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जवाहरबाग कांड की जांच में घिरेंगे 50 अधिकारी
पुनीत शर्मा
Updated Fri, 03 Mar 2017 12:18 AM IST
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जवाहर बाग
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जवाहरबाग हिंसा की सीबीआई जांच में पचास से ज्यादा अधिकारी घिरेंगे। ये वो अफसर हैं जो एक जनवरी, 2014 से 2 जून, 2016 तक मथुरा में तैनात रहे हैं। इनमें पुलिस और प्रशासन के सभी वह अफसर हैं जिनकी जिम्मेदारी जवाहरबाग को खाली कराने की थी। लेकिन दबाव में कोई निर्णय ले नहीं पाए थे। एलआईयू के साथ दूसरी जांच एजेंसियों को भी जवाब देना होगा।
रामवृक्ष ने अपने समर्थकों के साथ एक जनवरी, 2014 को जवाहरबाग पर कब्जा जमाया था। प्रारंभ में उसने दो दिन के सत्याग्रह की अनुमति मांगी थी लेकिन बाद में उसने बाग पर कब्जा जमा लिया। रामवृक्ष के साथ शुरुआत में मुश्किल से 500 लोग थे, बाद में ये संख्या बढ़कर तीन हजार से भी ज्यादा हो गई। सीतापुर, गाजीपुर, कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ, बरेली, लखीमपुर खीरी, कन्नौज, झांसी, फैजाबाद के साथ अलीगढ़ और ब्रज क्षेत्र के जिलों के साथ राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार के लोग भी जवाहरबाग में थे।
सरकारी संपत्ति से कब्जा हटवाने की जिम्मेदारी डीएम, एसएसपी, एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ, थानाध्यक्ष, सीओ एलआईयू और उद्यान अधिकारी की थी। क्योंकि इन अफसरों ने न्यायिक आयोग की जांच के दौरान कहा था कि उच्च अधिकारियों को कब्जे के संबंध में लगातार रिपोर्ट जाती रही थी तो कमिश्नर और आईजी के साथ लखनऊ में बैठे इनके उच्च अधिकारियों को भी जवाब देना होगा।
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वह लोग भी जांच से बच नहीं पाएंगे जो दो जून, 2016 को एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के साथ जवाहरबाग खाली कराने पहुंचे थे। लेकिन जब मुकुल द्विवेदी पर कब्जाधारियों ने हमला किया तो इनमें से कोई दिखाई नहीं दिया था। इनमें भी चार सीओ, छह थानाध्यक्ष के साथ करीब 12 हमराह थे। भीड़ ने एसपी सिटी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या कर दी थी।
इन्हें भी देना होगा जवाब
डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, प्रमुख सचिव उद्यान, आईजी और कमिश्नर
पुलिस की जांच पर भी हाईकोर्ट ने उठाए थे सवाल
जवाहरबाग कांड की जांच सीबीआई से कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि पुलिस ने भीड़ को आरोपी बना दिया है। अदालत ने कहा था कि इतनी बड़ी हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन करना चाहिए। लेकिन एसआईटी का गठन नहीं किया गया।
क्या था मामला
गाजीपुर के रहने वाले रामवृक्ष यादव ने मध्यप्रदेश के सागर जनपद से स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के नाम पर यात्रा निकाली थी। इस यात्रा को दिल्ली जाना था लेकिन ऐन वक्त पर ये यात्रा मथुरा पहुंच गई। एक जनवरी, 2014 को ये यात्रा मथुरा पहुंची थी। रामवृक्ष यादव ने दो दिन का सत्याग्रह करने के लिए जवाहरबाग में प्रवेश किया था। लेकिन उसके बाद बाग ने कब्जा जमा लिया। जवाहरबाग में स्थित उद्यान विभाग के कार्यालय पर कब्जा कर लिया था। तहसील के स्टाफ के साथ मारपीट की गई। जवाहरबाग में बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया। गेट पर कब्जाधारियों का पहरा लगा दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन सक्रिय हुआ और बाग को खाली कराने के लिए हाथ-पांव मारने शुरू किए। 2 जून, 2016 की शाम को एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पुलिस बल के साथ जवाहरबाग को खाली कराने के लिए गए तो भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की मौत हो गई थी। 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। शासन ने इस हिंसा की जांच को न्यायिक आयोग का गठन कर किया। जांच चल रही है।
घटना के संबंध में विवरण
11 नामजद और ढाई हजार अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट
104 कब्जाधारियों को गिरफ्तार किया गया था, इनमें एक महिला थी
04 लोगों की मौत हो चुकी है गिरफ्तार किए गए कब्जाधारियों में से
