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मधुबन के देवारा क्षेत्र के एक दर्जन गांव टापू में तब्दील
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मऊ के दुबारी क्षेत्र के गोबरही-बईरकंटा मार्ग पर घाघरा पानी में घुसकर पार करते लोग।
- फोटो : MAU
दुबारी (मऊ)। घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ने से देवारा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में गांव का आसपास के अन्य गांवों से संपर्क कट गया है। गांवों के संपर्क मार्गों पर भी पानी हिलोरे ले रहा। 20 किमी एरिया की हजारों एकड़ फसल जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
घाघरा नदी के खतरा निशान की तरफ तेजी से बढ़ने से देवारा इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी के उग्र तेवर देख लोग सशंकित हैं। मधुबन तहसील के हाहा नाला पर रविवार को नदी का जलस्तर 66.22 मीटर रहा। जबकि जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर रहा।
नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने के चलतेमधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाके के हरिलाल का पुरा, नकीहवा, धुस पुरा, मनमन का पुरा, बिशुन पुरवा, विंदर का पुरा, बईरकंटा पुरा, भगत का पुरा, चौहानपुर, बरोहा, कुंवरपुरवा, पब्बर पुरा, परसिया भटोली, चक्कीमूसाडोही, हरिलाल का पुरा सहित एक दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। जलजमाव होने से बाजरा, धान, मक्का, गन्ना सहित तमाम हजारों एकड़ फसलें जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
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तहसील प्रशासन की तरफ से नावों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर गहरे पाने से होकर आना जाना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि संपर्क मार्ग डूब जाने से आना जाना मुश्किल हो गया है। लेकिन न तो प्रशासनिक अधिकारी और न ही विभागीय अधिकारी सुधि ले रहे हैं।
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घाघरा नदी के खतरा निशान की तरफ तेजी से बढ़ने से देवारा इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी के उग्र तेवर देख लोग सशंकित हैं। मधुबन तहसील के हाहा नाला पर रविवार को नदी का जलस्तर 66.22 मीटर रहा। जबकि जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर रहा।
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नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने के चलतेमधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाके के हरिलाल का पुरा, नकीहवा, धुस पुरा, मनमन का पुरा, बिशुन पुरवा, विंदर का पुरा, बईरकंटा पुरा, भगत का पुरा, चौहानपुर, बरोहा, कुंवरपुरवा, पब्बर पुरा, परसिया भटोली, चक्कीमूसाडोही, हरिलाल का पुरा सहित एक दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। जलजमाव होने से बाजरा, धान, मक्का, गन्ना सहित तमाम हजारों एकड़ फसलें जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
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तहसील प्रशासन की तरफ से नावों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर गहरे पाने से होकर आना जाना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि संपर्क मार्ग डूब जाने से आना जाना मुश्किल हो गया है। लेकिन न तो प्रशासनिक अधिकारी और न ही विभागीय अधिकारी सुधि ले रहे हैं।