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Mathura News: दहलीज को बेटियों की डोली उठने का इंतजार
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मथुरा। सगी बहनों की बरात लौटने के बाद घर में रखीं बरातियों के लिए बनी मिठाइयां। संवाद
- फोटो : mathura
मथुरा। गांव करनावल में शुक्रवार देर रात बरात बिना दुल्हन लिए ही लौट गई। दो दिन बीत गए हैं, लेकिन घर की दहलीज अब भी दोनों बेटियों की डोली का इंतजार कर रही है। बात बनती न देखकर परिजन व रिश्तेदार दोनों बेटियों के लिए दूसरे दूल्हों की तलाश में जुट गए हैं। इस कार्य में समाज के लोग भी जुटे हैं।
दरवाजे पर बनी रंगोली ओर घर में लगा डीजे किसी जश्न की ओर इशारा कर रहे हैं। घर में मौजूद महिलाओं के हाथों में लगी मेहंदी भी इस ख्याल को और पुख्ता कर देती है, लेकिन माहौल कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। कोने में बैठी एक महिला के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। घर में मातमी सन्नाटा है। बीच-बीच में आंगन में खेल रहे छोटे बच्चों की आवाज इस सन्नाटे को चीरती है, लेकिन उनके बाहर जाते ही घर फिर से सन्नाटे के आगोश में खो जाता है। यह नजारा रविवार को करनावल के उस घर का था, जिस घर की दहलीज से दो सगी बहनों की बरात बिना दुल्हनों के ही लौट गई।
पूछने पर पता चला कि जिस महिला की आंख से आंसू रुक नहीं रहे वह उन दो बेटियों की मां हैं। दोनों बेटियां, पिता और कुछ रिश्तेदार मेडिकल कराने के लिए अस्पताल गए थे। वहीं बेटियाें के चाचा रिश्तेदारों से नया रिश्ता खोजने के लिए तड़के ही निकल गए थे।
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घटना से पूरा परिवार गमगीन है, लेकिन अब उनकी आखिरी उम्मीद बेटियों का घर बसाना है। परिवार के ही ताऊ ने बताया कि बेटियों की शादी के लिए लड़कों की तलाश की जा रही है। घर की दहलीज को भी बेटियों की डोली उठने का ही इंतजार है।
मिठाइयों के ढेर पर जिंदगी में फिर भी कड़वाहट
जहां बेटियों की बरात आनी थी वह जगह गांव करनावल और गौशाला के बीच थी। दरअसल परिवार ने बरात के लिए दावत व ठहरने का इंतजाम गौशाला गांव के पास स्थित अपने खेत पर किया था। खेत पर ही दो कमरे भी बने थे। बरात लौटने के बाद कमरों में मिठाइयों के ढेर लगे हैं, लेकिन परिवार की जिंदगी में फिर भी कड़वाहट है। बरात ठहरने के स्थान पर रखे सामान की रखवाली कर रहे बेटियों के नाना पूरी घटना को याद करते हुए दुखी हो जाते हैं। कहते हैं खुशियों को किसी की नजर लग गई। उनकी इच्छा यही है कि बस अब उनकी नातिनों की हल्दी का रंग फीका पड़ने से पहले विदाई हो जाए।
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दरवाजे पर बनी रंगोली ओर घर में लगा डीजे किसी जश्न की ओर इशारा कर रहे हैं। घर में मौजूद महिलाओं के हाथों में लगी मेहंदी भी इस ख्याल को और पुख्ता कर देती है, लेकिन माहौल कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। कोने में बैठी एक महिला के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। घर में मातमी सन्नाटा है। बीच-बीच में आंगन में खेल रहे छोटे बच्चों की आवाज इस सन्नाटे को चीरती है, लेकिन उनके बाहर जाते ही घर फिर से सन्नाटे के आगोश में खो जाता है। यह नजारा रविवार को करनावल के उस घर का था, जिस घर की दहलीज से दो सगी बहनों की बरात बिना दुल्हनों के ही लौट गई।
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पूछने पर पता चला कि जिस महिला की आंख से आंसू रुक नहीं रहे वह उन दो बेटियों की मां हैं। दोनों बेटियां, पिता और कुछ रिश्तेदार मेडिकल कराने के लिए अस्पताल गए थे। वहीं बेटियाें के चाचा रिश्तेदारों से नया रिश्ता खोजने के लिए तड़के ही निकल गए थे।
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घटना से पूरा परिवार गमगीन है, लेकिन अब उनकी आखिरी उम्मीद बेटियों का घर बसाना है। परिवार के ही ताऊ ने बताया कि बेटियों की शादी के लिए लड़कों की तलाश की जा रही है। घर की दहलीज को भी बेटियों की डोली उठने का ही इंतजार है।
मिठाइयों के ढेर पर जिंदगी में फिर भी कड़वाहट
जहां बेटियों की बरात आनी थी वह जगह गांव करनावल और गौशाला के बीच थी। दरअसल परिवार ने बरात के लिए दावत व ठहरने का इंतजाम गौशाला गांव के पास स्थित अपने खेत पर किया था। खेत पर ही दो कमरे भी बने थे। बरात लौटने के बाद कमरों में मिठाइयों के ढेर लगे हैं, लेकिन परिवार की जिंदगी में फिर भी कड़वाहट है। बरात ठहरने के स्थान पर रखे सामान की रखवाली कर रहे बेटियों के नाना पूरी घटना को याद करते हुए दुखी हो जाते हैं। कहते हैं खुशियों को किसी की नजर लग गई। उनकी इच्छा यही है कि बस अब उनकी नातिनों की हल्दी का रंग फीका पड़ने से पहले विदाई हो जाए।