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कल स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजेंगे ठाकुर बांकेबिहारी
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:54 PM IST
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बांकेबिहारीजी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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श्रावण मास के पावन पर्व हरियाली तीज के अवसर पर जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज पांच अगस्त को अति विशिष्ट और मनोहारी स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजकर भक्तों को दर्शन देंगे।
विश्व प्रसिद्ध बांकेबिहारीजी मंदिर में हरियाली तीज महोत्सव की तैयारियाें को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पांच अगस्त को शाम चार बजे से लेकर अर्द्धरात्रि तक ठाकुर बांकेबिहारी महाराज स्वर्ण-रजत निर्मित हिंडोले में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि हरियाली तीज से वृंदावन के मंदिरों में हिंडोला उत्सव का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। यह महोत्सव रक्षाबंधन तक झूलनोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। ब्रज के राजा बांकेबिहारी लाल अनूठे और दिव्य ठाठ-बाट से वर्ष में केवल एक ही दिन हिंडोला में विराजते हैं।
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इसके दर्शन पाने के लिए विश्वभर से लोगों का सैलाब उमड़ता है। नगर के राधावल्लभ मंदिर, राधादामोदर, राधारमण, श्यामसुंदर, शाहबिहारीजी, रंगनाथजी, यशोदानंदन धाम आदि मंदिरों में भी ठाकुरजी हिंडोले में विराजकर भक्तों को दर्शन देंगे।
15 अगस्त 1947 को पहली बार इस हिंडोले में विराजे थे ठाकुरजी
बांकेबिहारी का स्वर्ण-रजत हिंडोला ब्रज ही नहीं अपितु विश्वभर में अपनी तरह का एकमात्र हिंडोला है। सौंदर्य, आकर्षण और भव्यता के लिए विश्व में विख्यात है उतना ही पुराना इसका इतिहास भी है। 15 अगस्त 1947 को जिस दिन भारत को आजादी मिली, उसी दिन हरियाली तीज का पावन पर्व भी था। ऐसे में ब्रजवासियों को पहली बार ठाकुर बंाकेबिहारी के दर्शन इस अद्भुत स्वर्ण रजत हिंडोले में प्राप्त होने पर दोहरी खुशी प्राप्त हुई थी।
मंदिर के सेवायत ब्रजकिशोर गोस्वामी के अनुसार वर्ष 1942 में महात्मागांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इस हिंडोले का निर्माण कार्य बांकेबिहारी के भक्त लाला हरगुलाल ने शुरू कराया था। बनारस के कारीगर छोटेलाल और ललन भाई के निर्देशन में 20 कारीगरों ने पांच वर्ष की मेहनत के बाद इस हिंडोले को तैयार किया। हिंडोला निर्माण में एक लाख तोले चांदी और 2200 तोले सोना और शीशम की लकड़ी का प्रयोग हुआ। शीशम की लकड़ी के लिए नेपाल में पूरे जंगल की लकड़ी का सौदा किया गया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ही यह हिंडोला बनकर ही पूर्ण हुआ था। उन्होंने बताया कि इस फोल्डिंग हिंडोले के निर्माण की तत्कालीन लागत लगभग 25 लाख रुपये आई थी।
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विश्व प्रसिद्ध बांकेबिहारीजी मंदिर में हरियाली तीज महोत्सव की तैयारियाें को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पांच अगस्त को शाम चार बजे से लेकर अर्द्धरात्रि तक ठाकुर बांकेबिहारी महाराज स्वर्ण-रजत निर्मित हिंडोले में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
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बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि हरियाली तीज से वृंदावन के मंदिरों में हिंडोला उत्सव का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। यह महोत्सव रक्षाबंधन तक झूलनोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। ब्रज के राजा बांकेबिहारी लाल अनूठे और दिव्य ठाठ-बाट से वर्ष में केवल एक ही दिन हिंडोला में विराजते हैं।
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इसके दर्शन पाने के लिए विश्वभर से लोगों का सैलाब उमड़ता है। नगर के राधावल्लभ मंदिर, राधादामोदर, राधारमण, श्यामसुंदर, शाहबिहारीजी, रंगनाथजी, यशोदानंदन धाम आदि मंदिरों में भी ठाकुरजी हिंडोले में विराजकर भक्तों को दर्शन देंगे।
15 अगस्त 1947 को पहली बार इस हिंडोले में विराजे थे ठाकुरजी
बांकेबिहारी का स्वर्ण-रजत हिंडोला ब्रज ही नहीं अपितु विश्वभर में अपनी तरह का एकमात्र हिंडोला है। सौंदर्य, आकर्षण और भव्यता के लिए विश्व में विख्यात है उतना ही पुराना इसका इतिहास भी है। 15 अगस्त 1947 को जिस दिन भारत को आजादी मिली, उसी दिन हरियाली तीज का पावन पर्व भी था। ऐसे में ब्रजवासियों को पहली बार ठाकुर बंाकेबिहारी के दर्शन इस अद्भुत स्वर्ण रजत हिंडोले में प्राप्त होने पर दोहरी खुशी प्राप्त हुई थी।
मंदिर के सेवायत ब्रजकिशोर गोस्वामी के अनुसार वर्ष 1942 में महात्मागांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इस हिंडोले का निर्माण कार्य बांकेबिहारी के भक्त लाला हरगुलाल ने शुरू कराया था। बनारस के कारीगर छोटेलाल और ललन भाई के निर्देशन में 20 कारीगरों ने पांच वर्ष की मेहनत के बाद इस हिंडोले को तैयार किया। हिंडोला निर्माण में एक लाख तोले चांदी और 2200 तोले सोना और शीशम की लकड़ी का प्रयोग हुआ। शीशम की लकड़ी के लिए नेपाल में पूरे जंगल की लकड़ी का सौदा किया गया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ही यह हिंडोला बनकर ही पूर्ण हुआ था। उन्होंने बताया कि इस फोल्डिंग हिंडोले के निर्माण की तत्कालीन लागत लगभग 25 लाख रुपये आई थी।