने से अधिकांश एटीएम से पैसा खत्म होने से एटीएम शो पीस बने रहे। परेशान खाताधारकों को बैरंग लौटना पड़ा। नगर स्थित एसबीआई के एटीएम पर पैसा निकालने आए अरविंद कुमार यादव, साधना सिंह, महेंद्र शर्मा का कहना था कि लगातार चार दिनों तक बैंक बंद रहने के बाद भी शासन प्रशासन की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी। दवा के लिए अधिक ब्याज पर कर्ज लेकर काम चलाना पड़ा। उधर बड़ौदा यूपी बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष बड़ौदा यूपी बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन अरेबिया के महामंत्री सूरज जायसवाल के नेतृत्व में बैंककर्मियों ने निजीकरण नीति का विरोध किया। सूरज जायसवाल ने कहा देश के चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार बैंक, रेलवे, एयरपोर्ट, एलआईसी का निजीकरण करने की नीति ला रही है, जो देश की जनता के लिए अभिशाप सिद्ध होगा। यदि हम आज मिलकर निजीकरण की लड़ाई नहीं लड़ेंगे तो, आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।
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यूनियन नेता आनंद स्वरूप ने भी निजीकरण नीति का विरोध किया। शशिभूषण सिंह ने कहा सरकार जनता से है ना कि जनता, सरकार से, इसलिए सरकार को जनता के हितों को ध्यान में रख कर फैसले लेने चाहिए। अमित सिंह, प्रशांत गुप्ता ने भी निजीकरण के खिलाफ अपने विचार प्रकट किए। यूनियन के अध्यक्ष आलोक सिंह ने कहा कि यदि सरकार निजीकरण के दु:स्वप्न को देखती है तो हम अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाएंगे। इस अवसर पर प्रशांत चतुर्वेदी, अंशुल कुमार, महेंद्र प्रताप, संतोष सिंह, राजीव भारद्वाज, दिनेश सिंह, परितोष मल्ल, सुनील निगम, गिरीश राय, अमित राय, विबुदेश राय, प्रियंका, दीपांकर पद्मेश, विकास, अविनाश कुमार, पंकज नायक, अखिलेश नायक, चंदन दीक्षित, पीयूष शाही, शिवानंद तिवारी, प्रकाश, लालधर, अमित नारायण आदि शामिल रहे।
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बैंक यूनियन इंपलाइज एसोसिएशन के जिला सचिव रामअवतार सिंह ने बताया कि दो दिनों के हड़ताल से करीब चार सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि बैंक हड़ताल से उपभोक्ताओं को दिक्कतें हुई है, लेकिन यह कदम भी उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

इनसेट
रुपये की जरूरत पर परेशान दिखे उपभोक्ता
मऊ। बैंक में हड़ताल, एटीएम खाली होने से उपभोक्ताओं के सामने बड़ा संकट छा गया। बात करने पर एक जरूरतमंद अनिल ने बताया कि वह मरीज लेकर आया था, दवा थोड़ी महंगी पड़ गई, तो उसे रुपये की आवश्यकता पड़ गई। इसके चलते वे परेशान हैं। अनिल का घर देवरांचल में है, इस कारण वह पूरी दवा लेकर घर जाना चाहता था। इसी तरह की समस्या अन्य के संग थी। परेशान वो लोग दिख रहें थे, जिनका घर मुख्यालय से दूर है। इसमें अधिकांश दवा और मरीज के परिवार के लोग थे।
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