{"_id":"62145","slug":"Mau-62145-61","type":"story","status":"publish","title_hn":"भांजे ने मामा को लगाई तगड़ी चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भांजे ने मामा को लगाई तगड़ी चपत
Mau
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
मऊ। सरायलखंसी थाना क्षेत्र के इमिलियाडीह निवासी रिटायर्ड फौजी ने अपने ही भांजे के ऊपर धोखे से एटीएम बदलने और फिर खाते से साढ़े पांच लाख रुपये से ज्यादा राशि निकालने का मुकदमा दो माह पहले दर्ज कराया था। खाते से इस तरह से रुपये निकालने पर जहां एक ओर फौजी समेत पूरा परिवार सन्न रह गया। वहीं दूसरी ओर रिश्तेदारी का मामला होने के चलते घटना के दो माह बाद भी परिजन खुल कर कुछ कहने से कतरा रहे थे।
मिली जानकारी के अनुसार, रिटायर्ड फौजी श्रीकांत पांडेय थाना सरायलखंसी के इमिलियाडीह के रहने वाले हैं। भारतीय स्टेट बैंक की शाखा मऊ में उनका खाता है। दो फरवरी 2012 तक उनके खाते में 5,52,848.95 रुपये थे। उसी दिन उन्होंने अपनी पुत्री के साथ अपने भांजे अंगद तिवारी पुत्र कमलेश, निवासी किशुनपुर, गाजीपुर को एटीएम से 20000 रुपये निकालने के लिए भेजा। पूर्व में भी अंगद उनके एटीएम से कई बार पैसा निकाल कर उन्हें दे चुका था।
इसके बाद न श्रीकांत को पैसे की आवश्यकता हुई न ही उन्होंने एटीएम का इस्तेमाल किया। 05 मार्च 2012 को अचानक गोरखपुर पुलिस उनके घर पहुंची और बताया कि आपके खाते में 15 फरवरी को किसी दूसरे के खाते के 11700 रुपये आ गए हैं। चेक कराने के लिए गोरखपुर पुलिस के साथ श्रीकांत बैंक पहुंचे तो वहां पाया कि दो फरवरी 2012 से लेकर पांच मार्च 2012 के बीच उनके खाते से पूरा पैसा निकाल लिया गया है। यह देखते ही श्रीकांत अवाक रह गए। आननफानन में उन्होंने बैंक मैनेजर को पूरा माजरा बताया और अपना एटीएम देखा तो पाया कि कार्ड पर उनके नाम की जगह कालिंदी सिंह लिखा है।
विज्ञापन
बैंक में पासबुक चेक कराने पर पता चला कि उनके खाते से रुपये गोरखपुर, बस्ती, फैजाबाद, बिजनौर और हिसार से अलग-अलग तारीखों में निकाले गए हैं। श्रीकांत को तब याद आया कि अंगद ने एटीएम जैसे दिया था वैसे ही है। पूरा मामला भांप कर वह भागे-भागे सदर कोतवाली पहुंचे और पूरे घटनाक्रम से कोतवाल को अवगत कराया।
कोतवाली पुलिस ने 25 मार्च को अंगद के खिलाफ नामजद मुकदमा भी दर्ज कर लिया। लेकिन जहां एक ओर श्रीकांत के रुपये उसे घटना के दो माह बाद भी नहीं मिल सके हैं वहीं आरोपी भी पुलिस की जद से बाहर है। पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश श्रीकांत कहते हैं कि थोड़ी सी भी तत्परता यदि पुलिस दिखाती तो आरोपी पकड़ा जाता।
विज्ञापन
मिली जानकारी के अनुसार, रिटायर्ड फौजी श्रीकांत पांडेय थाना सरायलखंसी के इमिलियाडीह के रहने वाले हैं। भारतीय स्टेट बैंक की शाखा मऊ में उनका खाता है। दो फरवरी 2012 तक उनके खाते में 5,52,848.95 रुपये थे। उसी दिन उन्होंने अपनी पुत्री के साथ अपने भांजे अंगद तिवारी पुत्र कमलेश, निवासी किशुनपुर, गाजीपुर को एटीएम से 20000 रुपये निकालने के लिए भेजा। पूर्व में भी अंगद उनके एटीएम से कई बार पैसा निकाल कर उन्हें दे चुका था।
विज्ञापन
इसके बाद न श्रीकांत को पैसे की आवश्यकता हुई न ही उन्होंने एटीएम का इस्तेमाल किया। 05 मार्च 2012 को अचानक गोरखपुर पुलिस उनके घर पहुंची और बताया कि आपके खाते में 15 फरवरी को किसी दूसरे के खाते के 11700 रुपये आ गए हैं। चेक कराने के लिए गोरखपुर पुलिस के साथ श्रीकांत बैंक पहुंचे तो वहां पाया कि दो फरवरी 2012 से लेकर पांच मार्च 2012 के बीच उनके खाते से पूरा पैसा निकाल लिया गया है। यह देखते ही श्रीकांत अवाक रह गए। आननफानन में उन्होंने बैंक मैनेजर को पूरा माजरा बताया और अपना एटीएम देखा तो पाया कि कार्ड पर उनके नाम की जगह कालिंदी सिंह लिखा है।
विज्ञापन
बैंक में पासबुक चेक कराने पर पता चला कि उनके खाते से रुपये गोरखपुर, बस्ती, फैजाबाद, बिजनौर और हिसार से अलग-अलग तारीखों में निकाले गए हैं। श्रीकांत को तब याद आया कि अंगद ने एटीएम जैसे दिया था वैसे ही है। पूरा मामला भांप कर वह भागे-भागे सदर कोतवाली पहुंचे और पूरे घटनाक्रम से कोतवाल को अवगत कराया।
कोतवाली पुलिस ने 25 मार्च को अंगद के खिलाफ नामजद मुकदमा भी दर्ज कर लिया। लेकिन जहां एक ओर श्रीकांत के रुपये उसे घटना के दो माह बाद भी नहीं मिल सके हैं वहीं आरोपी भी पुलिस की जद से बाहर है। पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश श्रीकांत कहते हैं कि थोड़ी सी भी तत्परता यदि पुलिस दिखाती तो आरोपी पकड़ा जाता।