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Mathura News: प्रसूताओं को सुविधा नहीं दर्द दे रहा सिस्टम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Apr 2025 12:31 AM IST
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The system is giving pain to pregnant women instead of facilities
मथुरा। जिला महिला अस्पताल में भर्ती मरीज साथ में तीमारदार। - फोटो : mathura
शुभम शर्मा
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मथुरा। जिला महिला अस्पताल में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन देने का आदेश केवल छलावा साबित हो रहा है। उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार नाश्ता और भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिल भुगतान करवा लिया जा रहा है।

प्रसूताओं को मिलने वाले भोजन व नाश्ते की शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल पहुंच मरीजों व तीमारदारों से बात की तो दावों की पोल खुली। जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिला प्रसव से पूर्व या प्रसव के बाद अस्पताल में भर्ती होती है तो उसे पोषणयुक्त दोपहर व रात्रि भोजन और सुबह का नाश्ता निशुल्क देने का प्रावधान है। सामान्य प्रसव में दो दिन व सिजेरियन प्रसव के मामले में पांच दिन तक यह सुविधा प्रदान की जाती है। इसके लिए प्रति मरीज 90 रुपये की दर से अनुबंध किया गया है।
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अनुबंध की शर्तों के अनुसार ठेकेदार को इस 90 रुपये में सुबह 7 बजे से 8:30 बजे तक एक ग्लास दूध के साथ दो अंडे, दलिया, पोहा, ब्रेड के चार स्लाइस और 10 ग्राम मक्खन दिया जाना है। भोजन में दोपहर एक से दो बजे तक चार रोटी, दाल, मौसमी सब्जी, चावल व सलाद, दही और रात के भोजन में शाम सात बजे से 8:30 बजे तक चार रोटी, मौसमी सब्जी, चावल व मौसमी फल (सेब, संतरा, केला आदि) एक ग्लास दूध देना होता है, लेकिन इस मेन्यू का जिला महिला अस्पताल के साथ ही अधिकांश सामुदायिक केंद्रों पर मखौल उड़ाया जा रहा है।
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सुबह नाश्ते में दो सौ मिली लीटर दूध के स्थान पर सिर्फ दलिया ही दिया जा रहा है। दोपहर के भोजन में सलाद और दही लगभग कहीं नहीं दिया जा रहा है। वहीं, रात में सब्जी, रोटी, चावल ही मिल रहा हैै। यह व्यवस्था एक दिन की नहीं है, इसके बावजूद भी अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी कभी इस व्यवस्था की हकीकत नहीं देखते हैं और बिल भुगतान के लिए अग्रसारित कर देते हैं।

एक बाथरूम में ताला तो दूसरे में लाइट नहीं
महिला अस्पताल में प्रसूताओं व उनके तीमारदारों के लिए जो बाथरूम बने हैं वे उनके लिए सुविधा नहीं बल्कि मुसीबत का कारण बने हैं। एक बाथरूम में ताला लगा है तो दूसरे बाथरूम में लाइट की व्यवस्था नहीं है। वहीं, टंकी का पाइप फटा होने के कारण पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा है।

केस एक
जिला महिला अस्पताल में अडूकी निवासी निशा तीन दिन से भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि सुबह को नाश्ते में सिर्फ दलिया ही मिला। फल, मक्खन या दूध नहीं दिया गया। परिवार वाले ही बाजार से फल लेकर आए थे।

केस दो
सदर निवासी शालू सात दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पति शेखर ने बताया कि मेन्यू के हिसाब से कुछ नहीं मिल रहा है। वहीं, पंखे खराब पड़े हैं। बाथरूम में लाइट तक की व्यवस्था तक नहीं है।


केस तीन
जगनेर निवासी नीलम तीन दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पति अमित कुमार ने बताया कि टंकी में पीने तक पानी नहीं आ रहा, मेन्यू की बात तो दूर की है। कोई सुनने वाला नहीं है।

वर्जन
मरीजों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार डाइट देने के निर्देश हैं। अगर उन्हें कुछ नहीं मिल रहा तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-शोभावती, सीएमएस
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