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धाम को धाम ही रहने दें- शंकराचार्य वासुदेवानंद

Sun, 21 Dec 2014 12:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन Updated Sun, 21 Dec 2014 12:17 AM IST
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unwanted development of religious palces is opposed
फोगला आश्रम में चल रहे भगवान भजनाश्रम के शताब्दी महोत्सव में संतों ने तीर्थस्थलों का अंधाधुंध शहरीकरण न करने की बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि धाम को धाम ही रहने दें। लोग स्वार्थवश धार्मिकस्थलों की महत्ता को क्षति न पहुंचाए।
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शनिवार को महोत्सव में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर शंकराचार्य वासुदेवानंद महाराज ने कहा कि तीर्थों में प्लास्टिक जैसे अप्राकृतिक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। गंगा-यमुना प्रदूषित हो रहीं हैं और इन्हें पाट दिया गया है। यह भक्तों और श्रद्धालुओं को आहत करने वाला है।
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सम्मेलन में सांसद हेमा मालिनी भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि भगवान भजनाश्रम संस्था ने विधवाओं के संरक्षण और भरण पोषण के लिए लंबे समय से कार्य किए हैं। यह प्रशंसनीय है। संत सम्मेलन के मंच से सांसद ने यमुना का प्रदूषण से मोक्ष उनकी व्यक्तिगत और शासकीय प्राथमिकताओं में होना बताया। कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस समस्या पर लगातार संवाद में हैं।
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जगद्गुरु वल्लभाचार्य वल्लभराय महाराज ने कहा कि श्रीधाम वृंदावन से समस्त पृथ्वी कीर्तिमान है। महामंडलेश्वर गीतामनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भगवद् संकीर्तन का सौ वर्षों से अखंड महायज्ञ जो भगवान भजनाश्रम में चल रहा है वह परमात्मा को प्राप्त कराने वाला है।


इस अवसर पर मलूकपीठाधीश्वर महंत राजेंद्रदास महाराज, चांद बिहारी पाटोदिया, राधा कृष्ण पाठक, विष्णुकांत शास्त्री, मृदुल कांत शास्त्री, देवेंद्र शर्मा आदि उपस्थित थे।
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