फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   सम्मान ने बढ़ा दी हैं जिम्मेदारियां

सम्मान ने बढ़ा दी हैं जिम्मेदारियां

Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
Mau
Mau Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
मऊ। ‘पुरस्कार ने कई गुना जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। सिर्फ एक ही कोशिश रोजाना रहती है कि मेरा समय जाया न जाए। अपने छात्रों को ऐसे संवारू कि उनका भविष्य हमारे राष्ट्र की ठोस बुनियाद बनें।’ यह कहना था रविवार को महामहिम के हाथों राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार लेकर घर वापस लौटे शिक्षक रामनिवास मौर्य का। श्री मौर्य रविवार को पत्नी केे साथ लिच्छवी ट्रेन से मऊ जंक्शन पर उतरे।
विज्ञापन

कोपागंज ब्लाक के लैरोदोनवार निवासी और प्राथमिक विद्यालय देईथान के सहायक अध्यापक रामनिवास ने अमर उजाला से कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता है। हम ऐसी जगह हैं जहां से देश को बहुत कुछ दे सकते हैं। महामहिम के हाथों जो पुरस्कार मिला है उसने जिम्मेदारियों को कई गुना बढ़ा दिया है। सदैव यही कोशिश रहेगी कि मुझे मेरे छात्रों पर नाज हो और मेरे छात्रों को मुझको। सभी को धन्यवाद। इसके पूर्व स्टेशन पर पहुंचते ही शिक्षक शिवाकांत सिंह और जिला स्काउट कमिश्नर राकेश कुमार ने माला पहना कर श्री मौर्य का स्वागत किया और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर बालकृष्ण ठरड, देव प्रकाश राय, राकेश सिंह, रामनवल राही, जितेंद्र गोयल, आलोक मिश्र, उमाकांत यादव, डा. गिरीश पांडेय, प्रमोद राय आदि लोगों ने स्टेशन पर रामनिवास मौर्या का स्वागत करते हुए उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया।
विज्ञापन


लौटते ही जुट गए राष्ट्रीय कार्यक्रम में
इंदारा। राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त कर लौटे रामनिवास मौर्य स्टेशन पर उतर कर अपने घर नहीं गए। मऊ से उन्होंने सीधे अपने विद्यालय का रुख किया। जहां बच्चों को पिलाए जा रहे पोलियो ड्राप के कार्यक्रम में उन्होंने सहयोग किया। लोगों ने कहा कि अरे भाई थक गए होंगे, लंबा सफर था, आराम कर लीजिए। श्री मौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा कि थकना कैसा, आखिर यह भी तो हमारी ही जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इशरावती देवी दिखीं गदगद
इंदारा। पति को मिले सम्मान को देख कर इशरावती देवी भी गदगद दिखी। दिल्ली से साथ ही वापस लौटी इशरावती ने बेहद सरल लहजे में कहा कि अच्छी मेहनत पर बड़े पीठ थपथपाएं तो अच्छा तो लगता ही है। मास्टर साहब अपनी धुन के पक्के हैं। अपना काम ईमानदारी से करते हैं। सब बड़ों का आशीर्वाद है जिसकी वजह से नाम कमा रहे हैं।


शिक्षा है अनमोल रतन
इंदारा। जिले के शिक्षकों को अपने संदेश में रामनिवास मौर्य ने कहा कि, हम अपने बच्चों के जैसे ही विद्यालय के बच्चों को समझें। बस यहीं से फर्क आता चला जाएगा। कहा कि, जिले के सभी शिक्षक साथी सुयोग्य हैं और दो शिक्षकों को एक साथ राष्ट्रपति पुरस्कार मिलना जिले के शैक्षणिक भविष्य के लिए सुखद संकेत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed