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Mathura News: ब्रज का लोक साहित्य अथाह सागर
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वृंदावन। पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि ब्रज का लोक साहित्य एक अथाह सागर है, जिसमें डूबने पर सच्चे मोती रूपी लोक गीत प्राप्त होते हैं। उनके द्वारा पांच हजार से अधिक लोक गीतों का संकलन किया जा चुका है। यह विचार उन्होंने वृंदावन शोध संस्थान में साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में ब्रजभाषा, साहित्य एवं संस्कृति विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यक्त किए। संगोष्ठी के दौरान ब्रज लोक साहित्य में अभूतपूर्व योगदान के लिए संस्थान के अध्यक्ष एवं निदेशक द्वारा मोहन स्वरूप भाटिया को रामदास गुप्त स्मृति सम्मान से नवाजा गया।
साहित्य अकादमी के सचिव वरुण गुलाटी ने युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए ब्रजभाषा के महत्व को साहित्य के वैश्विक चिंतन की ओर मुखरित करने पर बल दिया। राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी ने ब्रजभाषा साहित्य को क्रांति धर्मी और लोक धर्मी बताया। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति एमबी चेट्टी ने बताया कि संस्थान और संस्कृति विश्वविद्यालय के मध्य ब्रज संस्कृति के संरक्षण-संवर्द्धन के लिए समझौता ज्ञापन हुआ है। प्रोफेसर माधव हाड़ा ने कहा कि 13वीं से 20वीं शताब्दी तक ब्रजभाषा भारत के मध्य देश की प्रमुख साहित्यिक एवं काव्य भाषा रही है।
संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने युवा पीढ़ी से दैनिक जीवन में ब्रजभाषा का प्रयोग करने का आह्वान किया। निदेशक राजीव द्विवेदी ने ब्रजभाषा की प्रासंगिकता पर विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन राजेश शर्मा और कार्यक्रम का संचालन ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने किया। इसमें अभिषेक शर्मा, सत्यप्रिय पांडे, कृष्णचन्द्र गोस्वामी व पद्मश्री उषा यादव, लक्ष्मीनारायण तिवारी व ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने विचार व्यक्त किए।
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साहित्य अकादमी के सचिव वरुण गुलाटी ने युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए ब्रजभाषा के महत्व को साहित्य के वैश्विक चिंतन की ओर मुखरित करने पर बल दिया। राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी ने ब्रजभाषा साहित्य को क्रांति धर्मी और लोक धर्मी बताया। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति एमबी चेट्टी ने बताया कि संस्थान और संस्कृति विश्वविद्यालय के मध्य ब्रज संस्कृति के संरक्षण-संवर्द्धन के लिए समझौता ज्ञापन हुआ है। प्रोफेसर माधव हाड़ा ने कहा कि 13वीं से 20वीं शताब्दी तक ब्रजभाषा भारत के मध्य देश की प्रमुख साहित्यिक एवं काव्य भाषा रही है।
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संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने युवा पीढ़ी से दैनिक जीवन में ब्रजभाषा का प्रयोग करने का आह्वान किया। निदेशक राजीव द्विवेदी ने ब्रजभाषा की प्रासंगिकता पर विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन राजेश शर्मा और कार्यक्रम का संचालन ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने किया। इसमें अभिषेक शर्मा, सत्यप्रिय पांडे, कृष्णचन्द्र गोस्वामी व पद्मश्री उषा यादव, लक्ष्मीनारायण तिवारी व ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने विचार व्यक्त किए।
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