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UP: मथुरा में यमुना ने जानें कब-कब मचाई तबाही, 1978 में थे ऐसे हालात; देखें ये रिपोर्ट

Tue, 09 Sep 2025 12:49 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 09 Sep 2025 12:49 PM IST
सार

मथुरा में रौद्र रूप धारण कर चुकी यमुना लोगों को डरा रही है। इससे पहले वर्ष 1978 में भी इसी तरह की जलआपदा आई थी। इस दौरान करीब 200 गांव डूब गए थे और हजारों एकड़ फसल नष्ट हो गई थी। 

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Yamuna Flood 1978 Mathura Submerged 200 Villages Over 2 Lakh People Affected
मथुरा में कॉलोनियों में भरा बाढ़ का पानी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मथुरा में 1978 में आई बाढ़ से हालात बहुत विकराल हुए थे। दो सौ गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे और करीब दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। साथ ही हजारों एकड़ फसलें भी जलमग्न हो गई थीं। यहां तक कि द्वारिकाधीश मंदिर की सीढि़यां तक डूब गईं थीं। हालात इतने विकराल थे कि घाटों, मंदिरों और तटवर्ती बस्तियों ने बाढ़ त्रासदी की गहरी छाप छोड़ी थी। बाढ़ के जख्म ऐसे थे कि वर्तमान स्थिति को देखकर लोगों की यादें फिर से ताजा हो गई हैं।
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केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों के अनुसार, 8 सितंबर 1978 को यमुना का जलस्तर 169.73 मीटर दर्ज किया गया था, जो अब तक का सर्वाधिक जलस्तर माना जाता है। पानी का बहाव इतना था कि घाटों से लेकर शहर के प्रमुख बाजारों तक तीन-तीन फीट पानी भर गया था। रेलवे स्टेशन पर पानी भरने से ट्रेनों का परिचालन रुक गया था। साथ ही गोकुल, वृंदावन और मथुरा के दर्जनों धार्मिक स्थल जलमग्न हो गए थे।
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ग्रामीण इलाकों में तो लोग छतों और पेड़ों पर शरण लेने को मजबूर हुए थे। खुद सेना ने आकर मोर्चा संभाला था और नावों की मदद से राहत व बचाव कार्य शुरू किया था। इसके बाद भी कई दिन तक हालात बेकाबू रहे थे। वर्तमान स्थितियां एक बार फिर लोगों को 1978 की उस त्रासदी की याद दिला रही हैं। हालांकि 1978 की अपेक्षा वर्तमान में यमुना का जलस्तर बेहद नीचे है।

 
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1978 के आंकड़ों पर एक नजर
सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों के अनुसार 1978 में यमुना का जलस्तर 169.73 मीटर (अब तक का सर्वाधिक) तक पहुंच गया था। यमुना रौद्र रूप में आ गई थी और इससे दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। विश्राम घाट, सदर बाजार, नया बाजार और रेलवे स्टेशन तक तीन-तीन फीट पानी भर गया था।
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2010 में ऐसे थे हालात
यमुना का जलस्तर 167.71 मीटर दर्ज किया गया था। साथ ही 50 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। कई गांव खाली कराए गए थे। बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र के मार्ग, विश्राम घाट के आसपास की कॉलोनियां, दर्जनों गांव जलमग्न हुए थे।

2023 में भी खराब हुए थे हालात
2023 में भी बाढ़ से 70 हजार लोग प्रभावित हुए थे। सदर बाजार, बांकेबिहारी मार्ग, दाऊजी मंदिर का क्षेत्र और गांवों की मुख्य सड़कें जलमग्न हो गई थीं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी ही पानी था। 2023 में यमुना का जलस्तर 167.30 मीटर रिकॉर्ड किया गया था।
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