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Mathura News: लेनदेन का ब्योरा दिए बगैर कराना चाहते थे रजिस्ट्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:45 AM IST
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Wanted to get the registration done without giving details of the transaction
मथुरा। छटीकरा रोड पर डालमिया फार्म में कई सौ हरे पेड़ काटने के मामले में नित नए नए खुलासे हो रहे हैं। पेड़ों के कटने से पहले निवेशक इस जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्री कार्यालय गए थे। वे लेनदेन का ब्योरा दिए बिना ही रजिस्ट्री कराना चाहते हैं जो मुमकिन न हो सका। ऐसे में इन सभी ने आगे की रूपरेखा तैयार की और उसी का परिणाम यह रहा कि हरे पेड़ों पर आरा चला दिया है।
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डालमिया फार्म हाउस की 36 एकड़ भूमि में गुरुकृपा तपोवन कॉलोनी के नाम से प्लाटिंग की गई। बुक कराने वालों में सबसे ज्यादा शहर के सराफा कारोबारी हैं। अधिकतर से नवरात्रों में रजिस्ट्री कराने का वायदा किया गया था। लेकिन जिन लोगों ने प्लाट काटे उनके खुद के नाम पर जमीन नहीं थी। ऐसे में उन्होंने योजना बनाई कि इस जमीन का बैनामा अपने नाम करा लिया जाए। इसके लिए रजिस्ट्री विभाग में सेटिंग शुरू की गई। अधूरे कागजात के आधार पर रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया।
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साथ ही यह भी छिपाया गया कि कितनी रकम में यह जमीन उन्होंने मूल स्वामी से खरीदी है। किस माध्यम से पैसा दिया गया है। पैसा दिया भी है या नहीं लेकिन यदि कोई रजिस्ट्री होती है तो नियमानुसार यह उल्लेख करना होता है कि विक्रेता का पूरा पैसा चुका दिया गया है। साथ ही यह भी बताना होता है कि रकम किस माध्यम से दी गई। उसका पूरा विवरण रजिस्ट्री में लिखा जाता है। ये निवेशक ऐसा नहीं कर पाए। वे लेनदेन का ब्योरा छिपाकर रजिस्ट्री करना चाहते थे पर अधिकारियों की सजगता के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए। अधिकारियों ने उन्हें पूरे प्रोजेक्ट के तहत हुए लेनदेन का ब्यौरा मांगा।
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इसके बाद राजस्व निर्धारित करने की बात कही। वह चाहते थे कि बिना लेनदेन का ब्योरा दिए ही रजिस्ट्री हो जाए। इससे राजस्व की चोरी भी होती। सब रजिस्ट्रार (प्रथम) अजय त्रिपाठी ने बताया कि जब उनसे पूरे प्रोजेक्ट की खरीद फरोख्त के लेनदेन का ब्यौरा मांगा तो वह हिचकिचाने लगे थे। वह चाहते थे कि पूरी जमीन की रजिस्ट्री एक साथ हो जाए पर लेनदेन का उल्लेख न करना पड़े। जिस तरह से 500 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बताया जा रहा है उस हिसाब से विभाग को करीब 35 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता। यदि सौदा इससे ज्यादा का होता तो सात प्रतिशत के हिसाब से स्टांप और ज्यादा रकम के लगते।
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