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Mau News: 100 में 10 गर्भवती हाइपरटेंशन और एक डायबिटीज पीड़ित मिल रही

Thu, 12 Feb 2026 11:58 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:58 PM IST
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10 out of 100 pregnant women are found to be suffering from hypertension and one from diabetes.
हाइपरटेंशन की बीमारी गर्भवती महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है। जिला महिला अस्पताल में आने वालीं औसतन सौ में दसवीं गर्भवती महिला हाइपरटेंशन और सौ में हर एक महिला डायबिटीज का शिकार मिल रही है।
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आने वाली गर्भवती महिला का काउंसलिंग के बाद ही उपचार दिया जा रहा है। जिला महिला अस्पताल में रोजाना औसतन 280 से 300 महिला मरीज उपचार कराने के लिए आते है। चिकित्सक की सलाह पर गर्भवती की जांच कराई जाती है, जहां गर्भवती महिलाएं हाइपरटेंशन और डायबिटीज की मरीज पाई जा रही है।
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गर्भावस्था की अवधि के आधार पर उनको उपचारित किया जा रहा है। जिला महिला अस्पताल में पांच महिला चिकित्सक है, इसमें डॉ. चंद्रा सिंहा स्थाई है, जबकि डॉ. स्वाति अग्रवाल, डॉ. शिवांगी, डॉ. माया और डॉ. आसमां मुनीर यह सभी संविदा पर तैनात हैं।
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ओपीडी के दौरान आने वाले गर्भवती का जांच कराने के दौरान यह जानकारी सामने आई है। जांच के बाद रिपोर्ट आने पर गर्भवती को जिला महिला अस्पताल बुलाकर काउंसलिंग किया जाता है।
काउंसलिंग में मुख्य जोर नियमित जांच, संतुलित आहार, और सुरक्षित दवाओं के माध्यम से शुगर, बीपी को नियंत्रित करने पर होता है। डॉक्टर या काउंसलर जीवनशैली में बदलाव, घर पर मॉनिटरिंग और जटिलताओं (जैसे प्री-एक्लेमप्सिया) की पहचान सिखाते हैं।
बीपी और शुगर की घर पर निरंतर निगरानी और प्रसव पूर्व सावधानी के बारे में जानकारी देते है। संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह पर हल्की शारीरिक गतिविधि के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।
प्रेगनेंसी में सुरक्षित बीपी दवाएं और इंसुलिन या उचित दवाएं लेने की सलाह दी जाती है। बच्चे के विकास और भलाई के लिए नियमित अल्ट्रासाउंड और नॉन-स्ट्रेस टेस्ट की आवश्यकता पर चर्चा की जाती है।

जिला महिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. स्वाति गुप्ता ने बताया कि गर्भवती की जांच करने के बाद जरुरत के अनुसार दवा दी जाती है। काउंसलिंग के दौरान खानपान में फल के उपयोग और तनाव नहीं लेने की जानकारी दी जाती है। बताया कि दवा का सेवन नहीं करने से बच्चे पर असर पड़ता है।
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