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Mathura News: बांकेबिहारी मंदिर में काले पड़े पत्थरों की सफाई कराएगा एएसआई
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वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी मंदिर के काले पड़ चुके पत्थरों और जर्जर हो चुके हिस्सों की अब वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जाएगी। धुएं से काले पड़े पत्थरों को केमिकल से चमकाया जाएगा। साथ ही जर्जर हो रहे पत्थरों को ठीक किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को दी गई है। इसके लिए उनकी टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर स्थिति का आंकलन किया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर पत्थर पर जमी परत, कालेपन तथा टूट-फूट की स्थिति सामने आई।
शनिवार को श्री बांकेबिहारी मंदिर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम के अधिकारी पहुंचे। उन्होंने मंदिर के सेवायत सदस्य और मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारियों के संग निरीक्षण किया। मंदिर में पत्थरों की दशा देखी। पत्थर कई जगह काले पड़ गए तो कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। एएसआई की टीम अब दोबारा सर्वे करेगी और उसके बाद कार्य शुरू करेगी। मदन मोहन मंदिर की तरह यहां भी केमिकल से सफाई की जाएगी और मंदिर को चमकता हुआ बनाया जाएगा। मंदिर के अंदर और बाहर दोनों ही जगह कालेपन की दिक्कत हैं।
पूर्व में एएसआई ने मदन मोहन मंदिर की सफाई का काम किया था। करीब 16 लाख रुपये की लागत से मंदिर को चमकाने का काम किया गया था। यह मंदिर एएसआई संरक्षित मंदिरों में से एक है। सेवायत सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि एएसआई के अधिकारियों ने पूरे मंदिर का निरीक्षण कर लिया है। अब पूरी टीम सर्वे करेगी और अपनी रिपोर्ट कमेटी को देगी। उसके बाद कार्य किया जाएगा। मंदिर निर्माण में राजस्थानी पत्थर का इस्तेमाल है।
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शनिवार को श्री बांकेबिहारी मंदिर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम के अधिकारी पहुंचे। उन्होंने मंदिर के सेवायत सदस्य और मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारियों के संग निरीक्षण किया। मंदिर में पत्थरों की दशा देखी। पत्थर कई जगह काले पड़ गए तो कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। एएसआई की टीम अब दोबारा सर्वे करेगी और उसके बाद कार्य शुरू करेगी। मदन मोहन मंदिर की तरह यहां भी केमिकल से सफाई की जाएगी और मंदिर को चमकता हुआ बनाया जाएगा। मंदिर के अंदर और बाहर दोनों ही जगह कालेपन की दिक्कत हैं।
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पूर्व में एएसआई ने मदन मोहन मंदिर की सफाई का काम किया था। करीब 16 लाख रुपये की लागत से मंदिर को चमकाने का काम किया गया था। यह मंदिर एएसआई संरक्षित मंदिरों में से एक है। सेवायत सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि एएसआई के अधिकारियों ने पूरे मंदिर का निरीक्षण कर लिया है। अब पूरी टीम सर्वे करेगी और अपनी रिपोर्ट कमेटी को देगी। उसके बाद कार्य किया जाएगा। मंदिर निर्माण में राजस्थानी पत्थर का इस्तेमाल है।
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