{"_id":"7563bd531ec49799ff6cfd781d21eda2","slug":"tarun-sagar-maharaj-in-kosikalan-hindi-news-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘तपस्या में ही समस्या का समाधान’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘तपस्या में ही समस्या का समाधान’
ब्यूरो, अमर उजाला कोसीकलां
Updated Tue, 15 Dec 2015 10:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्र संत तरुण सागर महाराज ने मंगलवार को कोसी से मंगल विहार किया। जाते-जाते उन्होंने कड़वी सीख दी। उन्होंने कहा कि धन के पीछे नहीं भागने, इच्छाओं पर नियंत्रण करने और तपस्या में समस्या का समाधान छुपा है। राष्ट्र संत के मंगल विहार करते ही पीछे-पीछे काफी संख्या में भीड़ चल दी। लोग जैन मुनि के साथ होडल तक गए। पूरे रास्ते में तरुण सागर महाराज की जय-जयकार होती रही।
जैन धर्मशाला परिसर में अपने जाने से पूर्व प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि जीवन में परिवर्तन के लिए संवर्धन के लिए यह बात मान लो, सुख का संबंध केवल मन से है। जो तुम्हारे पास है, उसी में सुखी रहो। जो तुम्हारे पास नहीं है, उसके पीछे मत भागो। पैसे से सुविधाएं तो मिलेंगी, मगर सुख नहीं।
उन्होंने कहा कि हर आदमी के सामने समस्याएं हैं। गरीब के आगे भूख लगे तो क्या खाए और अमीर के सामने समस्या यह है कि क्या खाए जो भूख लगे। सभी समस्याओं का समाधान तपस्या में है। जीवन में अनुकूलता आने पर भजन करने का इंतजार मत करो। भजन करना है तो तुरंत कर लेना। जब तक जीवन है, समस्याओं का अंत नहीं होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भूख लगने पर भोजन करने को प्रकृति, भूख न लगे तब भी खाने को विकृति, खुद भूखे रहकर भूखे को खिलाना संस्कृति होती है। जिंदगी का सार बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि सोते में धन, जागते में धन, घर में धन, बाजार में धन। आखिर में रिजल्ट निकलता है निधन। इसलिए हमें ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे किसी और को हमारी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना नहीं करनी पड़े। हम ही आत्म कल्याण करें। जीवन में जो भी रिश्ते हैं, वे जीते जी हैं। मरने के बाद कोई रिश्ता किसी के साथ नहीं रहता।
मंगलवार को अपराह्न तीन बजे के करीब जैसे ही महाराज ने जैन धर्मशाला से होडल की ओर प्रस्थान किया तो सैकड़ों लोग साथ हो गए। इस दौरान हाईवे पर जाम के हालात पैदा हो गए। प्रेमचंद जैन, अशोक कामियां, डा. अशोक जैन, मुकेश जैन, राहुल जैन, रिषभ जैन, नरेन्द्र गर्जुर, प्रवीन जैन, राजेश जैन, पंकज जैन साथ रहे।
विज्ञापन
जैन धर्मशाला परिसर में अपने जाने से पूर्व प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि जीवन में परिवर्तन के लिए संवर्धन के लिए यह बात मान लो, सुख का संबंध केवल मन से है। जो तुम्हारे पास है, उसी में सुखी रहो। जो तुम्हारे पास नहीं है, उसके पीछे मत भागो। पैसे से सुविधाएं तो मिलेंगी, मगर सुख नहीं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हर आदमी के सामने समस्याएं हैं। गरीब के आगे भूख लगे तो क्या खाए और अमीर के सामने समस्या यह है कि क्या खाए जो भूख लगे। सभी समस्याओं का समाधान तपस्या में है। जीवन में अनुकूलता आने पर भजन करने का इंतजार मत करो। भजन करना है तो तुरंत कर लेना। जब तक जीवन है, समस्याओं का अंत नहीं होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भूख लगने पर भोजन करने को प्रकृति, भूख न लगे तब भी खाने को विकृति, खुद भूखे रहकर भूखे को खिलाना संस्कृति होती है। जिंदगी का सार बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि सोते में धन, जागते में धन, घर में धन, बाजार में धन। आखिर में रिजल्ट निकलता है निधन। इसलिए हमें ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे किसी और को हमारी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना नहीं करनी पड़े। हम ही आत्म कल्याण करें। जीवन में जो भी रिश्ते हैं, वे जीते जी हैं। मरने के बाद कोई रिश्ता किसी के साथ नहीं रहता।
मंगलवार को अपराह्न तीन बजे के करीब जैसे ही महाराज ने जैन धर्मशाला से होडल की ओर प्रस्थान किया तो सैकड़ों लोग साथ हो गए। इस दौरान हाईवे पर जाम के हालात पैदा हो गए। प्रेमचंद जैन, अशोक कामियां, डा. अशोक जैन, मुकेश जैन, राहुल जैन, रिषभ जैन, नरेन्द्र गर्जुर, प्रवीन जैन, राजेश जैन, पंकज जैन साथ रहे।