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Mau News: चार साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी अमृत सरोवर योजना
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मऊ। जनपद के सभी नौ ब्लॉकों के साथ नगर पालिका और नौ नगर पंचायत में 274 अमृत सरोवर बनाने की योजना चार साल के बाद भी अधूरी है।
दावा किया था कि सभी अमृत सरोवर बारिश की हर बूंद का संचय करेगी। गांव से लेकर शहर के लोगों को अमृत सरोवर पर आवागमन हो सके, इसके लिए पाथवे के साथ अमृत सरोवर के चारों ओर फलदार और छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। लेकिन यह योजना सही मायने में चार साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। जनपद का एक भी अमृत सरोवर अभी तक मानकों के मुताबिक पूरा नहीं हो सका है।
अमृत सरोवर योजना के तहत सरकार का दावा था कि सरोवरों के चारों तरफ इंटरलाकिंग वाले पाथ वे बनेंगे। इनडोर और आउटडोर भी बनाया जाएगा। सरोवर के चारों तरफ फलदार और छायादार वृक्ष लगाने का काम किया जाएगा। अमृत सरोवर का काम मनरेगा योजना के तहत ही पूरा होना था। कहा गया था कि अमृत सरोवर के पास ही राज वित्त से गांव के लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगाया जाएगा। लेकिन साल 2021-22 में शुरू हुई इस योजना के बाद जो दावा था, उसमें कई प्रकार की कटौती की गई, इसमें अमृत सरोवर के चारों तरफ पाथ वे को पक्का करने की बजाय उसे कच्चा ही रखा गया है। कुछ जगहों पर ही छायादार वृक्ष लग सकते हैं। कुछ गांव में तो ऐसे सरोवर हैं, जहां आज भी घरों का गंदा पानी बह रहा है। कहा गया था गांव-गांव अमृत सरोवर में ही छठ पूजा के दिन गांव की महिलाओं को गांव से दूर न जाना पड़ें, इसकी भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन ग्राम पंचायत की उदासीनता से गांव की महिलाएं अभी तक अमृत सरोवर पर अर्घ्य नहीं दे रही हैं।
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50 करोड़ किए गए खर्च
जनपद में 274 अमृत सरोवर को पूरा करने के लिए मनरेगा के तहत 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस लिहाज से एक एक अमृत सरोवर पर औसतन 17 लाख रुपया खर्च किया गया है।
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अधिकतर अमृत सरोवर का काम पूरा हो चुका है, कुछ जगहों पर इलनेट और आउटलेट का काम बाकी है। उसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
-उपेंद्र पाठक, डीसी मनरेगा, मऊ
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दावा किया था कि सभी अमृत सरोवर बारिश की हर बूंद का संचय करेगी। गांव से लेकर शहर के लोगों को अमृत सरोवर पर आवागमन हो सके, इसके लिए पाथवे के साथ अमृत सरोवर के चारों ओर फलदार और छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। लेकिन यह योजना सही मायने में चार साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। जनपद का एक भी अमृत सरोवर अभी तक मानकों के मुताबिक पूरा नहीं हो सका है।
अमृत सरोवर योजना के तहत सरकार का दावा था कि सरोवरों के चारों तरफ इंटरलाकिंग वाले पाथ वे बनेंगे। इनडोर और आउटडोर भी बनाया जाएगा। सरोवर के चारों तरफ फलदार और छायादार वृक्ष लगाने का काम किया जाएगा। अमृत सरोवर का काम मनरेगा योजना के तहत ही पूरा होना था। कहा गया था कि अमृत सरोवर के पास ही राज वित्त से गांव के लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगाया जाएगा। लेकिन साल 2021-22 में शुरू हुई इस योजना के बाद जो दावा था, उसमें कई प्रकार की कटौती की गई, इसमें अमृत सरोवर के चारों तरफ पाथ वे को पक्का करने की बजाय उसे कच्चा ही रखा गया है। कुछ जगहों पर ही छायादार वृक्ष लग सकते हैं। कुछ गांव में तो ऐसे सरोवर हैं, जहां आज भी घरों का गंदा पानी बह रहा है। कहा गया था गांव-गांव अमृत सरोवर में ही छठ पूजा के दिन गांव की महिलाओं को गांव से दूर न जाना पड़ें, इसकी भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन ग्राम पंचायत की उदासीनता से गांव की महिलाएं अभी तक अमृत सरोवर पर अर्घ्य नहीं दे रही हैं।
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50 करोड़ किए गए खर्च
जनपद में 274 अमृत सरोवर को पूरा करने के लिए मनरेगा के तहत 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस लिहाज से एक एक अमृत सरोवर पर औसतन 17 लाख रुपया खर्च किया गया है।
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अधिकतर अमृत सरोवर का काम पूरा हो चुका है, कुछ जगहों पर इलनेट और आउटलेट का काम बाकी है। उसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
-उपेंद्र पाठक, डीसी मनरेगा, मऊ