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Mau News: 84 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई, 40 फीसदी पर सूखा, 15 फीसदी पर हल्दिया का संकट
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जनपद में किसान धान की रोपाई करने के बाद बारिश की आस लगाए हुए हैं। लेकिन अगस्त के दूसरे सप्ताह के बाद बारिश नहीं होने से उदास किसानों की आंखों में चिंता के कारण आंसू आ रहे हैं। वहीं बाली ले रही धान की फसल को हल्दिया रोग भी प्रभावित करने लगा है।
कृषि विभाग की तरफ से जनपद में 84 हजार हेक्टेयर खेतों में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया। जहां पर सिंचाई के संसाधन नहीं है, वहां फसल को बचाने का संकट मंडरा रहा है। अगस्त के आखिरी सप्ताह से लेकर अभी तक पारा भी लगातार 36 डिग्री तक पहुंच गया है। बारिश नहीं होने से करीब 40 फीसदी फसल पर सूखे और 15 फीसदी को रोग चपेट में ले लिया है। ज्यादा लागत लगाकर किसान अच्छी पैदावार की आस में था, लेकिन मौसम की बेरुखी से किसान चिंतित है। आमतौर पर किसान 15 जून से लेकर 15 जुलाई तक धान की रोपाई करता है। धान की रोपाई करने के बाद शुरुआती दिनों में जहां नियमित अंतराल पर बारिश होने से फसलों को संजीवनी मिल रही थी। अगस्त माह के दूसरा सप्ताह के बाद से बारिश नहीं होने से धान की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए किसान काफी जद्दोजहद कर रहा है। अगस्त माह के तीसरे और आखिरी सप्ताह से लेकर सितंबर माह के इस दूसरे सप्ताह में पारा की 35 के पार हो चला है। बीते दिनों जहां अच्छी बारिश होने से किसान खुश थे, लेकिन जब फसल को पानी की ज्यादा जरूरत है तो मौसम के गर्म होने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जहां पर धान की फसलों की सिंचाई के लिए नहर और कई अन्य सिंचाई के साधन है वहां किस दिन रात पानी चला कर फसलों को बचा रहा है। लेकिन जिन किसानों के पास अभी सिंचाई के संसाधन नहीं है उनकी निर्भरता किसी दूसरे के निजी ट्यूबवेल पर बनी है ऐसे किसान को उनके फसल के खराब होने का डर सताने लगा है। जिन किसानों के पास ट्यूबवेल के अपने निजी संसाधन है, वह पहले अपने खेतों की सिंचाई करने में लगे है। किसान आशीष राय, विनोद, अभिषेक, खुरमुल्ली, रामसरीख विवेकानंद ,रवींद्रनाथ पांडेय, तारकेश्वर, पंकज, बबलू यादव, राजकुमार, संतोष, सुनील का कहना है कि बारिश न् होना और लगातार पारे का चढ़ना अब मुसीबत बन गया है। फसल को पानी नहीं मिलने से खेतों में तेजी से घास उगने लगी है। एक तरफ किसान धान की फसल को बचाने के लिए सिंचाई कर रहा है। दूसरी तरफ मजदूरों के सहारे धान की सोहाई भी करने को मजबूर है।बारिश होने के जहां फसल को फायदा होता है साथ ही खेत में घास भी नहीं उगती है।
बाली ले रही धान की फसल को लेढ़ा या हल्दिया रोग प्रभावित कर रहा है। रोग से धान की फसल असमय सूख रही है। इससे बचाव के लिए किसान कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 300 ग्राम और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 2 पैकेट (6 ग्राम) को 150-200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।-डॉ. विनय कुमार सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी
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कृषि विभाग की तरफ से जनपद में 84 हजार हेक्टेयर खेतों में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया। जहां पर सिंचाई के संसाधन नहीं है, वहां फसल को बचाने का संकट मंडरा रहा है। अगस्त के आखिरी सप्ताह से लेकर अभी तक पारा भी लगातार 36 डिग्री तक पहुंच गया है। बारिश नहीं होने से करीब 40 फीसदी फसल पर सूखे और 15 फीसदी को रोग चपेट में ले लिया है। ज्यादा लागत लगाकर किसान अच्छी पैदावार की आस में था, लेकिन मौसम की बेरुखी से किसान चिंतित है। आमतौर पर किसान 15 जून से लेकर 15 जुलाई तक धान की रोपाई करता है। धान की रोपाई करने के बाद शुरुआती दिनों में जहां नियमित अंतराल पर बारिश होने से फसलों को संजीवनी मिल रही थी। अगस्त माह के दूसरा सप्ताह के बाद से बारिश नहीं होने से धान की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए किसान काफी जद्दोजहद कर रहा है। अगस्त माह के तीसरे और आखिरी सप्ताह से लेकर सितंबर माह के इस दूसरे सप्ताह में पारा की 35 के पार हो चला है। बीते दिनों जहां अच्छी बारिश होने से किसान खुश थे, लेकिन जब फसल को पानी की ज्यादा जरूरत है तो मौसम के गर्म होने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जहां पर धान की फसलों की सिंचाई के लिए नहर और कई अन्य सिंचाई के साधन है वहां किस दिन रात पानी चला कर फसलों को बचा रहा है। लेकिन जिन किसानों के पास अभी सिंचाई के संसाधन नहीं है उनकी निर्भरता किसी दूसरे के निजी ट्यूबवेल पर बनी है ऐसे किसान को उनके फसल के खराब होने का डर सताने लगा है। जिन किसानों के पास ट्यूबवेल के अपने निजी संसाधन है, वह पहले अपने खेतों की सिंचाई करने में लगे है। किसान आशीष राय, विनोद, अभिषेक, खुरमुल्ली, रामसरीख विवेकानंद ,रवींद्रनाथ पांडेय, तारकेश्वर, पंकज, बबलू यादव, राजकुमार, संतोष, सुनील का कहना है कि बारिश न् होना और लगातार पारे का चढ़ना अब मुसीबत बन गया है। फसल को पानी नहीं मिलने से खेतों में तेजी से घास उगने लगी है। एक तरफ किसान धान की फसल को बचाने के लिए सिंचाई कर रहा है। दूसरी तरफ मजदूरों के सहारे धान की सोहाई भी करने को मजबूर है।बारिश होने के जहां फसल को फायदा होता है साथ ही खेत में घास भी नहीं उगती है।
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बाली ले रही धान की फसल को लेढ़ा या हल्दिया रोग प्रभावित कर रहा है। रोग से धान की फसल असमय सूख रही है। इससे बचाव के लिए किसान कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 300 ग्राम और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 2 पैकेट (6 ग्राम) को 150-200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।-डॉ. विनय कुमार सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी
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