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समय सीमा समाप्त हुई, नहीं पूरा हुआ सत्यापन
Mau
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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मऊ। जिले के अधिकांश परिषदीय तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों में नि:शुल्क ड्रेस वितरण अभी तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। खंड शिक्षा अधिकारी धन के देर से आने का रोना रो रहे हैं। ड्रेस वितरण के मामले में जिला प्रशासन ने ब्लाकस्तरीय जांच टीमों से सत्यापन कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। प्रशासनिक लापरवाही की स्थिति यह है कि जिलाधिकारी ने छह नवंबर को पत्र जारी किया गया था। 13 नवंबर को एक हफ्ते की मियाद भी खत्म हो गई। लेकिन विद्यालयों में जांच टीम पहुंच ही नहीं सकी है।
जनपद में 1605 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक सहित सहायता प्राप्त विद्यालय स्थापित हैं। शासन की ओर से परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों में नि:शुल्क दो सेट यूनिफार्म का वितरण अक्तूबर माह में ही वितरित करने का फरमान जारी किया गया था। लेकिन ज्यादातर विद्यालयों मेें अभी तक ड्रेस वितरण सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। खंड शिक्षा अधिकारियों की मानें तो खाते में धन देर से आने की बात कही जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से ड्रेेस वितरण के मामले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रत्येक ब्लाक में दो टीमों का गठन किया गया है। पिछले वर्ष ड्रेस वितरण में व्यापक पैमाने पर अनियमितता के मद्देनजर प्रशासन ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भरोसा न कर जांच टीम में केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही टीम में शामिल किया गया है। प्रत्येक ब्लाक मेें नायब तहसीलदार/एडीओ के नेतृत्व में लेखाकार, कानूनगो सहित तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। जिलाधिकारी ने जांच टीमों से एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह नवंबर को पत्र जारी किया था। पत्र जारी होने को एक हफ्ता बीत गया। लेकिन जांच टीम के अधिकांश सदस्य सत्यापन के प्रति उदासीन नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि विद्यालयों पर जांच टीम पहुंच ही नहीं सकी है। प्रभारी जिला संपरीक्षा अधिकारी जय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जांच टीम के सदस्यों को जिलाधिकारी का आदेश हस्तगत करा दिया गया है। वहीं मधुबन तहसीलदार पीपी उपाध्याय ने बताया कि आदेश तो आया है। सोमवार को नायब तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी जाएगी। वहीं नायब तहसीलदार घोसी राममूरत ने बताया कि जल्द से जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।
निर्देश देकर खुद डीएम ही फोन नहीं उठाते
मऊ। शासन की ओर से जनता की समस्याओं के मद्देनजर चौबीसों घंटे प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। जनकल्याणकारी योजना नि:शुल्क ड्रेस वितरण के बाबत जिलाधिकारी भूपेंद्र एस चौधरी से रविवार अपराह्न 1.53 पर अमर उजाला प्रतिनिधि ने संपर्क किया तो उनके मातहत ने बताया कि मोबाइल चार्ज में है। अभी बात नहीं हो सकती है। पूछा गया, कब बात कर पाना संभव होगा। तो जवाब मिला... पता नहीं। उल्लेखनीय है कि खुद जिलाधिकारी ने कुछ दिनों पूर्व ही जिले भर के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया था कि सीयूजी नंबर चौबीसों घंटे आन रहना चाहिए और फोन आने पर जरूर उठना चाहिए। लेकिन जब जिलाधिकारी के सीयूजी का ही यह हाल है तो बाकी स्थिति का सहज ही जायजा लगाया जा सकता है।
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डिबार स्कूलों को केंद्र बनाने पर विचार
मऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की बैठक ब्रह्मस्थान स्थित शिक्षक भवन पर हुई। इसमें जनपदीय समस्याएं जैसे पदोन्नति, बोनस भुगतान तथा शासनादेश के आधार पर काली सूची में अकारण डाले गए विद्यालयों को केंद्र बनाने पर विचार विमर्श किया गया।
कृष्णानंद सिंह ने कहा कि जनपद के इंटर कालेज सूरजपुर, इंटर कालेज तालचंवर और इंटर कालेज हलधरपुर को बोर्ड द्वारा अकारण काली सूची में डाल दिया गया है। इन विद्यालयों को भी केंद्र बनाने के लिए संगठन प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इसके संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक से वार्ता हुई है। इन्हें भी केंद्र बनाने का आश्वासन प्राप्त हुआ है। श्री सिंह ने कहा कि यदि शासनादेश के विपरीत कहीं भी किसी प्रकार की त्रुटि और अनियमितता जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से की जाएगी तो आंदोलन किया जाएगा। उन्हाेंने 21 नवंबर को विधानसभा लखनऊ का घेराव करने के केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को मूर्त रूप देने पर कहा कि जनपद का प्रत्येक शिक्षक पहुंचकर अपनी ताकत का एहसास सरकार को कराएं। अंत में जनपदीय सम्मेलन को अभूतपूर्व बनाने, स्व. पंचानन राय स्मृति भवन के लोकार्पण 30 जून को सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को सम्मानित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रकरणों के निस्तारण करने की रणनीति पर विचार विमर्श हुआ। बैठक को जयनारायण द्विवेदी, रामलखन यादव, रणधीर सिंह, अवनीश