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मथुरा में बाढ़: शांत होने लगा यमुना का राैद्र रूप...जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर, स्कूलों का बढ़ाया अवकाश

Wed, 10 Sep 2025 08:26 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Wed, 10 Sep 2025 08:26 PM IST
सार

मथुरा में अब यमुना के जलस्तर में गिरावट आने लगी है। हथिनीकुंड बांध से 27319 क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो वहीं ओखला से 60457 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं मथुरा के गोकुल बैराज से 135487 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया, जो ऊपर से आने वाले पानी से करीब डेढ़ गुना है।
 

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Yamuna water level drops in Mathura school holidays extended
मथुरा में बाढ़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यमुना में आ रहा अथाह पानी कम हुआ तो यमुना महारानी भी धीरे-धीरे शांत होने लगी हैं। बीते 24 घंटे में जलस्तर में 45 सेंटीमीटर की कमी आई। इसके साथ ही बुधवार शाम सात बजे यमुना का जलस्तर घटकर 167.04 पर आ गया। जलस्तर घटने से आबादी वाले क्षेत्रों से पानी अब उतरने लगा है। दो से तीन दिनों में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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बीते एक सप्ताह से यमुना में आई बाढ़ ने मथुरा में भीषण तबाही मचाई। जलस्तर इतना बढ़ा कि 50 से अधिक गांवों के साथ ही वृंदावन और मथुरा की कॉलोनियों में भी पानी घुस गया था। हालात इतने बिगड़ गए कि 11 हजार लोगों को सुरक्षित घरों से निकालना पड़ा। 
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वहीं पांच हजार के करीब लोग बाढ़ राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए। मंगलवार से यमुना में पानी कम होने के चलते लोगों ने राहत की सांस ली है। हथिनीकुंड और ओखला बैराज से पानी का डिस्चार्ज घटने और गोकुल बैराज से डिस्चार्ज अधिक होने के चलते हालात अब काबू में आने की उम्मीद जगी है। 

बुधवार को हथिनीकुंड बांध से जहां 27319 क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो वहीं ओखला से 60457 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं मथुरा के गोकुल बैराज से 135487 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया, जो ऊपर से आने वाले पानी से करीब डेढ़ गुना है।

 
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बुधवार शाम को यमुना का जलस्तर घटकर 167.04 मीटर पर पहुंच गया, जो सुबह तक 167 मीटर से भी नीचे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अब भी जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर से भी अधिक ऊपर है। जलस्तर घटने के चलते बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 54 से घटकर 45 रह गई है। 

 
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साथ ही मथुरा और वृंदावन की कॉलोनियों में भी राहत होने लगी है। मथुरा की लक्ष्मीनगर क्षेत्र स्थित तिवारीपुरम में पानी घटने के बाद निगम ने पंपसेट लगवाकर निचली गलियों में भरा पानी निकलवाया। दूसरी तरफ हंसगंज और ईसापुर में भी पानी अब पांच से छह फीट ही रह गया है। यहां दो दिन पहले तक करीब आठ से 10 फीट तक पानी भरा था। शांति आश्रम क्षेत्र में भी कुछ राहत मिली है।

 

बिजली बंद होने से सबसे अधिक परेशानी
बाढ़ के बाद भी लोगों ने मकान और सामान की सुरक्षा के लिए अपना घर नहीं छोड़ा है। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या बिजली कटौती बन रही है। लक्ष्मीनगर स्थित चिरंजी का नगला, तिवारीपुर, हंसगंज, ईसापुर, शांति आश्रम क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बीते कई दिनों से बंद है। ऐसे में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। दूसरी तरफ मोबाइल चार्ज न हो पाने से लोगों का संपर्क भी टूट गया है। छत पर खड़े होकर लोग बस पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं।

 

सड़क पर लाकर बांधे मवेशी
लक्ष्मीनगर के पीछे बसे शांति आश्रम क्षेत्र में कई डेयरी संचालित हैं। पूरे गांव में बाढ़ का पानी भरने के बाद लोग मवेशियों को गांव के बाहर ले आए हैं। उन्होंने यमुना किनारे स्थित सड़क पर मवेशी बांध रखे हैं। यहीं वे भूसे व चोकर की व्यवस्था का पशुओं का पेट भर रहे हैं।

 

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बंद रहेंगे स्कूल
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी गई है। जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह के आदेश पर जिला विद्यालय निरीक्षक रवींद्र सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल बंद रखने के आदेश दिए हैं।
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