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इंदिरा आवास आवंटन में हेराफेरी की हो रही जांच
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:13 AM IST
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मऊ। पिछली सरकार के शासन काल में वर्ष 2013-14 में जिले में इंदिरा आवास के आवंटन में भारी अनियमितताएं की गईं। वर्ष 2002 की बीपीएल सूची ,पारिवारिक आईडी जाति कोड और बीपीएल नंबर बदलकर मनमानी करते हुए लाभार्थियों का चयन किया गया। रतनपुरा ब्लाक के एक नागरिक की ओर से भेजी गई शिकायत पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने गंभीर रुख अपनाया। ग्राम्य विकास आयुक्त ने इस प्रकरण की जांच के आदेश सीडीओ को दिए। सीडीओ ने इस प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। कई महीनों से चल रही जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इस जांच से जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों में हडकंप मचा है।
रतनपुरा ब्लाक के करउत गांव के निवासी कन्हैया लाल यादव ने 14 दिसंबर 2016को केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय को शिकायती पत्र भेजकर जिले में वर्ष 2013-14 में इंदिरा आवास आवंटन में घोर अनियमितता की शिकायत किया। शिकायत कर्ता ने लिखा है कि जिले में इस योजना की गाइड लाइन को ताक पर रखकर मनमाने तरीके अपनाए गए।अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मानकों की जमकर उपेक्षा की गई। वर्ष 2002 में तैयार की गई बीपीएल सूची की अनदेखी करके आवंटन किया गया। बीपीएल सूची में आनेवाले पात्रों को दरकिनार कर दिया गया। बीपीएल सूची के पात्रों की जगह सक्षमवानों को आवास आवंटि त किए गए। फेमिली आईडी को बदलकर अपात्रों को आवास दे दिए गए। जाति कोड में हरेफर करके दलालों के प्रभाव में इंदिरा आवास आवंटन में खेल किया गया। शिकायत में कहा गया है कि उस वर्ष में जिले में4250 आवासों का लक्ष्य था।इनमें अनियमितता करके 1300 अपात्रों को आवास दे दिए गए थे। विभागीय कर्मचारियों की मिली भगत से इस काम में लाखों रुपयों का खेल किया गया। शिकायती पत्र पर गंभीर रुख अख्तियार करते हुए केंद्रीय विकास मंत्रालय ने 28 अप्रैल 2017 को प्रदेश के ग्राम विकास आयुक्त को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। प्रदेश के ग्राम्य विकास आयुक्त 31 मई 2017 को सीडीओ को पत्र भेजकर इस प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। ग्राम्य विकास आयुक्त ने की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश भी सीडीओ को दिया। सीडीओ के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी विजय शंकर राय ने 15 जून 2017 को परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर अवगत कराया। इस बाबत सीडीओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर विस्तृत जांच के आदेश दिए। इस समिति में सहायक अभियंता डीआरडीए बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और परियोजना निर्देशक शामिल किए गए हैं। यह तीन सदस्यीय जांच समिति जांच कर रही है। लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। इस बाबत सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी का कहना है कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट मिलते ही उच्चाधिकारियों को प्रेषित की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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रतनपुरा ब्लाक के करउत गांव के निवासी कन्हैया लाल यादव ने 14 दिसंबर 2016को केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय को शिकायती पत्र भेजकर जिले में वर्ष 2013-14 में इंदिरा आवास आवंटन में घोर अनियमितता की शिकायत किया। शिकायत कर्ता ने लिखा है कि जिले में इस योजना की गाइड लाइन को ताक पर रखकर मनमाने तरीके अपनाए गए।अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मानकों की जमकर उपेक्षा की गई। वर्ष 2002 में तैयार की गई बीपीएल सूची की अनदेखी करके आवंटन किया गया। बीपीएल सूची में आनेवाले पात्रों को दरकिनार कर दिया गया। बीपीएल सूची के पात्रों की जगह सक्षमवानों को आवास आवंटि त किए गए। फेमिली आईडी को बदलकर अपात्रों को आवास दे दिए गए। जाति कोड में हरेफर करके दलालों के प्रभाव में इंदिरा आवास आवंटन में खेल किया गया। शिकायत में कहा गया है कि उस वर्ष में जिले में4250 आवासों का लक्ष्य था।इनमें अनियमितता करके 1300 अपात्रों को आवास दे दिए गए थे। विभागीय कर्मचारियों की मिली भगत से इस काम में लाखों रुपयों का खेल किया गया। शिकायती पत्र पर गंभीर रुख अख्तियार करते हुए केंद्रीय विकास मंत्रालय ने 28 अप्रैल 2017 को प्रदेश के ग्राम विकास आयुक्त को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। प्रदेश के ग्राम्य विकास आयुक्त 31 मई 2017 को सीडीओ को पत्र भेजकर इस प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। ग्राम्य विकास आयुक्त ने की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश भी सीडीओ को दिया। सीडीओ के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी विजय शंकर राय ने 15 जून 2017 को परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर अवगत कराया। इस बाबत सीडीओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर विस्तृत जांच के आदेश दिए। इस समिति में सहायक अभियंता डीआरडीए बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और परियोजना निर्देशक शामिल किए गए हैं। यह तीन सदस्यीय जांच समिति जांच कर रही है। लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। इस बाबत सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी का कहना है कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट मिलते ही उच्चाधिकारियों को प्रेषित की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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