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अद्भुत है बरसाना और नंदगांव का रिश्ता, कन्हैया से जमाई का नाता जोड़े हैं बरसानावासी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 11:40 PM IST
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The relationship of Barsana and Nandgaon is wonderful, the people of Barsana have added Jamai's relationship with Kanhaiya.
बरसाना/नंदगांव (मथुरा)। योगीराज श्रीकृष्ण भले ही दुनिया के लिए भगवान हों, लेकिन बरसाना वालों से उनका रिश्ता जमाई का है। इसी रिश्ते के चलते नंदगांव और बरसाना के बीच हंसी-ठिठोली में प्रेमपगी गालियों का प्रचलन है। खासकर होली के दौरान बरसाना की महिलाएं प्रेमपगी गालियां वाले गीत सुनाती हैं। लठामार होली में शामिल होने के लिए बरसाना पहुंचने वाले आम श्रद्धालु भी इन गालियों को सुनकर मुस्कराते हैं।
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बरसाना-नंदगांव की साझा संस्कृति बड़ी विलक्षण और अद्वितीय है। यहां के कण-कण में प्यार, त्याग और सद्भाव का समावेश है। इसीलिए दोनों गांवों के बीच में आजतक कोई भी वैवाहिक संबंध नहीं हुआ है। क्योंकि बरसाना के लोग कृष्ण को जमाई मानते हैं। नंदगांव के लोगों को कृष्ण के सखा होने के चलते इसी भाव से माना जाता है।
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ससुराल में जिस प्रकार जमाता और उनके साथियों को ब्रज परंपरानुसार प्रेमपगी गालियां सुनाई जाती हैं, ठीक उसी तरह बरसाना के लोग नंदगांव वालों की मौजूदगी में गालियां सुनाते हैं। इनके बीच गालियों के वार्तालाप को सुनकर आमलोग आश्चर्य चकित रह जाते हैं।
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‘तेरी बहन छैल छिनगारी, याकी श्रीदामा ते यारी’
- बरसाना के लोग आज भी सुनाते हैं कृष्ण को प्रेमपगी गालियां
मथुरा। बरसाना और नंदगांव के गोस्वामीजनों के मध्य होली पर समाज गायन में गालियां बरबस ही सबका ध्यान आकृष्ट करती हैं। लठामार होली के दौरान समाज गायन में गोस्वामीजन सामरे कन्हैया को गालियां देते हुए पद गाते हैं कि ‘गावैं दे दे तारियां हो ब्रज की नारीयां सुकुमारि, ‘नंद के नंदना हो ब्रज के चंदना सुकुमार, ‘मिल बरसाने की गोरी यासे गावै नवल किशोरी, तुम सुनो नंद के नंदा, तुम्है कौ पूछै ब्रज चंदा। गालियों में कान्हा की बहन को सबसे पहले निशाना बनाते हैं, तेरी बहन छैल छिनगारी, याकी श्रीदामा ते यारी। यहीं नहीं कान्हा की यशोदा मैया पर आक्षेप लगाने से भला बरसानावासी क्यों चूकें, वे भी कुछ इस तरह तेरी मां यशोदा रानी, काऊ कारे सौं रति मानी। नंद नंदन बड़ी विनोदन तेरी ताई, जाकि सब कोई करे बड़ाई। यही हाल कान्हा की बुआ का किया जाता है। लाला तेरी बुआ, वाकें कुंवारी के सुत हुआ। ऐसे में भला कान्हा की काकी कैसे रह सकती हैं। लाला अति चंचल तेरी काकी, वो तो काम कला में पाकी। इस दौरान नंदबाबा के मित्रों की बंधुओं पर भी कटाक्ष किया जाता है। समाज गायन का यह माहौल आम तौर पर भी होली के दौरान लोगों के बीच देखने को मिलता है। संवाद
लाला की गारी सुनवे कौ अवसर बड़े भाग्यन ते मिल्यौ...
लाला की गारी सुनवे कौ अवसर बड़े भाग्यन ते मिल्यौ है। हमें नैकहू बुरौ न लगै। बरसाने वारेन की गारी तौ हमें आशीष लगें।
- दानबिहारी गोस्वामी, सेवायत नंदबाबा मंदिर, नंदगांव
ये कोई सामान्य गालियां नहीं
ये कोई सामान्य गालियां नहीं हैं। प्रेम पगी गालियों के माध्यम से बरसाना के लोग अपने इष्ट की ही भक्ति करते हैं। इनमें बुरा मानने जैसा कुछ भी नहीं है।
- रमेश चंद गोस्वामी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, नंदगांव
नंदगांव के हुरियारों के मुंह से भाभी सुनने का इंतजार
नंदगांव के छोटे से बालक ते लेकर बूढ़े तक हमें भाभी कहके चिढ़ावैं। जब मेरी शादी होकर आई तो पहली बार सुनकर बहुत अजीब लगा, मगर अब नंदगांव के हुरियारों के मुंह से हमें भाभी सुनने का इंतजार रहता है। उनके भाभी कहने में जो मिठास है वह दुनिया के स्वादिष्ट पकवानों में भी नहीं है।

- रजनी गोस्वामी, बरसाना
हम उन्हें बड़े ही प्रेम से गालियां सुनामे
नंदगांव के छैला जब हमें होली में छकामे तब हम उनकु बड़े ही प्रेम से गालियां सुनामे उनकी बहन, मासी, नानी, काकी, आदि कुं धर-धर के गाली सुनामे और फिर जब ज्यादा परेशान करे तब लाठियां मारे बड़ो ही आनंद आवे हते है।
- मुन्नी देवी, बरसाना
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