103 लोगों को आरोपी बनाते हुए पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की
कब क्या हुआ
2 जून, 2016: जवाहरबाग खाली कराने गई पुलिस पर फायरिंग, एसपी सिटी व थानाध्यक्ष समेत 29 लोगों की मौत
3 जून: डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह ने किया जवाहरबाग का निरीक्षण
4 जून: पुलिस ने एलान किया कि जवाहरबाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष यादव भी मारा गया है
6 जून: शासन ने एसएसपी राकेश और डीएम राजेश कुमार को हटाया
7 जून: शासन ने जवाहरबाग कांड की जांच को न्यायिक आयोग का गठन किया
8 जून: विस्फोटकों की जांच करने पहुंची केंद्रीय टीम
13 जून: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मथुरा पहुंचे, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी को नियुक्ति पत्र दिया
15 जून: रामवृक्ष का दाहिना हाथ चंदन बोस पत्नी के साथ गिरफ्तार
17 जून: रामवृक्ष का हथियार सप्लायर राकेश गिरफ्तार
24 जून: रामवृक्ष के बाडीगार्ड देवेश और अनिल गिरफ्तार
25 जून: मथुरा पहुंची न्यायिक आयोग की टीम, शुरू की जांच
29 जून: रामवृक्ष का सुरक्षा कमांडर वीरेश गिरफ्तार
न्यायिक आयोग के समक्ष हो चुकी है 433 की गवाही
न्यायिक आयोग के समक्ष अब तक 433 लोगों की गवाही हो चुकी है। इनमें वह पुलिस वाले भी हैं जो जवाहरबाग को खाली कराने के लिए गए थे। न्यायिक आयोग 2 जून, 2016 से इस मामले की जांच कर रहा है। दो दफा जांच पूरी करने की अवधि भी बढ़ चुकी है। अब मार्च तक न्यायिक आयोग को जांच पूरी करके रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। न्यायिक आयोग ने भी उन अधिकारियों को नोटिस भेजे हैं जो मथुरा में तैनात रह चुके हैं।
हालात कंट्रोल होने के बाद पहुंचे थे डीएम, एसएसपी
शुरुआत में तो एसपी सिटी को अकेला ही भेज दिया गया था। जब बवाल बढ़ा और लखनऊ तक हल्ला मचा तब पुलिस कप्तान और डीएम मौके पर पहुंचे थे। इनके देर से पहुंचने पर भी सवाल उठे थे। अगर पहले ही बड़े अधिकारी होते तो इतनी बड़ी हिंसा नहीं होती। भीड़ को आसानी के साथ जवाहरबाग से बाहर निकाला जा सकता था।
सीबीआई जांच का आदेश होते ही अफसर बेचैन
सीबीआई जांच का आदेश होते ही अफसर बेचैन हो गए। कलक्ट्रेट में तो सारा दिन इसे लेकर ही चर्चा होती रही। जो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आपरेशन जवाहरबाग में शामिल रहे हैं सभी घबराए हुए रहे। पहले इन लोगों ने न्यायिक आयोग के समक्ष अपने बयान दिए अब सीबीआई की जांच से गुजरना होगा।
जेल जाने चाहिए लापरवाह अफसर: प्रफुल्ल
शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के भाई प्रफुल्ल द्विवेदी का कहना है कि जवाहरबाग कांड अफसरों की लापरवाही का नतीजा है। इसके पीछे जितने भी अधिकारी हैं सभी को जेल होनी चाहिए। मेरे भाई को अकेले ही जवाहरबाग में भेज दिया था। हमारा परिवार आज तक रो रहा है। कम से कम इन लोगों को भी तो सजा हो। हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के बाद प्रफुल्ल द्विवेदी ने कहा कि हमें अदालत से न्याय की उम्मीद थी, जो मिला है। सीबीआई जांच के बाद हकीकत खुलकर सामने आएगी। किसकी क्या गलती थी, सब उजागर होगा। प्रफुल्ल ने बताया कि लापरवाह अफसरों ने हमारा हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। प्रफुल्ल ने बताया कि उनके पास भी कई जरूरी दस्तावेज हैं जो वो सीबीआई को सौंपेंगे। सीबीआई की जांच में अफसरों पर कार्रवाई होना तय है। हिंसा के बाद डीएम और एसएसपी का केवल तबादला किया गया। तबादला क्या कोई सजा होती है।
रामवृक्ष की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि आज तक नहीं हुई
मथुरा (ब्यूरो)। जवाहरबाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि आज तक नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट के आदेश पर रामवृक्ष के बेटों को ढूंढकर उनके ब्लड का सैंपल लिया गया था। सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया। मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि रामवृक्ष मर चुका है या नहीं।
झोपड़ियों में जलकर मरे लोगों का राज भी सामने आएगा
