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Mathura News: अंधाधुंध भूजल के दोहन पर कसा जाएगा शिकंजा
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वृंदावन। नगर निगम क्षेत्र में भूगर्भ जल का दोहन कर पानी का कारोबार करने वालों पर नगर निगम शिकंजा कसने जा रहा है। निगम के जलकल विभाग की टीम द्वारा आरओ प्लांट का सर्वे कर सूची तैयारी की जा रही है। इसके बाद बिना अनुमति आरओ प्लांट चलाने वाले संचालकों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
ब्रज का भू-गर्भ जल नमकीन होने के कारण पीने योग्य न होने पर लगातार आरओ के पानी की मांग बढ़ रही है। गर्मी आते ही यह मांग और अधिक हो जाती है। बढ़ती आरओ के पानी की मांग को देखते हुए लोगों ने कदम-कदम पर आरओ प्लांट लगाकर मनमाने तरीके से भूगर्भ जल का दोहन शुरू कर दिया है। नगर में 30 से अधिक आरओ वाटर प्लांट चल रहे हैं, लेकिन अधिकांश ने न ही निगम से अनुमति ली और न ही शुल्क जमा किया है। पानी का कारोबार लाखों रुपये प्रतिदिन का हो रहा है।
नगर निगम क्षेत्र में पानी का प्लांट लगाने से पहले निगम से स्वीकृति लेनी होती है। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा किया जाता है लेकिन नगर में मनमाने तरीके से लोग बोरिंग कर आरओ प्लांट लगा रहे हैं। साढ़े पांच लाख की आबादी वाले नगर निगम में प्रतिदिन डेढ़ लाख श्रद्धालु भी आ-जा रहे हैं। शुद्ध और शीतल पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए नगर के चैतन्य विहार, रुक्मिणी विहार, कैलाश नगर, बुर्जा, सुनरख, आनंद वाटिका, राधानिवास, गौरानगर, पानीघाट सहित गलियों में 30 से अधिक पानी के प्लांट लगे हैं। प्लाटों में पानी को फिल्टर करने के बाद 15 लीटर की कैन एवं एक हजार लीटर की टंकी लगी हैं। वहीं 15 लीटर आरओ पानी की 15 से 20 रुपये तक कीमत वसूली जा रही है। पेयजल और बिजली संकट की स्थिति में 15 लीटर की कैन 30 रुपये तक बिक जाती है।
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आरओ प्लांट संचालक का कहना है कि 15 लीटर की एक कैन के आरओ पानी तैयार करने में लगभग 4 रुपये खर्च आता है। कुछ खर्चा कैन को प्लांट से घर पहुंचने में लग जाता है। त्योहारों पर पानी की मांग दो गुनी हो जाती है। नगर निगम के अधिशासी अभियंता जल राम कैलाश ने बताया कि नगर निगम के सभी जोन में आरओ प्लांट का सर्वे चल रहा है। क्षेत्रीय जेई के द्वारा सर्वे कराया जा रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रहे आरओ प्लांट संचालकों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
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ब्रज का भू-गर्भ जल नमकीन होने के कारण पीने योग्य न होने पर लगातार आरओ के पानी की मांग बढ़ रही है। गर्मी आते ही यह मांग और अधिक हो जाती है। बढ़ती आरओ के पानी की मांग को देखते हुए लोगों ने कदम-कदम पर आरओ प्लांट लगाकर मनमाने तरीके से भूगर्भ जल का दोहन शुरू कर दिया है। नगर में 30 से अधिक आरओ वाटर प्लांट चल रहे हैं, लेकिन अधिकांश ने न ही निगम से अनुमति ली और न ही शुल्क जमा किया है। पानी का कारोबार लाखों रुपये प्रतिदिन का हो रहा है।
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नगर निगम क्षेत्र में पानी का प्लांट लगाने से पहले निगम से स्वीकृति लेनी होती है। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा किया जाता है लेकिन नगर में मनमाने तरीके से लोग बोरिंग कर आरओ प्लांट लगा रहे हैं। साढ़े पांच लाख की आबादी वाले नगर निगम में प्रतिदिन डेढ़ लाख श्रद्धालु भी आ-जा रहे हैं। शुद्ध और शीतल पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए नगर के चैतन्य विहार, रुक्मिणी विहार, कैलाश नगर, बुर्जा, सुनरख, आनंद वाटिका, राधानिवास, गौरानगर, पानीघाट सहित गलियों में 30 से अधिक पानी के प्लांट लगे हैं। प्लाटों में पानी को फिल्टर करने के बाद 15 लीटर की कैन एवं एक हजार लीटर की टंकी लगी हैं। वहीं 15 लीटर आरओ पानी की 15 से 20 रुपये तक कीमत वसूली जा रही है। पेयजल और बिजली संकट की स्थिति में 15 लीटर की कैन 30 रुपये तक बिक जाती है।
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आरओ प्लांट संचालक का कहना है कि 15 लीटर की एक कैन के आरओ पानी तैयार करने में लगभग 4 रुपये खर्च आता है। कुछ खर्चा कैन को प्लांट से घर पहुंचने में लग जाता है। त्योहारों पर पानी की मांग दो गुनी हो जाती है। नगर निगम के अधिशासी अभियंता जल राम कैलाश ने बताया कि नगर निगम के सभी जोन में आरओ प्लांट का सर्वे चल रहा है। क्षेत्रीय जेई के द्वारा सर्वे कराया जा रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रहे आरओ प्लांट संचालकों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी।