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लू के थपेड़े झुलसा रहे शरीर
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। पारा 43 डिग्री पर रहा। तपिश और लू ने लोगों को जीना मुश्किल कर दिया। वहीं, गर्मी के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। यहां तक की शाम के बाद भी गर्म हवाएं लोगों को परेशान करती रहीं।
भीषण गर्मी का प्रकोप तथा बढ़ते तापमान से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। रविवार को पारा 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। लगभग नौ बजे से ही तापमान में इजाफा होना शुरु हो गया। समय बढ़ने के साथ ही पूरे दिन लोगों को बदन झुलसा देने वाली धूप का सामना करना पड़ा। तेज धूप तथा गर्मी के कहर से हर कोई परेशान दिखा। बुजुर्गो की मानें तो लंबे समय बाद गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मार से लोगों का शेड्यूल ही बदल गया है। सुबह ही अपने काम निपटा लेने की आपाधापी दिख रही है। धूप इतनी तेज हो रही है कि लोग बाहर आठ मिनट भी सहन करना मुश्किल हो रहा था। धूप तेज होने से सुबह से अपराह्न बाद तक लोगों ने घरों से बाहर निकलना मुनासिब नहीं समझा। मजबूरी में ही लोग दोपहर में घरों से बाहर निकले।
उधर, मौसम का मौजूदा रुख देखकर आम लोगों के साथ ही किसानों की चिंता खासी बढ़ गई है। तालाबों, पोखरों के सूखने से मवेशियों के समक्ष पेयजल संकट खड़ा होने लगा है। तालाबों में पानी नहीं है, जिससे पेयजल समस्या और भी बढ़ गई है। शासन प्रशासन के तमाम दिशा निर्देशों के बावजूद तालाबों में पानी भरवाने की कवायद नहीं की जा रही है। ऐसे में इसका का प्रतिकूल असर पशु पक्षियों पर देखने को मिल रहा है।किसानों को धान की नर्सरी तथा सब्जियों की फसलों को सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है।
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भीषण गर्मी का प्रकोप तथा बढ़ते तापमान से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। रविवार को पारा 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। लगभग नौ बजे से ही तापमान में इजाफा होना शुरु हो गया। समय बढ़ने के साथ ही पूरे दिन लोगों को बदन झुलसा देने वाली धूप का सामना करना पड़ा। तेज धूप तथा गर्मी के कहर से हर कोई परेशान दिखा। बुजुर्गो की मानें तो लंबे समय बाद गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मार से लोगों का शेड्यूल ही बदल गया है। सुबह ही अपने काम निपटा लेने की आपाधापी दिख रही है। धूप इतनी तेज हो रही है कि लोग बाहर आठ मिनट भी सहन करना मुश्किल हो रहा था। धूप तेज होने से सुबह से अपराह्न बाद तक लोगों ने घरों से बाहर निकलना मुनासिब नहीं समझा। मजबूरी में ही लोग दोपहर में घरों से बाहर निकले।
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उधर, मौसम का मौजूदा रुख देखकर आम लोगों के साथ ही किसानों की चिंता खासी बढ़ गई है। तालाबों, पोखरों के सूखने से मवेशियों के समक्ष पेयजल संकट खड़ा होने लगा है। तालाबों में पानी नहीं है, जिससे पेयजल समस्या और भी बढ़ गई है। शासन प्रशासन के तमाम दिशा निर्देशों के बावजूद तालाबों में पानी भरवाने की कवायद नहीं की जा रही है। ऐसे में इसका का प्रतिकूल असर पशु पक्षियों पर देखने को मिल रहा है।किसानों को धान की नर्सरी तथा सब्जियों की फसलों को सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है।
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