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पांच किलोमीटर के दायरे में दिखा तबाही का मंजर
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 14 May 2015 11:53 PM IST
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15 मिनट का बवंडर, तेज धूल भरी हवाएं और उनका शोर। पेड़ टूटकर गिर रहे थे तो कुछ जड़ से ही उखड़ गए। मकानों के टीनशेड और छप्पर हवा में उड़ गए। बवंडर शांत हुआ तो तेज बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई। जो लोग बवंडर की चपेट में आए, मकान और दीवारों के मलबे में दब गए, उनकी मदद भी भी नहीं हो पाई।
लोग सहमे थे, लगा जैसे कुदरत नाराज है और उसका कहर टूट रहा है। चीख पुकार और अफरा तफरी मची थी। जैसे तैसे मलबा हटाकर उसमें फंसे लोगों को निकाला गया। गांवों में रात में ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे थे।
थाना महावन क्षेत्र में गुरुवार सायं 5:00 बजे के बाद डेढ़ दर्जन गांवों में बवंडर आया तो हाहाकार मच गया। गांव- के गांव तबाह हो गए। बवंडर थमते ही बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई, इससे राहत कार्य में दिक्कतें आईं। कच्चे मकान, टीनशेड, कमजोर चारदीवारी, बिजली के खंभे जगह-जगह गिरे देखे गये। बिजली के खंभे गिरने से पूरे इलाके की बिजली गुल हो गयी।
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क्षेत्र के गांव नगला जबाली, नगला जंगली, कुमरगढ़ा, नगला पोलुआ, मनोहरपुर, किशनपुर, खानपुर, नगला मूलचंद्र, जगदीशपुर, सुखदेवपुर, तारापुर, गढ़ी, गौहनपुर, नगला देवकरन, नगला खेमा, बंदी नारायणपुर, सहित दो दर्जन गांवों व मजरों में बड़ी तबाही हुई है। मकानों के निकट खड़े वृक्षों की मोटी शाखायें गिरने से सबसे अधिक नुकसान हुआ है। मकानों के गिरने से दर्जनों लोग दब गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
गांव मनोहरपुर में मकान गिर जाने से 25 वर्षीय नीरज पुत्र मूलचंद्र की मौत हो गई। वहीं एक बालक की भी मकान के मलबे में दबकर मौत हो गयी, हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। वृक्षों के नीचे बंधे पशु भी पेड़ गिरने से घायल हो गए। सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे गिरने से गांवों के संपर्क मार्ग बाधित हो गये हैं। देर रात्रि एसडीएम महावन चंद्रविजय सिंह, सीओ महावन अजय कुमार, तहसीलदार व प्रशासनिक अधिकारी गांवों में राहत बचाव कार्य को पहुंच गए।
15 मिनट में उजाड़ दिया आशियाना
महावन के आसपास के दो दर्जन गांवों में एक दम से उठे बवंडर ने लोगों क ा आशियाना उजाड़ दिया। नगला नगला जबाली व नगला जंगली के लक्ष्मीनारायण, भगवान शरण, प्रेम सिंह, सौदान सिंह, सुंदर लाल, गनपत सिंह, कमल सिंह, मोहन सिंह ने बताया कि हवा इतनी तेज थी कि लगा कि वे अब नहीं बचेंगे।
अचानक से हवा का वेग बढ़ गया। पीड़ितों ने बताया कि वे जान बचाने का कोने में दुबके। मकान गिरने से 16 वर्षीय सुनीता, 14 वर्षीय रोशनी घायल हो गई। यही हाल क म्हारगढ़ा का रहा। यहां बनी सिंह, राजेन्द्र सिंह, के मकान के ऊपर तेज हवा के चलते पेड़ गिर गया और पूरा मकान तहस नहस हो गया।
मकान में दब जाने से उनकी बेटी सोनम, रिंकी व शबनम बुरी तरह घायल हो गई। सभी को अस्पताल भिजवाया गया है। बनी सिंह ने बताया कि ऐसा बवंडर जिंदगी में नहीं देखा। ओले भी गिरे जिससे दिक्कतें और बढ़ गयीं।
पांच किमी के दायरे में हुई तबाही
मनोहरपुर से पांच किलोमीटर के आसपास के इलाके में बवंडर का खासा जोर रहा। सबसे ज्यादा महावन से कि शनपुर मार्ग के दो दर्जन गांवों प्रभावित हुए। यहां के गांवों में सबसे ज्यादा सब्जी पैदा की जाती है। तेज आंधी के आने और साथ ही ओले पड़ने से किसानों की सब्जी की फसल पूरी तरह लोट गई । यहां तक कि खेतों में खड़ी करब की फसल तक उड़ने लगी।
इस मार्ग के गांव किसनपुर, खानपुर, कृष्णापुरी, नगला जाबली, नारायणपुर, नगला हरजीवन कुम्हरगढ़ा, नगला मूलचंद्र, जगदीशपुर, बंदी, नगला पोलुआ, आनंदगढ़ी, गढ़ी गौहनपुर, आदि गांवों व आसपास के मजरों में बवंडर का केंद्र रहा। खास बात रही कि महावन निकलते ही तहसील पर व कुंमरगढ़ा से चार-पांच किलोमीटर दूर ब्रह्मांडघाट पर बरसात की एक बूंद नहीं थी। प्रकृति के अजब खेल को देख पीड़ित किसान माथा पीट रहे हैं।
पेड़ गिरने से रास्ते हो गए बंद
