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Mau News: सर्प दंश के मामलों का तैयार होगा लेखा-जोखा

Sun, 15 Sep 2024 04:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2024 04:10 AM IST
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An account of snake bite cases will be prepared
बारिश के दिनों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने के बाद अब ऐसे मामलों की पूरी रिपोर्टिंग की जाएगी। ऐसे केस में इलाज करने से लेकर उसके रेफर होने के बाद होने वाले उपचार का पूरा डाटा रखा जाएगा। सर्पदंश से होने वाली मौत को भी शामिल किया जाएगा। जिले से गई चिकित्सक, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दिया गया है। अब वहां से प्रशिक्षण लेकर आने वाले टीम जिले की सभी सीएचसी प्रभारी को प्रशिक्षण देगी। जिसके बाद यह प्रशिक्षण कार्य सभी ब्लॉक पर आयोजित किया जाएगा। जिसमें सर्पदंश के केस का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। आने वाले केस में किस प्रकार के लक्षण हैं और उसे एंटी स्नेक वेनम की कितनी वायल दी गई हैं। रेफर होने की स्थिति में भी केस का पूरा डिटेल रखा जाएगा।
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दो सीएचसी पर सर्पदंश के आठ फीसदी मामले, दो फीसदी सर्प के
एसीएमओ डॉ. बीके यादव बताया कि दोहरीघाट और फतेहपुर मंडाव में भी आठ फीसदी केस सर्पदंश के हैं। जिसमें दो फीसदी केस विषैले सांप से जुड़े होते है। बताया कि सांप का काटना एक घाव है जो सांप के नुकीले दांतों के त्वचा में चुभने से होता है। सांप शिकार को पकड़ने या खुद को बचाने के लिए काट सकता है। सांप के काटने से चोट लग सकती है और कुछ मामलों में, यह जानलेवा भी हो सकता है। सांप के काटने से शारीरिक घाव के अलावा भावनात्मक आघात भी हो सकता है।
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अप्रैल से लेकर अभी तक सर्पदंश के कुल 90 केस एक की मौत
जिला एपीडिमोलाजिस्ट रविशंकर ओझा ने बताया कि अप्रैल से लेकर अभी तक जनपद में सर्पदंश के 90 मामले आ चुके है। इसमें एक की उपचार के दौरान मौत हुई थी। बताया कि जनपद की सभी नौ सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम के दस वायल उपलब्ध कराई गई हैं। जरूरी होने पर इसे बढ़ाया भी जाएगा। जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट महेंद्र चौहान ने बताया कि जिला अस्पताल के स्टोर में अभी एंटी स्नेक वेनम की 10 वायल मौजूद हैं। बताया कि एक वायल में 10 एमएल दवा होती है। जिसे मरीज की स्थिति के आधार पर ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है।
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सर्पदंश के संबंधित केस का पूरा विवरण तैयार किया जाएगा। केस में लक्षण मिलने के बाद उपचार व रेफर होने की स्थिति में भी उसका डिटेल रखा जाएगा। सर्पदंश की घटना दैवीय आपदा की श्रेणी में आती है, ऐसे मामलों में सरकारी की तरफ से मुआवजा भी दिया जाता है।- डॉ. आरएन सिंह, नोडल अधिकारी
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