मथुरा (ब्यूरो)। जवाहरबाग में कब्जाधारी झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। 2 जून 2016 को हुई हिंसा के बाद इन झोपड़ियों में आग लग गई थी। पुलिस का कहना है कि गोलीबारी के दौरान आग लगी थी जबकि जो लोग बच गए थे उनका तर्क था कि पुलिस ने आग लगाई थी। इसी आग में जलकर रामवृक्ष यादव और तमाम कब्जाधारियों की मौत हो गई थी।
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रामवृक्ष ने अपने समर्थकों के साथ एक जनवरी, 2014 को जवाहरबाग पर कब्जा जमाया था। प्रारंभ में उसने दो दिन के सत्याग्रह की अनुमति मांगी थी लेकिन बाद में उसने बाग पर कब्जा जमा लिया। रामवृक्ष के साथ शुरुआत में मुश्किल से 500 लोग थे, बाद में ये संख्या बढ़कर तीन हजार से भी ज्यादा हो गई। सीतापुर, गाजीपुर, कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ, बरेली, लखीमपुर खीरी, कन्नौज, झांसी, फैजाबाद के साथ अलीगढ़ और ब्रज क्षेत्र के जिलों के साथ राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार के लोग भी जवाहरबाग में थे।
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सरकारी संपत्ति से कब्जा हटवाने की जिम्मेदारी डीएम, एसएसपी, एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ, थानाध्यक्ष, सीओ एलआईयू और उद्यान अधिकारी की थी। क्योंकि इन अफसरों ने न्यायिक आयोग की जांच के दौरान कहा था कि उच्च अधिकारियों को कब्जे के संबंध में लगातार रिपोर्ट जाती रही थी तो कमिश्नर और आईजी के साथ लखनऊ में बैठे इनके उच्च अधिकारियों को भी जवाब देना होगा।
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वह लोग भी जांच से बच नहीं पाएंगे जो दो जून, 2016 को एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के साथ जवाहरबाग खाली कराने पहुंचे थे। लेकिन जब मुकुल द्विवेदी पर कब्जाधारियों ने हमला किया तो इनमें से कोई दिखाई नहीं दिया था। इनमें भी चार सीओ, छह थानाध्यक्ष के साथ करीब 12 हमराह थे। भीड़ ने एसपी सिटी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या कर दी थी।
इन्हें भी देना होगा जवाब
डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, प्रमुख सचिव उद्यान, आईजी और कमिश्नर
पुलिस की जांच पर भी हाईकोर्ट ने उठाए थे सवाल
जवाहरबाग कांड की जांच सीबीआई से कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि पुलिस ने भीड़ को आरोपी बना दिया है। अदालत ने कहा था कि इतनी बड़ी हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन करना चाहिए। लेकिन एसआईटी का गठन नहीं किया गया।
क्या था मामला
गाजीपुर के रहने वाले रामवृक्ष यादव ने मध्यप्रदेश के सागर जनपद से स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के नाम पर यात्रा निकाली थी। इस यात्रा को दिल्ली जाना था लेकिन ऐन वक्त पर ये यात्रा मथुरा पहुंच गई। एक जनवरी, 2014 को ये यात्रा मथुरा पहुंची थी। रामवृक्ष यादव ने दो दिन का सत्याग्रह करने के लिए जवाहरबाग में प्रवेश किया था। लेकिन उसके बाद बाग ने कब्जा जमा लिया। जवाहरबाग में स्थित उद्यान विभाग के कार्यालय पर कब्जा कर लिया था। तहसील के स्टाफ के साथ मारपीट की गई। जवाहरबाग में बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया। गेट पर कब्जाधारियों का पहरा लगा दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन सक्रिय हुआ और बाग को खाली कराने के लिए हाथ-पांव मारने शुरू किए। 2 जून, 2016 की शाम को एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पुलिस बल के साथ जवाहरबाग को खाली कराने के लिए गए तो भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की मौत हो गई थी। 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। शासन ने इस हिंसा की जांच को न्यायिक आयोग का गठन कर किया। जांच चल रही है।
घटना के संबंध में विवरण
11 नामजद और ढाई हजार अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट
104 कब्जाधारियों को गिरफ्तार किया गया था, इनमें एक महिला थी
04 लोगों की मौत हो चुकी है गिरफ्तार किए गए कब्जाधारियों में से
103 लोगों को आरोपी बनाते हुए पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की
कब क्या हुआ
2 जून, 2016: जवाहरबाग खाली कराने गई पुलिस पर फायरिंग, एसपी सिटी व थानाध्यक्ष समेत 29 लोगों की मौत
