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बदहाल पड़ा है पिलखी का कृषि विज्ञान केंद्र
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:33 PM IST
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रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के पिलखी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र बदहाल है। परिसर में तमाम बहुउद्देशीय भवन पड़े हैं। जिनका उपयोग नहीं होने के चलते यह जर्जर हाल में हैं। यहां बिजली, पेयजल सहित बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। केंद्र की काफी जमीनें बेकार पड़ी हैं। जबकि विभागीय अधिकारी बजट का रोना रो रहे।
जिले के किसानों को वैज्ञानिक विधि से खेती करने करने के प्रति जागरुक करने के लिए दशकों पूर्व रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के पिलखी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई। केंद्र का परिसर छह एकड़ में फैला है। लेकिन काफी भूमि बेकार पड़ी है। यही नहीं परिसर में लाखों की लागत से बहुउद्देशीय भवन बने हैं, लेकिन उपयोग मेें न होने के चलते शोपीस बने हैं। यहां बिजली, पेयजल सहित बुनियादी सुविधाओं का अकाल है। ऐसे में वैज्ञानिकों, कर्मचारियों को रहने की सुविधा तक नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र सुदूर इलाके में होने से शोध और नवीन जानकारियों का सभी किसानों तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता है। इस बारे में भाजपा जिला कोषाध्यक्ष राघवेंद्र राय शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा। शासन के निर्देश पर नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद के प्रशासनिक अधिकारी ने शासन को भेजे गए पत्र में बताया है कि परती भूमि के सदुपयोग के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। मरम्मत योग्य भवनों के लिए अनुदान प्राप्त करने के लिए पत्राचार किया गया है।किसानों के अनुसार वहां की किसी योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। जिस उद्देश्य से केंद्र को स्थापित कराया गया था वह पूरा नहीं हो पा रहा है। वहीं विभागीय अधिकारियों के अनुसार केंद्र के परिसर में बुनियादी सुविधाएं बहाल न होने के चलते वैज्ञानिकों को रिसर्च में दुश्वारियां आ रही हैं।
इस बाबत कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि सीमित संसाधनों के बीच बेहतर कार्य करने का प्रयास जारी है। अगर बेहतर सुविधाएं और पर्याप्त धन मिले तो और बेहतर कार्य किया जा सकता है।
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जिले के किसानों को वैज्ञानिक विधि से खेती करने करने के प्रति जागरुक करने के लिए दशकों पूर्व रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के पिलखी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई। केंद्र का परिसर छह एकड़ में फैला है। लेकिन काफी भूमि बेकार पड़ी है। यही नहीं परिसर में लाखों की लागत से बहुउद्देशीय भवन बने हैं, लेकिन उपयोग मेें न होने के चलते शोपीस बने हैं। यहां बिजली, पेयजल सहित बुनियादी सुविधाओं का अकाल है। ऐसे में वैज्ञानिकों, कर्मचारियों को रहने की सुविधा तक नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र सुदूर इलाके में होने से शोध और नवीन जानकारियों का सभी किसानों तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता है। इस बारे में भाजपा जिला कोषाध्यक्ष राघवेंद्र राय शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा। शासन के निर्देश पर नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद के प्रशासनिक अधिकारी ने शासन को भेजे गए पत्र में बताया है कि परती भूमि के सदुपयोग के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। मरम्मत योग्य भवनों के लिए अनुदान प्राप्त करने के लिए पत्राचार किया गया है।किसानों के अनुसार वहां की किसी योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। जिस उद्देश्य से केंद्र को स्थापित कराया गया था वह पूरा नहीं हो पा रहा है। वहीं विभागीय अधिकारियों के अनुसार केंद्र के परिसर में बुनियादी सुविधाएं बहाल न होने के चलते वैज्ञानिकों को रिसर्च में दुश्वारियां आ रही हैं।
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इस बाबत कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि सीमित संसाधनों के बीच बेहतर कार्य करने का प्रयास जारी है। अगर बेहतर सुविधाएं और पर्याप्त धन मिले तो और बेहतर कार्य किया जा सकता है।
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