फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   53 hospitals, but an ICU in only one... 2.5 million people pinning their hopes on just four beds.

Mau News: अस्पताल 53, आईसीयू सिर्फ एक में... चार बेड से 25 लाख को उम्मीद

Fri, 04 Sep 2026 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:00 AM IST
विज्ञापन
53 hospitals, but an ICU in only one... 2.5 million people pinning their hopes on just four beds.
जिला अस्पताल के इमरजेंसी ​​स्थित आईसीयू वार्ड।संवाद
मऊ। जिले की करीब 25 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच गंभीर मरीजों के इलाज की तस्वीर चिंताजनक है। जिले के 53 सरकारी अस्पतालों में केवल जिला अस्पताल में ही आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। यहां भी वर्तमान में महज चार आईसीयू बेड हैं। ऐसे में किसी गंभीर बीमारी या स्वाइन फ्लू के गंभीर मामलों में मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ने पर सरकारी व्यवस्था सीमित साबित हो रही है और उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू को लेकर जिले के 12 बड़े सरकारी अस्पतालों में कुल 32 बेड के आइसोलेशन वार्ड तैयार किए जाने की बात कही जा रही है। जिला अस्पताल और टड़ियाव में 12-12 तथा प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो-दो बेड की व्यवस्था प्रस्तावित है। हालांकि, स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा केवल जिला अस्पताल में उपलब्ध होने से अन्य अस्पतालों में भर्ती संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए वहीं निर्भर रहना पड़ता है।
विज्ञापन

जिले में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और टड़ियाव में 100-100 बेड की क्षमता है। इसके बावजूद आईसीयू की सुविधा केवल जिला अस्पताल में है। वहीं 30-30 बेड की क्षमता वाले 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी आईसीयू की व्यवस्था नहीं है। इन केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी लंबे समय से बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में रोजाना करीब 2,500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें मऊ के अलावा बलिया और गाजीपुर के मरीज भी शामिल हैं। जिला अस्पताल में अकेले रोजाना 900 से अधिक मरीज ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं। गंभीर मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ने पर सीमित बेड के कारण तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ती है।
जिला अस्पताल में आईसीयू की शुरुआत दो वर्ष पहले दो बेड से हुई थी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसकी क्षमता बढ़ाकर चार बेड की गई। अब इसे आठ बेड का आईसीयू वार्ड बनाने की कवायद शुरू हो गई है। आईसीयू प्रभारी डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, दो वर्षों में करीब 200 गंभीर मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर उपचार दिया जा चुका है। क्षमता बढ़ने से एक साथ अधिक गंभीर मरीजों का इलाज संभव हो सकेगा।
सरकारी आईसीयू में इलाज पर प्रतिदिन औसतन तीन से चार हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि निजी अस्पतालों में यही खर्च 20 से 30 हजार रुपये या उससे अधिक पहुंच जाता है। जिला अस्पताल में आईसीयू बेड उपलब्ध न होने पर मरीजों के परिजनों के सामने निजी अस्पताल में उपचार कराने के अलावा अक्सर कोई विकल्प नहीं बचता।

दो साल पहले शुरू हुए आईसीयू से गंभीर मरीजों को काफी लाभ मिला है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले दो से चार बेड किए गए। अब इसे आठ बेड के आईसीयू वार्ड में बदलने की कवायद शुरू हो चुकी है, जिससे एक साथ आठ गंभीर मरीजों का उपचार हो सकेगा।
— डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल मऊ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed