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प्यारी को शृंगार करत नंदलाला...
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Thu, 11 Dec 2014 02:03 AM IST
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ठाकुर राधारमण मंदिर में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में ठाकुरजी की झांकियां प्रतिदिन भक्तों को आनंदित कर रही हैं। ख्यातिलब्ध कलाकार महोत्सव में ठाकुर राधारमण लाल की राग सेवा कर रहे हैं। आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी द्वारा भागवत का रसपान कराया जा रहा है।
मंगलवार देर शाम मंदिर परिसर में प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मश्री शुभा मुद्गल ने प्रस्तुति दी। तेरो मुख नीको के मेरौ राधा प्यारी..., प्यारी को शृंगार करत नंदलाला..., चांदनी की सुबह देखे द्रगिन अघात आदि भजनों से श्रोताओं को बेसुध कर दिया।
हवेली संगीत में प्रस्तुत किए गए इन भजनों के साथ हारमोनियम पर सुधीर, तानपुरा पर हिमांशु वर्मा और तबले पर अनीश प्रधान ने संगत की। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी और अभिनव गोस्वामी ने शुभा मुद्गल सहित साथी कलाकारों का पटुका, ठाकुरजी की प्रसादी माला, प्रसाद और पान का बीड़ा भेंट कर सम्मान किया।
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इसके बाद सभी कलाकारों ने ठाकुर राधारमण लाल की शयन आरती का आनंद लिया। आरती सुवर्ण गोस्वामी ने की।
वृंदावन की भूमि में सम्मोहन- शुभा
प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मश्री शुभा मुद्गल ने कहा कि वृंदावन नगरी में प्रवेश करने पर एक आत्मीय शांति और सम्मोहन महसूस होता है। जब भी वह वृंदावन में प्रस्तुति देती हैं तो अपने आप ठाकुरजी के चरणों में ध्यान लग जाता है। ऐसा अनुभव होता है कि मेरे संगीत पर ठाकुरजी जी की मुरली बज रही है। उन्होंने बताया कि शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव उन्हें सहज ही अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां ठाकुरजी के प्रतिदिन होने वाले दर्शन और मंदिर की झांकियां अद्भुत होती हैं।
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मंगलवार देर शाम मंदिर परिसर में प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मश्री शुभा मुद्गल ने प्रस्तुति दी। तेरो मुख नीको के मेरौ राधा प्यारी..., प्यारी को शृंगार करत नंदलाला..., चांदनी की सुबह देखे द्रगिन अघात आदि भजनों से श्रोताओं को बेसुध कर दिया।
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हवेली संगीत में प्रस्तुत किए गए इन भजनों के साथ हारमोनियम पर सुधीर, तानपुरा पर हिमांशु वर्मा और तबले पर अनीश प्रधान ने संगत की। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी और अभिनव गोस्वामी ने शुभा मुद्गल सहित साथी कलाकारों का पटुका, ठाकुरजी की प्रसादी माला, प्रसाद और पान का बीड़ा भेंट कर सम्मान किया।
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इसके बाद सभी कलाकारों ने ठाकुर राधारमण लाल की शयन आरती का आनंद लिया। आरती सुवर्ण गोस्वामी ने की।
वृंदावन की भूमि में सम्मोहन- शुभा
प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मश्री शुभा मुद्गल ने कहा कि वृंदावन नगरी में प्रवेश करने पर एक आत्मीय शांति और सम्मोहन महसूस होता है। जब भी वह वृंदावन में प्रस्तुति देती हैं तो अपने आप ठाकुरजी के चरणों में ध्यान लग जाता है। ऐसा अनुभव होता है कि मेरे संगीत पर ठाकुरजी जी की मुरली बज रही है। उन्होंने बताया कि शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव उन्हें सहज ही अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां ठाकुरजी के प्रतिदिन होने वाले दर्शन और मंदिर की झांकियां अद्भुत होती हैं।