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कोरिया और चीन जाएंगी मथुरा की मूर्तियां
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 21 Apr 2015 12:06 AM IST
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मथुरा कला में बनी कुषाण और गुप्त काल की बेमिसाल मूर्तियां कोरिया और चीन में लगाई जा रही प्रदर्शनी की शोभा बनेंगी। कुषाण काल और गुप्त काल की बेमिसाल मूर्तियों को डिमांड लिस्ट में शामिल किया गया है। राजकीय संग्रहालय इन मूर्तियाें को भेजने की तैयारी कर रहा है।
कोरिया कल्चरल सेंटर की ओर से कोरिया में आयोजित प्रदर्शनी के लिए मथुरा संग्रहालय से कुषाण काल की बुद्ध की प्रतिमाएं मांगी गई हैं। राजकीय संग्रहालय के सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि हमारे पास पत्र आया है इसमें दूसरी शताब्दी की मूर्ति ‘बोधित्सव’, कुषाण काल की बुद्ध प्रतिमा के साथ अन्य प्रतिमाओं का भी चयन किया गया है।
कुषाण काल का बुद्ध जीवन दृश्य, अमिताभ बुद्ध, चरण चौकी, गुप्त काल का अभय मुद्रा में बुद्धा, मंगल चिह्न अंकित छत्र जाएगा। मुख्यालय से आदेश है कि कुछ प्रतिमाओं को चीन भी भेजा जाना है। अभी इनकी सूची आनी है। बीथिका परिचर मूलचंद्र और बीथिका सहायक हरीबाबू ने बताया कि इन मूर्तियों में कुषाण काल, गुप्त काल की कला का अद्भुत प्रदर्शन किया गया है।
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संग्रहालय में है विश्व की पहली बुद्ध मूर्ति
मथुरा के राजकीय संग्रहालय में भगवान बुद्ध की पहली प्रतिमा लगी है। इस प्रतिमा की आभा देखते ही बनती है। इसमें भगवान बुद्ध के ऊपर पुष्पवर्षा करते गंधर्व, अनुचर, पीछे नख की डिजायन लिए प्रभामंडल मूर्ति को बेजोड़ बनाता है। ये कटरा बुद्ध की मूर्ति वर्ष 1912 में कटरा केशव टीले की खोदाई में मिली थी।
मथुरा की कला की विशेषताएं
-लाल चित्तीदार पत्थर का प्रयोग
-मध्यदेशीय कला का अनुसरण और विकास
-प्राचीन यक्ष शैली का अन्य देवी-देवताओं में समन्वय
-प्रतीकों का मानवाकृतियों में रूपांतरण
-विदेशी तत्वों का सामंजस्य
-नूतन कला विधाओं का विकास
-राजपुरुषों की मूर्तियों का निर्माण
-स्त्री आकृति के अंकन में लावण्य और आकर्षण
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कोरिया कल्चरल सेंटर की ओर से कोरिया में आयोजित प्रदर्शनी के लिए मथुरा संग्रहालय से कुषाण काल की बुद्ध की प्रतिमाएं मांगी गई हैं। राजकीय संग्रहालय के सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि हमारे पास पत्र आया है इसमें दूसरी शताब्दी की मूर्ति ‘बोधित्सव’, कुषाण काल की बुद्ध प्रतिमा के साथ अन्य प्रतिमाओं का भी चयन किया गया है।
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कुषाण काल का बुद्ध जीवन दृश्य, अमिताभ बुद्ध, चरण चौकी, गुप्त काल का अभय मुद्रा में बुद्धा, मंगल चिह्न अंकित छत्र जाएगा। मुख्यालय से आदेश है कि कुछ प्रतिमाओं को चीन भी भेजा जाना है। अभी इनकी सूची आनी है। बीथिका परिचर मूलचंद्र और बीथिका सहायक हरीबाबू ने बताया कि इन मूर्तियों में कुषाण काल, गुप्त काल की कला का अद्भुत प्रदर्शन किया गया है।
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संग्रहालय में है विश्व की पहली बुद्ध मूर्ति
मथुरा के राजकीय संग्रहालय में भगवान बुद्ध की पहली प्रतिमा लगी है। इस प्रतिमा की आभा देखते ही बनती है। इसमें भगवान बुद्ध के ऊपर पुष्पवर्षा करते गंधर्व, अनुचर, पीछे नख की डिजायन लिए प्रभामंडल मूर्ति को बेजोड़ बनाता है। ये कटरा बुद्ध की मूर्ति वर्ष 1912 में कटरा केशव टीले की खोदाई में मिली थी।
मथुरा की कला की विशेषताएं
-लाल चित्तीदार पत्थर का प्रयोग
-मध्यदेशीय कला का अनुसरण और विकास
-प्राचीन यक्ष शैली का अन्य देवी-देवताओं में समन्वय
-प्रतीकों का मानवाकृतियों में रूपांतरण
-विदेशी तत्वों का सामंजस्य
-नूतन कला विधाओं का विकास
-राजपुरुषों की मूर्तियों का निर्माण
-स्त्री आकृति के अंकन में लावण्य और आकर्षण