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Mathura News: ये प्रीत है निराली, प्रेम में खाते लाठी, स्वागत में मिलती गाली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Mar 2025 01:17 AM IST
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This love is unique, you get beaten up in love and abused in welcome
ज्योत्यवेंद्र दुबे
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बरसाना (मथुरा)। ब्रज की हर रीति निराली है, लेकिन उससे भी निराली है यहां की प्रीत। नंदगांव के हुरियारे जब बरसाने में होली खेलने पहुंचते हैं तो उनका स्वागत गाली से होता है। इतना ही नहीं उन पर हुरियारिनें लाठियां बरसाती हैं, लेकिन वे हंसकर लाठी खाते हैं और गीत गाकर सुनाते हैं। यह नजारा बरसाने की लठमार होली में देखने को मिलता है। लठमार होली के रूप में नंदगांव और बरसाने की यही अनोखी प्रीत लोग देश भर से यहां देखने आते हैं।
राधा और श्रीकृष्ण की प्रेम डोर से आज भी नंदगांव और बरसाना एक ही सूत्र में बंधे हैं। हर साल यहां होली का उत्सव इस प्रेम को फिर से जीवंत कर देता है। द्वापर युग में बरसाने के आमंत्रण पर भगवान श्रीकृष्ण नंदगांव के ग्वालों के साथ होली खेलने बरसाने आए थे, तभी से नंदगांव को होली खेलने के लिए बरसाने से न्योता जाता है। इस आमंत्रण को नंदगांव सहर्ष स्वीकार करता है। आमंत्रण स्वीकार होने के उल्लास में ही बरसाने में लड्डू लुटाए जाते हैं। इसी को आज लड्डू होली के नाम से जाना जाता है।
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न्योता मिलने के अगले दिन ही श्रीकृष्ण के सखा के रूप में नंदगांव के लोग (हुरियारे) बरसाने में होली खेलने आते हैं। यहां राधा जी की सखी के रूप में बरसाने की महिलाएं उनका स्वागत गालियों से करती हैं। ये दोनों की गाढ़ी प्रीत ही तो है जो इन गालियों में भी माधुर्य घोल देती है। गालियों से स्वागत के बाद जब हुरियारे होली खेलने रंगीली गली पहुंचते हैं तो उन पर रंग बरसाने के साथ ही हुरियारिनें उन पर लठ बजाती हैं और वे ढाल से अपना बचाव करते हैं। लठामार होली के नाम से प्रचलित इस होली में नंदगांव और बरसाने की प्रीत का अनुपम नजारा देखने को मिलता है। नंदगांव के लोग ये लाठियां खाने को लालायित रहते हैं। वे कहते हैं कि ये लाठियां उनके लिए होली का तोहफा है। पांच साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी ये लाठियां खाने के लिए साल भर का इंतजार करते हैं। संवाद
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वृषभानु के जमाई तो कोई खुद को बताता है बरसाने का जीजा
बरसाना में लठामार होली खेलने आए हुरियारों का अंदाज भी निराला ही नजर आता है। अगर किसी हुरियारे से कोई नाम पूछ ले तो जवाब ऐसा मिलता है, जिसे सुनकर लोगों के चेहरे खिल उठते हैं। कोई खुद को वृषभानु का जमाई बताता है तो कोई बरसाना का जीजा कहता है। इतना ही नहीं पूरे बरसाने के युवकों को साला और बहू का भाई कहकर बुलाते हैं।


एक तरफ लाठियां, दूसरी तरफ सेवा
नंदगांव के हुरियारों पर एक तरफ बरसाने की महिलाएं लाठियां बरसाती हैं तो दूसरी तरफ बरसाने के लोग उनकी खूब सेवा करते हैं। प्रिया कुंड से लाडली जी मंदिर होते हुए जब हुरियारे रंगीली गली में पहुंचते हैं तो उन्हें केसर-बादाम का दूध पिलाया जाता है। बरसाने के लोग कहते हैं कि हुरियारे थक गए हैं, उन्हें दूध से ताकत मिल जाएगी। इतना ही नहीं अन्य खानपान की चीजों का इंतजाम भी बरसाने के द्वारा ही किया जाता है।
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