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ब्रज की महिमा ऐसी कि भगवान शिव को भी योगी बनकर आना पड़ा : प्रदीप मिश्रा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 12:18 AM IST
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The glory of Braj is such that even Lord Shiva had to come disguised as a yogi: Pradeep Mishra
महाशिवपुराण कथा का गुणगान करते कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा। संवाद
बरसाना। ब्रज की महिमा का बखान करते हुए जब कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यहां भगवान शिव को भी श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए योगी बनकर आना पड़ा तो शिव महापुराण कथा का पंडाल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। सात दिवसीय कथा के चौथे दिन बरसाना में भक्ति का महासागर उमड़ पड़ा। कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गए और बाहर भी भक्तों की कतार लगी रही। तेज धूप के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगी। छाते लगाकर भक्त घंटों कथा श्रवण करते रहे।
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पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यह वही ब्रज भूमि है, जहां राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाएं कीं। इस धरा के कण-कण में भक्ति बसी है। ब्रज में आने के लिए केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है, यहां सरलता और प्रेम चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने भीतर का अहंकार छोड़कर सहज भाव से ब्रज में आता है, वही इस भूमि की आध्यात्मिक अनुभूति कर पाता है। उद्धव प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि भगवान को पाने के लिए केवल ज्ञान का अहंकार नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ब्रज की भूमि मनुष्य को सहज बनाती है। यहां आने के बाद अपने भीतर के अहंकार को छोड़कर प्रेम और विश्वास के साथ भगवान की शरण में जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर अपनी आशा और अपेक्षा दूसरे लोगों से लगा लेता है। अपेक्षा पूरी नहीं होने पर निराशा मिलती है। उन्होंने कहा कि आशा महादेव से लगानी चाहिए और विश्वास स्वयं पर रखना चाहिए। जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, भगवान पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। कठिन समय भक्त के विश्वास की परीक्षा लेता है और यही समय उसे भीतर से मजबूत भी करता है। दूसरों को सीख देना आसान है, लेकिन उसे अपने जीवन में उतारना कठिन है। वास्तविक प्रेरणा शब्दों से नहीं, बल्कि आचरण से मिलती है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के आचरण को जीवन में उतारने वाला ही रामकथा का मर्म समझ सकता है। इसी तरह नारायण के तत्व को अपनाने वाला नारायण की कथा और शिव तत्व को अपने आचरण में धारण करने वाला शिव महापुराण के संदेश को समझ सकता है। कथा के दौरान हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा कथा परिसर शिवमय हो उठा।
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