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फेफड़े के बाद अब दिल पर अटैक कर रहा है कोरोना संक्रमण
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मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर पहली लहर से ज्यादा जानलेवा साबित होती दिख रही है। जहां बीते मार्च माह तक संक्रमण से मृत मरीजों की संख्या 39 थी, वह अब 58 तक पहुंच चुकी है। संक्रमण की दूसरी लहर दो से तीन दिन में ही मरीजों के फेफड़ों को खराब कर रहा है और इसी वजह से वह दम तोड़ रहे हैं। जिले में कोविड अस्पतालों में ऐसे भी कुछ मामले सामने आए हैं, जहां वायरस फेफड़ों के साथ हृदय को भी नुकसान पहुंचा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमण रक्त वाहिकाओं पर भी बुरा असर डाल रहा है, जो उनके अंदर सूजन पैदा करके रक्त के थक्के बना रहा है। इस कारण मरीजों को दिल का दौरा भी पड़ जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
जिला अस्पताल के सीनियर फीजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले कुछ कोरोना मरीजों में हृदय संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं।कई युवा और 50 साल से अधिक उम्र के रोगी भी इससे ग्रस्त हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे मरीज भर्ती हुए हैं, जिनके हृदय में खून के धक्के जमे मिले हैं। बताते हैं कि कुछ कोरोना मरीजों में संक्रमण के कारण दिल की मांसपेशियों में सूजन की समस्या आ जाती है, जिससे हृदय का आकार बढ़ जाता है। रक्तचाप कम होने लगता है और मरीजों को दिल से संबंधित परेशानी होने लगती हैं। कहा कि कोविड संक्रमित मरीजों में खून के थक्के पाए गए हैं। कोरोना वायरस के कारण उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता घट जाती है और इससे हृदय में पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। जिन मरीजों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी होती है तो उन्हें भी कोरोना से गंभीर खतरा होता है।
ऐसे कर रहा दिल को प्रभावित
मऊ। सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह के मुताबिक, वायरस शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है। इसी प्रकार कोरोना से हृदय की मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। यह दिल की धमनियों में खून के धक्के जमा देता है। इससे रक्तचाप में दिक्कत आने लगती हैं। कई मरीजों में मरीजों की धड़कन कम या अधिक तेजी से चलने लगती हैं। इससे हार्टअटैक आता है। संक्रमित होने के पांचवें से छठे दिन के बाद मरीजों में यह समस्या देखी गई है।
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नगर के सहादतपुरा निवासी 55 वर्षीय महिला का ऑक्सीजन लेबल कम होने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां जांच में संक्रमण मिलने पर उसे एल-2 अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहां चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति गंभीर देख मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला मरीज चिकित्सकों के देखरेख में संक्रमण से रिकवर कर रही थी, लेकिन चार दिनों बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
उम्रदराज लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक
मऊ। कोरोना संक्रमण के कारण शरीर में खून के थक्के जमने की प्रवृति ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। दरअसल इस उम्र के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इस कारण कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिए शरीर पर्याप्त मात्रा में एंटीडोज नहीं बना पाता। इसके अलावा बीपी, हार्ट तथा शुगर के मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचने की ज्यादा जरुरत है। क्योकि हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजों को अगर कोरोना संक्रमण होता है तो रिस्क डबल हो जाता है। वहीं शुगर मरीजों के लिए यह खतरनाक है। शरीर में बढ़ी हुई शुगर के कारण व्यक्ति का शरीर कोरोना वायरस को मारने के लिए जरूरी टी-सेल्स का निर्माण नहीं कर पाता है, इससे वायरस शरीर के कई अंगों को अपने चपेट में ले लेता है।
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जिला अस्पताल के सीनियर फीजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले कुछ कोरोना मरीजों में हृदय संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं।कई युवा और 50 साल से अधिक उम्र के रोगी भी इससे ग्रस्त हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे मरीज भर्ती हुए हैं, जिनके हृदय में खून के धक्के जमे मिले हैं। बताते हैं कि कुछ कोरोना मरीजों में संक्रमण के कारण दिल की मांसपेशियों में सूजन की समस्या आ जाती है, जिससे हृदय का आकार बढ़ जाता है। रक्तचाप कम होने लगता है और मरीजों को दिल से संबंधित परेशानी होने लगती हैं। कहा कि कोविड संक्रमित मरीजों में खून के थक्के पाए गए हैं। कोरोना वायरस के कारण उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता घट जाती है और इससे हृदय में पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। जिन मरीजों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी होती है तो उन्हें भी कोरोना से गंभीर खतरा होता है।
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ऐसे कर रहा दिल को प्रभावित
मऊ। सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह के मुताबिक, वायरस शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है। इसी प्रकार कोरोना से हृदय की मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। यह दिल की धमनियों में खून के धक्के जमा देता है। इससे रक्तचाप में दिक्कत आने लगती हैं। कई मरीजों में मरीजों की धड़कन कम या अधिक तेजी से चलने लगती हैं। इससे हार्टअटैक आता है। संक्रमित होने के पांचवें से छठे दिन के बाद मरीजों में यह समस्या देखी गई है।
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नगर के सहादतपुरा निवासी 55 वर्षीय महिला का ऑक्सीजन लेबल कम होने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां जांच में संक्रमण मिलने पर उसे एल-2 अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहां चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति गंभीर देख मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला मरीज चिकित्सकों के देखरेख में संक्रमण से रिकवर कर रही थी, लेकिन चार दिनों बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
उम्रदराज लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक
मऊ। कोरोना संक्रमण के कारण शरीर में खून के थक्के जमने की प्रवृति ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। दरअसल इस उम्र के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इस कारण कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिए शरीर पर्याप्त मात्रा में एंटीडोज नहीं बना पाता। इसके अलावा बीपी, हार्ट तथा शुगर के मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचने की ज्यादा जरुरत है। क्योकि हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजों को अगर कोरोना संक्रमण होता है तो रिस्क डबल हो जाता है। वहीं शुगर मरीजों के लिए यह खतरनाक है। शरीर में बढ़ी हुई शुगर के कारण व्यक्ति का शरीर कोरोना वायरस को मारने के लिए जरूरी टी-सेल्स का निर्माण नहीं कर पाता है, इससे वायरस शरीर के कई अंगों को अपने चपेट में ले लेता है।