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Mathura News: एनएसजी कमांडो की मौत के बाद गांव में मातम
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राया। हाथरस के थाना सादाबाद क्षेत्र में शुक्रवार सुबह हुए हादसे में एनएसजी कमांडो की मौत खबर जैसे ही उनके गांव गुड़ेरा पहुंची, वैसे ही पूरे गांव में मातम छा गया। परिजन आनन-फानन सादाबाद के लिए रवाना हो गए। इसके बाद एनएसजी कमांडो का शव पोस्टमार्टम के लिए मथुरा लाया गया। अन्य तीनों घायलों का आगरा के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। देर शाम उनका सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
राया के गांव गुड़ेरा निवासी योगेंद्र सिंह एनएसजी में कमांडो थे। वह विष्णु, सत्यवीर और जितेंद्र के साथ होली खेलने अपने दोस्त के यहां सादाबाद गए थे। शुक्रवार सुबह लौटते समय हादसा हो गया। हादसे में घायल विष्णु नेवी में कार्यरत हैं। जबकि जितेंद्र और सत्यवीर गांव में ही रहते हैं। गांव नगौड़ा के प्रधान नीरज सोलंकी ने बताया कि योगेंद्र साल 2010 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग पठानकोट में थी। योगेंद्र की पत्नी एकता और मासूम बेटा-बेटी का रोप-रोकर बुरा हाल है।
घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा है। ग्रामीणों ने बताया कि योगेंद्र 25 दिन पहले ही छुट्टी लेकर घर आए थे। 31 मार्च को उसकी नौकरी के 15 साल पूरे होने थे। वे बीआरएस लेने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया। बड़े भाई धर्मेंद्र ने बताया कि तीन भाइयों में योगेंद्र सबसे छोटे थे।
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शव गांव पहुंचते ही मच गई चीत्कार
एनएसजी कमांडो का शव जैसे ही गांन गुड़ेरा पहुंचा, वैसे ही परिजन में चीत्कार मच गई। दो दिन पहले जो परिवार रंगोत्सव की खुशियां मना रहा था, आज वही परिवार दहाड़े मार-मार कर रो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि योगेंद्र स्वभाव से बेहद मिलनसार थे। इस मौके पर प्रधान शैलेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, देवेंद्रन्द्र सिंह, रमेश पहलवान, उदयवीर सिंह, भूरा सोलंकी, मुकेश, धीरज कुमार आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
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राया के गांव गुड़ेरा निवासी योगेंद्र सिंह एनएसजी में कमांडो थे। वह विष्णु, सत्यवीर और जितेंद्र के साथ होली खेलने अपने दोस्त के यहां सादाबाद गए थे। शुक्रवार सुबह लौटते समय हादसा हो गया। हादसे में घायल विष्णु नेवी में कार्यरत हैं। जबकि जितेंद्र और सत्यवीर गांव में ही रहते हैं। गांव नगौड़ा के प्रधान नीरज सोलंकी ने बताया कि योगेंद्र साल 2010 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग पठानकोट में थी। योगेंद्र की पत्नी एकता और मासूम बेटा-बेटी का रोप-रोकर बुरा हाल है।
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घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा है। ग्रामीणों ने बताया कि योगेंद्र 25 दिन पहले ही छुट्टी लेकर घर आए थे। 31 मार्च को उसकी नौकरी के 15 साल पूरे होने थे। वे बीआरएस लेने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया। बड़े भाई धर्मेंद्र ने बताया कि तीन भाइयों में योगेंद्र सबसे छोटे थे।
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शव गांव पहुंचते ही मच गई चीत्कार
एनएसजी कमांडो का शव जैसे ही गांन गुड़ेरा पहुंचा, वैसे ही परिजन में चीत्कार मच गई। दो दिन पहले जो परिवार रंगोत्सव की खुशियां मना रहा था, आज वही परिवार दहाड़े मार-मार कर रो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि योगेंद्र स्वभाव से बेहद मिलनसार थे। इस मौके पर प्रधान शैलेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, देवेंद्रन्द्र सिंह, रमेश पहलवान, उदयवीर सिंह, भूरा सोलंकी, मुकेश, धीरज कुमार आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे।