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73 फीसदी जनता की पूंजी एक प्रतिशत पूंजीपतियों के हाथ में
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घोसी तहसील पर राष्ट्रपति को सम्बोधित 9 सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम को सौपते अखिल भारतीय किसान सभा के लो
- फोटो : MAU
मुहम्मदाबाद गोहना। अखिल भारतीय किसान महासभा और खेत मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वाधान में सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों ने उप जिलाधिकारी को आठ सूत्री मांग पत्र सौंपा। किसान और कृषि की दुर्दशा पर सरकार की विफलता बताते हुए किसानों को राहत देने की मांग किया साथ ही केंद्र सरकार से कृषि की उपज का उचित समर्थन मूल्य और किसानों को मुफ्त खाद पानी और बिजली देने की मांग किया।
उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश सचिव रामकुमार भारती ने कहा कि देश की 68 फीसदी आबादी कृषि और किसानों पर निर्भर है। कार्य शक्ति का 52 प्रतिशत से भी अधिक उपयोग कृषि में होता है लेकिन किसानों की दुर्दशा सबसे अधिक हो रही है। श्री भारती ने कहा कि देश के 73 फीसदी जनता की पूंजी एक फीसदी पूंजीपतियों के हाथ में है। उन्होंने कहा कि विगत 15 दिन के अंदर डीजल और पेट्रोल के दामों में 10 से 15 रुपये की बढ़ोतरी से गरीब, मजदूर और किसानों की कमर ही टूट गई है।
कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड राम सोच यादव ने कहा कि कोरोना के चलते देश में शिक्षा चिकित्सा और सामाजिक संरचना पूरी तरह से टूट गया है । सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है । आजादी के बाद अब तक की सबसे अधिक बेरोजगारी दर से देश की हालत खस्ता हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय जितना पलायन नहीं हुआ था उससे अधिक पलायन करोना के चार महीने में हो चुका है लेकिन सरकार खुद अपनी पीठ थपथपा रही है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राष्ट्रपति को संबोधित आठ सूत्रीय मांग पत्र देते हुए पूरा करने की मांग किया। मांगपत्र में प्रमुख रूप से करोना काल में महानगरों से वापस आए बेरोजगार नौजवानों को 200 दिन की मजदूरी और न्यूनतम 600 रुपये का भुगतान करने, किसानों को प्रतिमाह 10 हजार का अनुदान देने, कोरोना से पीड़ित परिवार को 7500 रुपये प्रतिमाह मदद देने, डीजल पेट्रोल की मूल्य वृद्धि वापस लेने खरीफ फसल की एमएसपी बढ़ाने आदि की मांग किया। इस दौरान प्रमुख रूप से मदन लाल श्रीवास्तव, जयप्रकाश चौहान, रामजीत चौहान, रणविजय सिंह, सुभाष गौतम, अश्वनी राय, आदि शामिल रहे।
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उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश सचिव रामकुमार भारती ने कहा कि देश की 68 फीसदी आबादी कृषि और किसानों पर निर्भर है। कार्य शक्ति का 52 प्रतिशत से भी अधिक उपयोग कृषि में होता है लेकिन किसानों की दुर्दशा सबसे अधिक हो रही है। श्री भारती ने कहा कि देश के 73 फीसदी जनता की पूंजी एक फीसदी पूंजीपतियों के हाथ में है। उन्होंने कहा कि विगत 15 दिन के अंदर डीजल और पेट्रोल के दामों में 10 से 15 रुपये की बढ़ोतरी से गरीब, मजदूर और किसानों की कमर ही टूट गई है।
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कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड राम सोच यादव ने कहा कि कोरोना के चलते देश में शिक्षा चिकित्सा और सामाजिक संरचना पूरी तरह से टूट गया है । सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है । आजादी के बाद अब तक की सबसे अधिक बेरोजगारी दर से देश की हालत खस्ता हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय जितना पलायन नहीं हुआ था उससे अधिक पलायन करोना के चार महीने में हो चुका है लेकिन सरकार खुद अपनी पीठ थपथपा रही है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राष्ट्रपति को संबोधित आठ सूत्रीय मांग पत्र देते हुए पूरा करने की मांग किया। मांगपत्र में प्रमुख रूप से करोना काल में महानगरों से वापस आए बेरोजगार नौजवानों को 200 दिन की मजदूरी और न्यूनतम 600 रुपये का भुगतान करने, किसानों को प्रतिमाह 10 हजार का अनुदान देने, कोरोना से पीड़ित परिवार को 7500 रुपये प्रतिमाह मदद देने, डीजल पेट्रोल की मूल्य वृद्धि वापस लेने खरीफ फसल की एमएसपी बढ़ाने आदि की मांग किया। इस दौरान प्रमुख रूप से मदन लाल श्रीवास्तव, जयप्रकाश चौहान, रामजीत चौहान, रणविजय सिंह, सुभाष गौतम, अश्वनी राय, आदि शामिल रहे।
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