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68 मिलों पर बकाया है 13 करोड़ का धान
BEARU, AMAR UJALA, MAU
Updated Sat, 30 Apr 2016 11:38 PM IST
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ऐता गांव जहां हाथी ने नष्ट की हैं फसलें।
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद के मिल मालिकों के पास खाद्य विपणन विभाग का 13 करोड़ का धन डंप है। एक दो नहीं बल्कि 68 मिल मालिक ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी धान कूटने के नाम पर लिया लेकिन चावल नहीं दिया। न ही उसके धन का भुगतान किया। सरकारी धन को हजम करने की नियति से यह मामला वर्षों से लंबित है।
शासन से दबाव पड़ने पर विभाग इन्हें नोटिस भेजा। लेकिन इन मिल मालिकों पर कोई असर नहीं हो रहा। खाद्य विपणन ने इस मामले में एक मिल मालिक दो सगे भाइयों पर मुकदमा भी पंजीकृत कराया है। अब अन्य मिल मालिकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
वर्ष 2012 एवं वर्ष 2013 में जिला प्रशासन ने धान की खरीद करने के बाद उसे राइस मिल मालिकों को कूटने के लिए दिया था। लंबा अर्सा बीत जाने के बाद भी मिल मालिकों ने ना तो धान दिया और ना ही उसका निर्धारित मूल्य। वर्ष 2012 में 32 राइस मिल मालिकों को 5959 मीट्रिक टन धान दिए गए थे कुटने के लिए।
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वहीं वर्ष 2013 में 26 राइस मिल मालिकों को 4155 मीट्रिक टन धान दिए गए थे कूटने के लिए। इस प्रकार कुल 68 राइस मिल मालिकों को खाद्य विपणन विभाग ने कुटाई के लिए 10114 मीट्रिक टन धान दिए थे। इसकी कीमत विभाग ने 13 करोड़ 41 लाख रुपये आंकी थी। पिछले तीन वर्ष बाद भी इन राइस मिल मालिकों ने धान की कुटाई कर चावल नहीं लौटाया। इस संबंध में राइस मिल संचालकों को नोटिस भी जारी की गई लेकिन फिर भी उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
प्रशासन ने इस संबंध में शनिवार को दोहरीघाट के कुरंगा निवासी दो सगे भाई मिल मालिकों पर एसएमआई (सीनियर मार्केटिंग इंस्पेक्टर) अरुण कुमार वर्मा ने मुकदमा भी पंजीकृत कराया। इस संबंध में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि बकाएदार राइस मिल संचालकों के विरुद्ध धन या चावल की रिकवरी के लिए नोटिस भेजा है। अगर उन्होंने समय रहते चावल या उसके बदले धन नहीं जमा किया तो सभी के विरुद्ध होगा।
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शासन से दबाव पड़ने पर विभाग इन्हें नोटिस भेजा। लेकिन इन मिल मालिकों पर कोई असर नहीं हो रहा। खाद्य विपणन ने इस मामले में एक मिल मालिक दो सगे भाइयों पर मुकदमा भी पंजीकृत कराया है। अब अन्य मिल मालिकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
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वर्ष 2012 एवं वर्ष 2013 में जिला प्रशासन ने धान की खरीद करने के बाद उसे राइस मिल मालिकों को कूटने के लिए दिया था। लंबा अर्सा बीत जाने के बाद भी मिल मालिकों ने ना तो धान दिया और ना ही उसका निर्धारित मूल्य। वर्ष 2012 में 32 राइस मिल मालिकों को 5959 मीट्रिक टन धान दिए गए थे कुटने के लिए।
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वहीं वर्ष 2013 में 26 राइस मिल मालिकों को 4155 मीट्रिक टन धान दिए गए थे कूटने के लिए। इस प्रकार कुल 68 राइस मिल मालिकों को खाद्य विपणन विभाग ने कुटाई के लिए 10114 मीट्रिक टन धान दिए थे। इसकी कीमत विभाग ने 13 करोड़ 41 लाख रुपये आंकी थी। पिछले तीन वर्ष बाद भी इन राइस मिल मालिकों ने धान की कुटाई कर चावल नहीं लौटाया। इस संबंध में राइस मिल संचालकों को नोटिस भी जारी की गई लेकिन फिर भी उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
प्रशासन ने इस संबंध में शनिवार को दोहरीघाट के कुरंगा निवासी दो सगे भाई मिल मालिकों पर एसएमआई (सीनियर मार्केटिंग इंस्पेक्टर) अरुण कुमार वर्मा ने मुकदमा भी पंजीकृत कराया। इस संबंध में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि बकाएदार राइस मिल संचालकों के विरुद्ध धन या चावल की रिकवरी के लिए नोटिस भेजा है। अगर उन्होंने समय रहते चावल या उसके बदले धन नहीं जमा किया तो सभी के विरुद्ध होगा।