सिंह, महेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, रविंद्र नाथ सिंह, देवभाष्कर तिवारी आदि ने संबोधित किया। इस दौरान मुख्य रूप से संजय कुमार, अवधेश यादव, प्रमोद सिंह, भूपेंद्र वीर सिंह, रामअवध, मनोज सिंह, धर्मराज सिंह, शोएब अहमद, चंद्रभूषण राय, प्रताप यादव, मानवेंद्र बहादुर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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जनपद में 1605 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक सहित सहायता प्राप्त विद्यालय स्थापित हैं। शासन की ओर से परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों में नि:शुल्क दो सेट यूनिफार्म का वितरण अक्तूबर माह में ही वितरित करने का फरमान जारी किया गया था। लेकिन ज्यादातर विद्यालयों मेें अभी तक ड्रेस वितरण सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। खंड शिक्षा अधिकारियों की मानें तो खाते में धन देर से आने की बात कही जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से ड्रेेस वितरण के मामले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रत्येक ब्लाक में दो टीमों का गठन किया गया है। पिछले वर्ष ड्रेस वितरण में व्यापक पैमाने पर अनियमितता के मद्देनजर प्रशासन ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भरोसा न कर जांच टीम में केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही टीम में शामिल किया गया है। प्रत्येक ब्लाक मेें नायब तहसीलदार/एडीओ के नेतृत्व में लेखाकार, कानूनगो सहित तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। जिलाधिकारी ने जांच टीमों से एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह नवंबर को पत्र जारी किया था। पत्र जारी होने को एक हफ्ता बीत गया। लेकिन जांच टीम के अधिकांश सदस्य सत्यापन के प्रति उदासीन नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि विद्यालयों पर जांच टीम पहुंच ही नहीं सकी है। प्रभारी जिला संपरीक्षा अधिकारी जय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जांच टीम के सदस्यों को जिलाधिकारी का आदेश हस्तगत करा दिया गया है। वहीं मधुबन तहसीलदार पीपी उपाध्याय ने बताया कि आदेश तो आया है। सोमवार को नायब तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी जाएगी। वहीं नायब तहसीलदार घोसी राममूरत ने बताया कि जल्द से जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।
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निर्देश देकर खुद डीएम ही फोन नहीं उठाते
मऊ। शासन की ओर से जनता की समस्याओं के मद्देनजर चौबीसों घंटे प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। जनकल्याणकारी योजना नि:शुल्क ड्रेस वितरण के बाबत जिलाधिकारी भूपेंद्र एस चौधरी से रविवार अपराह्न 1.53 पर अमर उजाला प्रतिनिधि ने संपर्क किया तो उनके मातहत ने बताया कि मोबाइल चार्ज में है। अभी बात नहीं हो सकती है। पूछा गया, कब बात कर पाना संभव होगा। तो जवाब मिला... पता नहीं। उल्लेखनीय है कि खुद जिलाधिकारी ने कुछ दिनों पूर्व ही जिले भर के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया था कि सीयूजी नंबर चौबीसों घंटे आन रहना चाहिए और फोन आने पर जरूर उठना चाहिए। लेकिन जब जिलाधिकारी के सीयूजी का ही यह हाल है तो बाकी स्थिति का सहज ही जायजा लगाया जा सकता है।
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डिबार स्कूलों को केंद्र बनाने पर विचार
मऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की बैठक ब्रह्मस्थान स्थित शिक्षक भवन पर हुई। इसमें जनपदीय समस्याएं जैसे पदोन्नति, बोनस भुगतान तथा शासनादेश के आधार पर काली सूची में अकारण डाले गए विद्यालयों को केंद्र बनाने पर विचार विमर्श किया गया।
कृष्णानंद सिंह ने कहा कि जनपद के इंटर कालेज सूरजपुर, इंटर कालेज तालचंवर और इंटर कालेज हलधरपुर को बोर्ड द्वारा अकारण काली सूची में डाल दिया गया है। इन विद्यालयों को भी केंद्र बनाने के लिए संगठन प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इसके संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक से वार्ता हुई है। इन्हें भी केंद्र बनाने का आश्वासन प्राप्त हुआ है। श्री सिंह ने कहा कि यदि शासनादेश के विपरीत कहीं भी किसी प्रकार की त्रुटि और अनियमितता जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से की जाएगी तो आंदोलन किया जाएगा। उन्हाेंने 21 नवंबर को विधानसभा लखनऊ का घेराव करने के केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को मूर्त रूप देने पर कहा कि जनपद का प्रत्येक शिक्षक पहुंचकर अपनी ताकत का एहसास सरकार को कराएं। अंत में जनपदीय सम्मेलन को अभूतपूर्व बनाने, स्व. पंचानन राय स्मृति भवन के लोकार्पण 30 जून को सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को सम्मानित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रकरणों के निस्तारण करने की रणनीति पर विचार विमर्श हुआ। बैठक को जयनारायण द्विवेदी, रामलखन यादव, रणधीर सिंह, अवनीश सिंह, महेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, रविंद्र नाथ सिंह, देवभाष्कर तिवारी आदि ने संबोधित किया। इस दौरान मुख्य रूप से संजय कुमार, अवधेश यादव, प्रमोद सिंह, भूपेंद्र वीर सिंह, रामअवध, मनोज सिंह, धर्मराज सिंह, शोएब अहमद, चंद्रभूषण राय, प्रताप यादव, मानवेंद्र बहादुर सिंह आदि उपस्थित रहे।