{"_id":"58178d7e4f1c1bc032435ca5","slug":"yamuna-mukti-andolan","type":"story","status":"publish","title_hn":"17 दिसंबर से होगी आरपार की लड़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
17 दिसंबर से होगी आरपार की लड़ाई
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 01 Nov 2016 12:13 AM IST
विज्ञापन
ब्रज यात्रा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रज से यमुना मुक्तिकरण एवं शुद्धीकरण के लिए अब 17 दिसंबर से निर्णायक आंदोलन होगा। मान मंदिर बरसाना के विरक्त संत रमेश बाबा के सानिध्य में होने वाले यमुना सत्याग्रह आंदोलन में यमुना शुद्धीकरण के लिए अब तक किए गए आंदोलन से सबक लेते हुए सरकारों की वादाखिलाफी का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के साथ भाजपा की केंद्र सरकार से यमुना शुद्धीकरण के लिए ठोस कार्ययोजना शुरू कराने के बाद ही यह आंदोलन पूर्ण होगा।
सोमवार को कुंभ मेला क्षेत्र में राधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा में शामिल पदायात्रियों और यमुना भक्तों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानुप्रताप सिंह ने कहा कि 17 दिंसबर से शुरू होने वाले यमुना सत्याग्रह आंदोलन में आरपार की निर्णायक लड़ाई होगी। भले ही यमुना मुक्तिकरण की यह लड़ाई चाहे कितनी भी लंबी चले, लेकिन यमुना भक्त सरकार के आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस कार्ययोजना शुरू कराके ही लौटेंगे।
गोकुल के पंकज बाबा ने कहा कि यमुना सत्याग्रह आंदोलन यमुनाजी के जल को अविरल व निर्मल करने के लिए आखरी आंदोलन होगा। हम सब को हर कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत रमेश बाबा के सानिध्य में 17 दिसंबर से हो रहे इस यमुना सत्याग्रह आंदोलन के प्रति ब्रजवासियों के साथ देश-विदेश के भक्तों को एकजुट करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
विज्ञापन
संत रमेश बाबा ने कहा कि यमुना महारानी का अस्तित्व ब्रजभूमि में बनाए रखने के लिए यमुना भक्त इस बार सरकार के किसी भी बहकावे और धोखेबाजी में नहीं आएंगे। इस आंदोलन में भारतवर्ष के साधु-संतों, धर्माचार्यों, भागवताचार्यों, हिंदूवादियों आदि का सहयोग लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष श्याम चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना मुक्तिकरण आंदोलन हथिनीकुंड से यमुना जल छोड़े जाने के साथ यमुना के दोनों ओर समानांतर नाला निर्माण की मांग पूरा होने के बाद ही पूरा होगा। यमुना भक्त अपनी मांगें मनवाने के लिए दिल्ली नहीं जाएंगे, बल्कि ब्रज में रहकर सरकार के कर्ताधर्ताओं को यहां बुलाकर ही रहेंगे।
इस दौरान अभियान के संयोजक राधाकांत शास्त्री, राट्रीय सलाहकार गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, समन्वयक राधाप्रिय, प्रदेश महासचिव पंकज चतुर्वेदी, रामनरेश, प्रेम सिंह, राजकुमार अग्रवाल, रामजी लाल, अशोक कुमार सिंह, रमेशसिंह सिकरवार, अनिल भारद्वाज आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
सोमवार को कुंभ मेला क्षेत्र में राधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा में शामिल पदायात्रियों और यमुना भक्तों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानुप्रताप सिंह ने कहा कि 17 दिंसबर से शुरू होने वाले यमुना सत्याग्रह आंदोलन में आरपार की निर्णायक लड़ाई होगी। भले ही यमुना मुक्तिकरण की यह लड़ाई चाहे कितनी भी लंबी चले, लेकिन यमुना भक्त सरकार के आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस कार्ययोजना शुरू कराके ही लौटेंगे।
विज्ञापन
गोकुल के पंकज बाबा ने कहा कि यमुना सत्याग्रह आंदोलन यमुनाजी के जल को अविरल व निर्मल करने के लिए आखरी आंदोलन होगा। हम सब को हर कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत रमेश बाबा के सानिध्य में 17 दिसंबर से हो रहे इस यमुना सत्याग्रह आंदोलन के प्रति ब्रजवासियों के साथ देश-विदेश के भक्तों को एकजुट करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
विज्ञापन
संत रमेश बाबा ने कहा कि यमुना महारानी का अस्तित्व ब्रजभूमि में बनाए रखने के लिए यमुना भक्त इस बार सरकार के किसी भी बहकावे और धोखेबाजी में नहीं आएंगे। इस आंदोलन में भारतवर्ष के साधु-संतों, धर्माचार्यों, भागवताचार्यों, हिंदूवादियों आदि का सहयोग लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष श्याम चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना मुक्तिकरण आंदोलन हथिनीकुंड से यमुना जल छोड़े जाने के साथ यमुना के दोनों ओर समानांतर नाला निर्माण की मांग पूरा होने के बाद ही पूरा होगा। यमुना भक्त अपनी मांगें मनवाने के लिए दिल्ली नहीं जाएंगे, बल्कि ब्रज में रहकर सरकार के कर्ताधर्ताओं को यहां बुलाकर ही रहेंगे।
इस दौरान अभियान के संयोजक राधाकांत शास्त्री, राट्रीय सलाहकार गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, समन्वयक राधाप्रिय, प्रदेश महासचिव पंकज चतुर्वेदी, रामनरेश, प्रेम सिंह, राजकुमार अग्रवाल, रामजी लाल, अशोक कुमार सिंह, रमेशसिंह सिकरवार, अनिल भारद्वाज आदि उपस्थित थे।