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अतिरिक्त प्रयास, असरदार कार्य...खुद में मिसाल हैं ये गुरुजन
अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:45 AM IST
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राया विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षक को देश के भविष्य को मजबूत नींव देने वाला राष्ट्र निर्माता माना जाता है। ये वो शिक्षक हैं जो इस मान्यता को और पुख्ता कर रहे हैं। इनके अतिरिक्त प्रयास, असरदार कार्य मिसाल बन गए हैं। कोई पढ़ाई के तरीके को बेहतर बना रहा है तो तो कोई कुरीतियों पर शिक्षा के हथौड़े से प्रहार कर रहा है। असर इनके विद्यालयों में दिख रहा है। पांच सितंबर को कलक्ट्रेट कक्ष में जिले की प्राथमिक पाठशालाओं के ऐसे ही शिक्षा जगत के 21 सितारों का अभिनंदन किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से आयोजित समारोह में जिलाधिकारी उनका अभिनंदन करेंगे।
योग विद्यालय की पहचान रखता है सोगरवार
राया विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय सोगरवार अपनी एक विशेषता से पहचाना जाता है। स्कूल में योग की क्लास भी लगती है। ऐसा प्रधानाध्यापक अजयराज सिंह के प्रयास से संभव हुआ। वो खुद प्रतिदिन बच्चों को योग की शिक्षा देते हैं। शारीरिक शिक्षा की जिम्मेदारी भी वो खुद निभाते हैं। उन्होंने छह-छह माह निर्धारित कर रखे हैं। एक अक्तूबर से 31 मार्च तक स्टेंडिंग पीटी और एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सिटिंग पीटी कराई जाती है। विद्यालय में करीब 52 विद्यार्थी हैं। उपस्थित 90 प्रतिशत रहती है। हाल ही में अजयराज सिंह का चयन गणित विषय के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में भी हुआ था। विद्यालय स्वच्छता पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया जा चुका है। अजयराज सहायक अध्यापक सुषमा तिवारी और श्रीकृष्ण गोपाल को भी इसका श्रेय देते हैं।
सतत् प्रयास से बनाया सर्वोत्कृष्ट विद्यालय
ब्लॉक मथुरा के प्राथमिक विद्यालय चंद्रनगर में अच्छे बदलाव को सभी ने स्वीकार किया है। विद्यालय का चयन जिले के सर्वोत्कृष्ट विद्यालय के रूप में हुआ है। इसके पीछे का कारण प्रधानाध्यापक विजयवीर सिंह को भी पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। विजयवीर सिंह बताते हैं कि स्कूल में पढ़ाई के साथ ही उन्होंने व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया। स्कूल में साफ सफाई उच्च स्तर की बनाए रखी जाती है। पेयजल की समुचित व्यवस्था है। चारदीवारी का निर्माण आदि भी कराया गया है।
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यहां ब्लैक बोर्ड नहीं प्रोजेक्टर से होती है पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय चौमुंहा वैसे तो सामान्य प्राथमिक विद्यालय के समान ही दिखता है। लेकिन अंदर कक्षा में जाएंगे तो चौंकेंगे जरूर। यहां ब्लैक बोर्ड और डस्टर की मदद से नहीं प्रोजेक्टर की मदद से पढ़ाई की जाती है। ऐसा संभव है सहायक अध्यापक शिवकुमार पचौरी के प्रयास से। पांच सितंबर को सम्मानित किए जा रहे अध्यापकों में शामिल शिवकुमार पचौरी ने कंप्यूटर और प्रोजेक्टर के लिए खुद की जेब से खर्चा किया। विद्यालय ज्वाइन करने के पहले दिन से ही उन्होंने ये व्यवस्था कर ली थी। इसका असर शिक्षा के स्तर में वृद्धि के रूप में दिख रहा है। बच्चों का रिजल्ट सुधरा है।
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योग विद्यालय की पहचान रखता है सोगरवार
राया विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय सोगरवार अपनी एक विशेषता से पहचाना जाता है। स्कूल में योग की क्लास भी लगती है। ऐसा प्रधानाध्यापक अजयराज सिंह के प्रयास से संभव हुआ। वो खुद प्रतिदिन बच्चों को योग की शिक्षा देते हैं। शारीरिक शिक्षा की जिम्मेदारी भी वो खुद निभाते हैं। उन्होंने छह-छह माह निर्धारित कर रखे हैं। एक अक्तूबर से 31 मार्च तक स्टेंडिंग पीटी और एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सिटिंग पीटी कराई जाती है। विद्यालय में करीब 52 विद्यार्थी हैं। उपस्थित 90 प्रतिशत रहती है। हाल ही में अजयराज सिंह का चयन गणित विषय के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में भी हुआ था। विद्यालय स्वच्छता पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया जा चुका है। अजयराज सहायक अध्यापक सुषमा तिवारी और श्रीकृष्ण गोपाल को भी इसका श्रेय देते हैं।
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सतत् प्रयास से बनाया सर्वोत्कृष्ट विद्यालय
ब्लॉक मथुरा के प्राथमिक विद्यालय चंद्रनगर में अच्छे बदलाव को सभी ने स्वीकार किया है। विद्यालय का चयन जिले के सर्वोत्कृष्ट विद्यालय के रूप में हुआ है। इसके पीछे का कारण प्रधानाध्यापक विजयवीर सिंह को भी पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। विजयवीर सिंह बताते हैं कि स्कूल में पढ़ाई के साथ ही उन्होंने व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया। स्कूल में साफ सफाई उच्च स्तर की बनाए रखी जाती है। पेयजल की समुचित व्यवस्था है। चारदीवारी का निर्माण आदि भी कराया गया है।
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यहां ब्लैक बोर्ड नहीं प्रोजेक्टर से होती है पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय चौमुंहा वैसे तो सामान्य प्राथमिक विद्यालय के समान ही दिखता है। लेकिन अंदर कक्षा में जाएंगे तो चौंकेंगे जरूर। यहां ब्लैक बोर्ड और डस्टर की मदद से नहीं प्रोजेक्टर की मदद से पढ़ाई की जाती है। ऐसा संभव है सहायक अध्यापक शिवकुमार पचौरी के प्रयास से। पांच सितंबर को सम्मानित किए जा रहे अध्यापकों में शामिल शिवकुमार पचौरी ने कंप्यूटर और प्रोजेक्टर के लिए खुद की जेब से खर्चा किया। विद्यालय ज्वाइन करने के पहले दिन से ही उन्होंने ये व्यवस्था कर ली थी। इसका असर शिक्षा के स्तर में वृद्धि के रूप में दिख रहा है। बच्चों का रिजल्ट सुधरा है।