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जवाहरबाग पर पैसा लगा रहे थे 7 राज्यों के 45 लोग
पुनीत शर्मा
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:14 AM IST
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जवाहर बाग
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जवाहरबाग पर सात राज्यों के 45 लोगों का पैसा लग रहा था। यह तो वह संख्या है जो जवाहरबाग हिंसा के बाद रामवृक्ष के आफिस से मिली डायरी में दर्ज हैं। जबकि एक लंबी सूची उनकी भी है जो गुप्तदान दिया करते थे। यह लोग पैसा क्यों और किसलिए दे रहे थे इसकी जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। जेल में बंद रामवृक्ष के गुर्गे चंदनबोस और राकेश गुप्ता से भी पूछताछ की जाएगी।
जवाहरबाग में तीन हजार लोगों की भीड़ यूं ही नहीं जमी थी। उन्हें रोके रखने के लिए पूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं। खाने-पीने की किसी को कमी नहीं होने दी जाती थी। जवाहरबाग में जमा भीड़ का खर्च उठाने और रामवृक्ष के संगठन के लिए बाकायदा सात राज्यों से पैसा आ रहा था। गेहूं से भरे ट्रक पहुंचते थे। चावल भरी बोरियां पहुंचाईं जाती थीं। कपड़े तक उपलब्ध कराए गए।
2 जून, 2016 को जवाहरबाग में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने वहां बने रामवृक्ष के आफिस को चेक किया तो एक डायरी में चंदे का पूरा हिसाब मिला। कब और कहां से कितना पैसा आया इसका पूरा विवरण दर्ज था। अब सीबीआई ने इस डायरी को पढ़ना शुरू कर दिया है। इस डायरी के कुछ पन्ने जल गए हैं। डायरी में कुछ मोबाइल नंबर भी लिखे हुए हैं। इन नंबरों के जरिए सीबीआई चंदे के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। क्योंकि राकेश गुप्ता और चंदनबोस पूरा लेखा जोखा देखा करते थे लिहाजा सीबीआई इन दोनों से भी पूछताछ करेगी।
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रामवृक्ष को उपलब्ध कराई गई थीं गाड़ियां भी
जवाहरबाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष यादव लग्जरी गाड़ियों में चलता था। जवाहरबाग में हर वक्त पांच गाड़ियां खड़ी रहती थीं। हिंसा के दौरान लगी आग में ये गाड़ियां जल गईं थीं। ये गाड़ियां किसकी थीं और कहां से आईं थीं इसकी जानकारी अभी तक नहीं हो पाई है। सीबीआई इन गाड़ियों के मालिकों की तलाश में भी है।
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जवाहरबाग में तीन हजार लोगों की भीड़ यूं ही नहीं जमी थी। उन्हें रोके रखने के लिए पूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं। खाने-पीने की किसी को कमी नहीं होने दी जाती थी। जवाहरबाग में जमा भीड़ का खर्च उठाने और रामवृक्ष के संगठन के लिए बाकायदा सात राज्यों से पैसा आ रहा था। गेहूं से भरे ट्रक पहुंचते थे। चावल भरी बोरियां पहुंचाईं जाती थीं। कपड़े तक उपलब्ध कराए गए।
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2 जून, 2016 को जवाहरबाग में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने वहां बने रामवृक्ष के आफिस को चेक किया तो एक डायरी में चंदे का पूरा हिसाब मिला। कब और कहां से कितना पैसा आया इसका पूरा विवरण दर्ज था। अब सीबीआई ने इस डायरी को पढ़ना शुरू कर दिया है। इस डायरी के कुछ पन्ने जल गए हैं। डायरी में कुछ मोबाइल नंबर भी लिखे हुए हैं। इन नंबरों के जरिए सीबीआई चंदे के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। क्योंकि राकेश गुप्ता और चंदनबोस पूरा लेखा जोखा देखा करते थे लिहाजा सीबीआई इन दोनों से भी पूछताछ करेगी।
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रामवृक्ष को उपलब्ध कराई गई थीं गाड़ियां भी
जवाहरबाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष यादव लग्जरी गाड़ियों में चलता था। जवाहरबाग में हर वक्त पांच गाड़ियां खड़ी रहती थीं। हिंसा के दौरान लगी आग में ये गाड़ियां जल गईं थीं। ये गाड़ियां किसकी थीं और कहां से आईं थीं इसकी जानकारी अभी तक नहीं हो पाई है। सीबीआई इन गाड़ियों के मालिकों की तलाश में भी है।