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Mathura News: महिला क्रिकेटरों में दिखी ऊर्जा व जोश
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एचीवर्स एकेडमी में क्रिकेट खेलने के तैयार महिला खिलाड़ी। संवाद
मथुरा। आईसीसी एकदिवसीय महिला वर्ल्ड कप-2025 में टीम इंडिया के फाइनल में पहुंचने की खबर ने मथुरा की महिला क्रिकेटरों में नई ऊर्जा भर दी है। देशभर में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन की गूंज के बीच नई उभरती हुईं महिला क्रिकेटर के सपनों को पंख लग गए हैं। मैदानों में पसीना बहाने वाली महिला क्रिकेटर्स में जोश और उम्मीद की नई लहर दौड़ पड़ी है।
सौंख रोड स्थित एचीवर्स क्रिकेट एकेडमी में अलग-अलग राज्यों से आईं प्रशिक्षु महिला खिलाड़ी सुबह से ही नेट पर पसीना बहाती हैं। बल्ले और गेंद की टकराहट के बीच उनके चेहरों पर टीम इंडिया की जीत का उत्साह साफ झलक रहा है।
मेरी दीदी क्रिकेटर बनना चाहती थी। मगर वह दिव्यांग हैं। दीदी का सपना पूरा करने के लिए मैं लगातार प्रयास कर रही हूं। जेमिमा रॉड्रिग्स की तरह अच्छी बल्लेबाज बनना चाहती हूं।- राजनंदनी पांडेय
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टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने जोश भर दिया है। अब मैं भी खुद को भारतीय टीम में शामिल होने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दूंगी। टीम में पहुंचकर देश का नाम रोशन करना है। दीक्षा छौंकर
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घर में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। अब एकेडमी में लगातार प्रशिक्षण ले रही हूं। टीम की सफलता देख अब हर अभ्यास सत्र हमारे लिए किसी अंतरराष्ट्रीय मैच जैसा होता है। राधिका चौधरी
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स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसी खिलाड़ियों को फाइनल में खेलते देख मुझे भी यकीन हो गया है कि मेहनत और लगन से कुछ भी नामुमकिन नहीं। -संध्या
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सौंख रोड स्थित एचीवर्स क्रिकेट एकेडमी में अलग-अलग राज्यों से आईं प्रशिक्षु महिला खिलाड़ी सुबह से ही नेट पर पसीना बहाती हैं। बल्ले और गेंद की टकराहट के बीच उनके चेहरों पर टीम इंडिया की जीत का उत्साह साफ झलक रहा है।
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मेरी दीदी क्रिकेटर बनना चाहती थी। मगर वह दिव्यांग हैं। दीदी का सपना पूरा करने के लिए मैं लगातार प्रयास कर रही हूं। जेमिमा रॉड्रिग्स की तरह अच्छी बल्लेबाज बनना चाहती हूं।- राजनंदनी पांडेय
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टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने जोश भर दिया है। अब मैं भी खुद को भारतीय टीम में शामिल होने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दूंगी। टीम में पहुंचकर देश का नाम रोशन करना है। दीक्षा छौंकर
घर में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। अब एकेडमी में लगातार प्रशिक्षण ले रही हूं। टीम की सफलता देख अब हर अभ्यास सत्र हमारे लिए किसी अंतरराष्ट्रीय मैच जैसा होता है। राधिका चौधरी
स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसी खिलाड़ियों को फाइनल में खेलते देख मुझे भी यकीन हो गया है कि मेहनत और लगन से कुछ भी नामुमकिन नहीं। -संध्या