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स्थिर होने के बाद फिर हुई लाल निशान पार
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 14 Aug 2016 11:56 PM IST
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बाढ़
लगातार पांच दिनों तक घाघरा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद रविवार को नदी के खतरा बिंदु पार करते ही कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों में खलबली मच गयी है। नदी के उग्र रुप धारण करने से दोहरीघाट नगर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। मुक्तिधाम के पास श्मशान घाट का आधा हिस्सा नदी में विलीन होने के बाद भी कटान समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है।
लगातार पांच दिनों तक घाघरा का जलस्तर खतरा बिंदु पर स्थिर रहने के बाद एकाएक नदी का जलस्तर में 10 सेमी वृद्धि होने से कस्बावासियों सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो रविवार को नदी के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी 70 मीटर पर बह रही है। शनिवार को नदी का जलस्तर 69.90 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है।
मुक्तिधाम क पास श्मशान घाट के दक्षिण कटान तेज हो गयी है। श्मशान घाट का आधा हिस्सा नदी में विलीन हो चुका है। भारतमाता मंदिर पर घाघरा की प्रलयंकारी लहरें किनारों पर टक्कर मार रही हैं। जिससे मंदिर पर खतरा बढ गया है। नदी के उग्र रुप धारण करने से मुक्तिधाम सहित नगर की दुर्गा मंदिर शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर ,लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला ,डीह बाबा का मंदिर, खाकी बाबा की कुटी आदि धरोहरे एक बार पुन: खतरे में पड गयी है।
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खतरा बिंदु पार होते ही नदी का पानी तटवर्ती इलाको में तेजी से घुसने लगा है जिससे हजारों एकड फसल पानी में डूब गयी है। घाघरा केे तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नौली, चिऊटीडांड़, बहादुरपुर, पतनई, ठाकुरगांव, सरया बीबीपुर, गोधनी ,गौरीडीह जमीरा चौराडीह, कोरौली बेलौली पाउस, चंद्राबारी, सूरजपुर रसुलपुर आदि गांवो के लागों की बेचैनी बढ़ गयी है। नदी द्वारा कहर बरपाने के बाद भी कटान समस्या का समाधान ढूढा नहीं जा सका है।
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लगातार पांच दिनों तक घाघरा का जलस्तर खतरा बिंदु पर स्थिर रहने के बाद एकाएक नदी का जलस्तर में 10 सेमी वृद्धि होने से कस्बावासियों सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो रविवार को नदी के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी 70 मीटर पर बह रही है। शनिवार को नदी का जलस्तर 69.90 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है।
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मुक्तिधाम क पास श्मशान घाट के दक्षिण कटान तेज हो गयी है। श्मशान घाट का आधा हिस्सा नदी में विलीन हो चुका है। भारतमाता मंदिर पर घाघरा की प्रलयंकारी लहरें किनारों पर टक्कर मार रही हैं। जिससे मंदिर पर खतरा बढ गया है। नदी के उग्र रुप धारण करने से मुक्तिधाम सहित नगर की दुर्गा मंदिर शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर ,लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला ,डीह बाबा का मंदिर, खाकी बाबा की कुटी आदि धरोहरे एक बार पुन: खतरे में पड गयी है।
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खतरा बिंदु पार होते ही नदी का पानी तटवर्ती इलाको में तेजी से घुसने लगा है जिससे हजारों एकड फसल पानी में डूब गयी है। घाघरा केे तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नौली, चिऊटीडांड़, बहादुरपुर, पतनई, ठाकुरगांव, सरया बीबीपुर, गोधनी ,गौरीडीह जमीरा चौराडीह, कोरौली बेलौली पाउस, चंद्राबारी, सूरजपुर रसुलपुर आदि गांवो के लागों की बेचैनी बढ़ गयी है। नदी द्वारा कहर बरपाने के बाद भी कटान समस्या का समाधान ढूढा नहीं जा सका है।