3 जून: डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह ने किया जवाहरबाग का निरीक्षण
4 जून: पुलिस ने एलान किया कि जवाहरबाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष यादव भी मारा गया है
6 जून: शासन ने एसएसपी राकेश और डीएम राजेश कुमार को हटाया
7 जून: शासन ने जवाहरबाग कांड की जांच को न्यायिक आयोग का गठन किया
8 जून: विस्फोटकों की जांच करने पहुंची केंद्रीय टीम
13 जून: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मथुरा पहुंचे, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी को नियुक्ति पत्र दिया
15 जून: रामवृक्ष का दाहिना हाथ चंदन बोस पत्नी के साथ गिरफ्तार
17 जून: रामवृक्ष का हथियार सप्लायर राकेश गिरफ्तार
24 जून: रामवृक्ष के बाडीगार्ड देवेश और अनिल गिरफ्तार
25 जून: मथुरा पहुंची न्यायिक आयोग की टीम, शुरू की जांच
29 जून: रामवृक्ष का सुरक्षा कमांडर वीरेश गिरफ्तार
न्यायिक आयोग के समक्ष हो चुकी है 433 की गवाही
न्यायिक आयोग के समक्ष अब तक 433 लोगों की गवाही हो चुकी है। इनमें वह पुलिस वाले भी हैं जो जवाहरबाग को खाली कराने के लिए गए थे। न्यायिक आयोग 2 जून, 2016 से इस मामले की जांच कर रहा है। दो दफा जांच पूरी करने की अवधि भी बढ़ चुकी है। अब मार्च तक न्यायिक आयोग को जांच पूरी करके रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। न्यायिक आयोग ने भी उन अधिकारियों को नोटिस भेजे हैं जो मथुरा में तैनात रह चुके हैं।
हालात कंट्रोल होने के बाद पहुंचे थे डीएम, एसएसपी
शुरुआत में तो एसपी सिटी को अकेला ही भेज दिया गया था। जब बवाल बढ़ा और लखनऊ तक हल्ला मचा तब पुलिस कप्तान और डीएम मौके पर पहुंचे थे। इनके देर से पहुंचने पर भी सवाल उठे थे। अगर पहले ही बड़े अधिकारी होते तो इतनी बड़ी हिंसा नहीं होती। भीड़ को आसानी के साथ जवाहरबाग से बाहर निकाला जा सकता था।
सीबीआई जांच का आदेश होते ही अफसर बेचैन
सीबीआई जांच का आदेश होते ही अफसर बेचैन हो गए। कलक्ट्रेट में तो सारा दिन इसे लेकर ही चर्चा होती रही। जो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आपरेशन जवाहरबाग में शामिल रहे हैं सभी घबराए हुए रहे। पहले इन लोगों ने न्यायिक आयोग के समक्ष अपने बयान दिए अब सीबीआई की जांच से गुजरना होगा।
जेल जाने चाहिए लापरवाह अफसर: प्रफुल्ल
शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के भाई प्रफुल्ल द्विवेदी का कहना है कि जवाहरबाग कांड अफसरों की लापरवाही का नतीजा है। इसके पीछे जितने भी अधिकारी हैं सभी को जेल होनी चाहिए। मेरे भाई को अकेले ही जवाहरबाग में भेज दिया था। हमारा परिवार आज तक रो रहा है। कम से कम इन लोगों को भी तो सजा हो। हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के बाद प्रफुल्ल द्विवेदी ने कहा कि हमें अदालत से न्याय की उम्मीद थी, जो मिला है। सीबीआई जांच के बाद हकीकत खुलकर सामने आएगी। किसकी क्या गलती थी, सब उजागर होगा। प्रफुल्ल ने बताया कि लापरवाह अफसरों ने हमारा हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। प्रफुल्ल ने बताया कि उनके पास भी कई जरूरी दस्तावेज हैं जो वो सीबीआई को सौंपेंगे। सीबीआई की जांच में अफसरों पर कार्रवाई होना तय है। हिंसा के बाद डीएम और एसएसपी का केवल तबादला किया गया। तबादला क्या कोई सजा होती है।
रामवृक्ष की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि आज तक नहीं हुई
मथुरा (ब्यूरो)। जवाहरबाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि आज तक नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट के आदेश पर रामवृक्ष के बेटों को ढूंढकर उनके ब्लड का सैंपल लिया गया था। सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया। मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि रामवृक्ष मर चुका है या नहीं।
झोपड़ियों में जलकर मरे लोगों का राज भी सामने आएगा
मथुरा (ब्यूरो)। जवाहरबाग में कब्जाधारी झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। 2 जून 2016 को हुई हिंसा के बाद इन झोपड़ियों में आग लग गई थी। पुलिस का कहना है कि गोलीबारी के दौरान आग लगी थी जबकि जो लोग बच गए थे उनका तर्क था कि पुलिस ने आग लगाई थी। इसी आग में जलकर रामवृक्ष यादव और तमाम कब्जाधारियों की मौत हो गई थी।