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Mathura News: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, कैसे हो मरीजों का इलाज
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मथुरा। जिला अस्पताल में चेस्ट फिजिशियन की ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
- फोटो : mathura
मथुरा। प्रदेश सरकार जनता को सस्ता और सुलभ इलाज कराने के दावे भले ही करती हो, लेकिन स्थिति इससे उलट है। महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल और महिला अस्पताल पिछले कई वर्षों से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन अभी तक इनकी पूर्ति नहीं हुई है। इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। तीमारदार भी मरीज को दिखाने के लिए भटकते हैं।
प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ाने पर भरपूर जोर दे रही है। करोड़ों रुपये की बिल्डिंग और अस्पतालों में चिकित्सकीय संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में न जाना पड़े, लेकिन चिकित्सकों की कमी को दूर करने की ओर सरकार के नुमाइंदों का ध्यान नहीं है। अस्पतालों में असाध्य रोगों के विशेषज्ञ की कमी के कारण मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, हृदय रोग, मनोचिकित्सक के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। एंथेसिया के एक चिकित्सक से कार्य चलाया जा रहा है, जबकि रेडियोलॉजिस्ट के पद पर सीएमओ कार्यालय से अटैचमेंट में चिकित्सक से कार्य कराया रहा है।
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इसी प्रकार महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के 5 में से 3 पद खाली हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के 4 में से दो पद खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजिस्ट का पद पिछले चार साल से खाली पड़ा है। एंथेसिया चिकित्सक के दो पदों में से एक खाली पड़ा है। ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) के चार पद हैं और सभी खाली हैं।
वर्जन
स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण ओपीडी और महिलाओं के मेडिकल में परेशानी हो रही है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। चिकित्सकों के संबंध में सूचना मांगने पर शासन को अवगत कराया जाता है। ईएमओ के अभाव में इमरजेंसी विभाग को संचालित करने में कठिनाई आ रही है।
-डॉ. अनिल कुमार, सीएमएस महिला अस्पताल
प्रतिदिन 1400 के करीब मरीज जिला अस्पताल में उपचार कराने के लिए आते हैं। फिजिशियन न होने के कारण चेस्ट फिजिशियन से मरीजों की ओपीडी करानी पड़ती है। अन्य विशेषज्ञों के अभाव में उनकी ओपीडी नहीं कर पाते हैं। पिछले महीने ही शासन को चिकित्सकों की कमी से अवगत कराया है।
-डॉ. नीरज कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ाने पर भरपूर जोर दे रही है। करोड़ों रुपये की बिल्डिंग और अस्पतालों में चिकित्सकीय संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में न जाना पड़े, लेकिन चिकित्सकों की कमी को दूर करने की ओर सरकार के नुमाइंदों का ध्यान नहीं है। अस्पतालों में असाध्य रोगों के विशेषज्ञ की कमी के कारण मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, हृदय रोग, मनोचिकित्सक के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। एंथेसिया के एक चिकित्सक से कार्य चलाया जा रहा है, जबकि रेडियोलॉजिस्ट के पद पर सीएमओ कार्यालय से अटैचमेंट में चिकित्सक से कार्य कराया रहा है।
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इसी प्रकार महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के 5 में से 3 पद खाली हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के 4 में से दो पद खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजिस्ट का पद पिछले चार साल से खाली पड़ा है। एंथेसिया चिकित्सक के दो पदों में से एक खाली पड़ा है। ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) के चार पद हैं और सभी खाली हैं।
वर्जन
स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण ओपीडी और महिलाओं के मेडिकल में परेशानी हो रही है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। चिकित्सकों के संबंध में सूचना मांगने पर शासन को अवगत कराया जाता है। ईएमओ के अभाव में इमरजेंसी विभाग को संचालित करने में कठिनाई आ रही है।
-डॉ. अनिल कुमार, सीएमएस महिला अस्पताल
प्रतिदिन 1400 के करीब मरीज जिला अस्पताल में उपचार कराने के लिए आते हैं। फिजिशियन न होने के कारण चेस्ट फिजिशियन से मरीजों की ओपीडी करानी पड़ती है। अन्य विशेषज्ञों के अभाव में उनकी ओपीडी नहीं कर पाते हैं। पिछले महीने ही शासन को चिकित्सकों की कमी से अवगत कराया है।
-डॉ. नीरज कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल