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श्रीराम आैर भरत का प्रेम देखकर भाव विह्वल हुए श्रद्धालु
Mau
Updated Thu, 17 Oct 2013 05:39 AM IST
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मऊ। श्रीराम लीला मेला समिति की ओर से चल रही रामलीला में श्रीराम, लक्ष्मण, सीता तथा बानरी सेना सहित पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए जुलूस के रूप में प्रस्थान की लीला का मंचन किया गया। शाही कटरा मैदान पर भगवान राम-लक्ष्मण बाहें पसारकर भरत शत्रुघ्न से मिलकर लिपट पड़े तो अगाध प्रेम की उस घड़ी में श्रद्धालुओं की आंखें छलछला गई। इस दौरान अयोध्यावासी पुष्प वर्षा कर सभी का भव्य स्वागत किया। इस मंचन को देख वहां उपस्थित दर्शक बरबस ही भाव विह्वल हो गए।
नगर के माता पोखरा से कटरा भरत मिलाप तक श्रीराम, लक्ष्मण, सीता तथा बानरी सेना सहित पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए जुलूस के रूप में प्रस्थान की लीला का मंचन किया गया। ‘रहे उ एक दिन अवधि अधारा समुझत मन दुख भयउ अपारा’ 14 वर्ष की अवधि बीतने मेें एक दिन शेष रहने पर नंदी ग्राम में प्रतीक्षारत भरत जी को भगवान के आने की सुधि न मिलने पर वह काफी अधीर हो जाते हैं। और मन ही मन सोचते हैं कि क्या कारण है कि भगवान नहीं आए। कहीं वे मुझे कुटिल जानकर भुला तो नहीं दिए। भरत का भगवान राम के प्रति अगाध प्रेम देख दर्शक भाव विह्वल हो गए। इसी सोच विचार में पड़े हुए थे कि तभी पवन पुत्र हनुमान भगवान राम के अयोध्या वापसी का संदेश लेकर भरत जी के यहां पहुंचते हैं। उनके चरणों में प्रणाम कर भगवान के आने का शुभ संदेश देते हैं। भरत जी को भगवान राम के आने की सूचना मिलते ही उनके खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। वे भगवान राम के आने की सूचना अयोध्यावासियों को देते हैं। साथ ही पूरे नगर को सजाने तथा भगवान श्रीराम के स्वागत की तैयारियों में जुट जाते हैं। जुलूस के साथ भारी संख्या में लोग जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। भगवान राम का पुष्पक विमान जिस रास्ते से गुजरने वाला था लोग पुष्प लिए हुए कतारबद्ध खड़े थे। जैसे ही पुष्पक विमान राजा राम का पुरा में पहुंचता है लोग जयश्रीराम का जयकारा लगाते हैं और पुष्प वर्षा करते हैं। पुष्पक विमान जैसे ही शाही कटरा मैदान में पहुंचता है भीड़ करतल ध्वनि से जयकारा लगाने लगी। भगवान राम, लक्ष्मण के साथ भरत से मिलने के लिए दौड़ पडे़। ‘परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपा सिंधु उर लाए...’ भरत जी भगवान राम के चरण पर गिर जाते हैं। भगवान राम भरत को हृदय से लगा लेते हैं। श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव व जयश्रीराम के जयकारे से वातावरण गूंज उठा। हर कोई हाथ जोडे़ दृश्यों को निहार जीवन को धन्य बना रहा था। आरती के बाद जुलूस राजगद्दी मैदान पहुंचता है जहां विधि-विधान से भगवान राम, माता सीता लक्ष्मण की आरती की जाती है।
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नगर के माता पोखरा से कटरा भरत मिलाप तक श्रीराम, लक्ष्मण, सीता तथा बानरी सेना सहित पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए जुलूस के रूप में प्रस्थान की लीला का मंचन किया गया। ‘रहे उ एक दिन अवधि अधारा समुझत मन दुख भयउ अपारा’ 14 वर्ष की अवधि बीतने मेें एक दिन शेष रहने पर नंदी ग्राम में प्रतीक्षारत भरत जी को भगवान के आने की सुधि न मिलने पर वह काफी अधीर हो जाते हैं। और मन ही मन सोचते हैं कि क्या कारण है कि भगवान नहीं आए। कहीं वे मुझे कुटिल जानकर भुला तो नहीं दिए। भरत का भगवान राम के प्रति अगाध प्रेम देख दर्शक भाव विह्वल हो गए। इसी सोच विचार में पड़े हुए थे कि तभी पवन पुत्र हनुमान भगवान राम के अयोध्या वापसी का संदेश लेकर भरत जी के यहां पहुंचते हैं। उनके चरणों में प्रणाम कर भगवान के आने का शुभ संदेश देते हैं। भरत जी को भगवान राम के आने की सूचना मिलते ही उनके खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। वे भगवान राम के आने की सूचना अयोध्यावासियों को देते हैं। साथ ही पूरे नगर को सजाने तथा भगवान श्रीराम के स्वागत की तैयारियों में जुट जाते हैं। जुलूस के साथ भारी संख्या में लोग जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। भगवान राम का पुष्पक विमान जिस रास्ते से गुजरने वाला था लोग पुष्प लिए हुए कतारबद्ध खड़े थे। जैसे ही पुष्पक विमान राजा राम का पुरा में पहुंचता है लोग जयश्रीराम का जयकारा लगाते हैं और पुष्प वर्षा करते हैं। पुष्पक विमान जैसे ही शाही कटरा मैदान में पहुंचता है भीड़ करतल ध्वनि से जयकारा लगाने लगी। भगवान राम, लक्ष्मण के साथ भरत से मिलने के लिए दौड़ पडे़। ‘परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपा सिंधु उर लाए...’ भरत जी भगवान राम के चरण पर गिर जाते हैं। भगवान राम भरत को हृदय से लगा लेते हैं। श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव व जयश्रीराम के जयकारे से वातावरण गूंज उठा। हर कोई हाथ जोडे़ दृश्यों को निहार जीवन को धन्य बना रहा था। आरती के बाद जुलूस राजगद्दी मैदान पहुंचता है जहां विधि-विधान से भगवान राम, माता सीता लक्ष्मण की आरती की जाती है।
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