महावन क्षेत्र में आए बवंडर से प्रभावित गांवों में पहुंचने के लिए ज्यादातर रास्ते बंद हो गए। सड़क किनारे खड़े दरख्त और खंभे जगह जगह गिर जाने से रास्ते बंद हो गए। इससे राहत व बचाव कार्य आदि के लिए अधिकारियों को खासी कवायद करनी पड़ी।
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लोग सहमे थे, लगा जैसे कुदरत नाराज है और उसका कहर टूट रहा है। चीख पुकार और अफरा तफरी मची थी। जैसे तैसे मलबा हटाकर उसमें फंसे लोगों को निकाला गया। गांवों में रात में ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे थे।
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थाना महावन क्षेत्र में गुरुवार सायं 5:00 बजे के बाद डेढ़ दर्जन गांवों में बवंडर आया तो हाहाकार मच गया। गांव- के गांव तबाह हो गए। बवंडर थमते ही बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई, इससे राहत कार्य में दिक्कतें आईं। कच्चे मकान, टीनशेड, कमजोर चारदीवारी, बिजली के खंभे जगह-जगह गिरे देखे गये। बिजली के खंभे गिरने से पूरे इलाके की बिजली गुल हो गयी।
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क्षेत्र के गांव नगला जबाली, नगला जंगली, कुमरगढ़ा, नगला पोलुआ, मनोहरपुर, किशनपुर, खानपुर, नगला मूलचंद्र, जगदीशपुर, सुखदेवपुर, तारापुर, गढ़ी, गौहनपुर, नगला देवकरन, नगला खेमा, बंदी नारायणपुर, सहित दो दर्जन गांवों व मजरों में बड़ी तबाही हुई है। मकानों के निकट खड़े वृक्षों की मोटी शाखायें गिरने से सबसे अधिक नुकसान हुआ है। मकानों के गिरने से दर्जनों लोग दब गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
गांव मनोहरपुर में मकान गिर जाने से 25 वर्षीय नीरज पुत्र मूलचंद्र की मौत हो गई। वहीं एक बालक की भी मकान के मलबे में दबकर मौत हो गयी, हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। वृक्षों के नीचे बंधे पशु भी पेड़ गिरने से घायल हो गए। सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे गिरने से गांवों के संपर्क मार्ग बाधित हो गये हैं। देर रात्रि एसडीएम महावन चंद्रविजय सिंह, सीओ महावन अजय कुमार, तहसीलदार व प्रशासनिक अधिकारी गांवों में राहत बचाव कार्य को पहुंच गए।
15 मिनट में उजाड़ दिया आशियाना
महावन के आसपास के दो दर्जन गांवों में एक दम से उठे बवंडर ने लोगों क ा आशियाना उजाड़ दिया। नगला नगला जबाली व नगला जंगली के लक्ष्मीनारायण, भगवान शरण, प्रेम सिंह, सौदान सिंह, सुंदर लाल, गनपत सिंह, कमल सिंह, मोहन सिंह ने बताया कि हवा इतनी तेज थी कि लगा कि वे अब नहीं बचेंगे।
अचानक से हवा का वेग बढ़ गया। पीड़ितों ने बताया कि वे जान बचाने का कोने में दुबके। मकान गिरने से 16 वर्षीय सुनीता, 14 वर्षीय रोशनी घायल हो गई। यही हाल क म्हारगढ़ा का रहा। यहां बनी सिंह, राजेन्द्र सिंह, के मकान के ऊपर तेज हवा के चलते पेड़ गिर गया और पूरा मकान तहस नहस हो गया।
मकान में दब जाने से उनकी बेटी सोनम, रिंकी व शबनम बुरी तरह घायल हो गई। सभी को अस्पताल भिजवाया गया है। बनी सिंह ने बताया कि ऐसा बवंडर जिंदगी में नहीं देखा। ओले भी गिरे जिससे दिक्कतें और बढ़ गयीं।
पांच किमी के दायरे में हुई तबाही
मनोहरपुर से पांच किलोमीटर के आसपास के इलाके में बवंडर का खासा जोर रहा। सबसे ज्यादा महावन से कि शनपुर मार्ग के दो दर्जन गांवों प्रभावित हुए। यहां के गांवों में सबसे ज्यादा सब्जी पैदा की जाती है। तेज आंधी के आने और साथ ही ओले पड़ने से किसानों की सब्जी की फसल पूरी तरह लोट गई । यहां तक कि खेतों में खड़ी करब की फसल तक उड़ने लगी।
इस मार्ग के गांव किसनपुर, खानपुर, कृष्णापुरी, नगला जाबली, नारायणपुर, नगला हरजीवन कुम्हरगढ़ा, नगला मूलचंद्र, जगदीशपुर, बंदी, नगला पोलुआ, आनंदगढ़ी, गढ़ी गौहनपुर, आदि गांवों व आसपास के मजरों में बवंडर का केंद्र रहा। खास बात रही कि महावन निकलते ही तहसील पर व कुंमरगढ़ा से चार-पांच किलोमीटर दूर ब्रह्मांडघाट पर बरसात की एक बूंद नहीं थी। प्रकृति के अजब खेल को देख पीड़ित किसान माथा पीट रहे हैं।
पेड़ गिरने से रास्ते हो गए बंद
महावन क्षेत्र में आए बवंडर से प्रभावित गांवों में पहुंचने के लिए ज्यादातर रास्ते बंद हो गए। सड़क किनारे खड़े दरख्त और खंभे जगह जगह गिर जाने से रास्ते बंद हो गए। इससे राहत व बचाव कार्य आदि के लिए अधिकारियों को खासी कवायद करनी पड़ी।