{"_id":"68867fd2122e45d1460c8a33","slug":"sri-banke-bihari-played-chess-with-shreeji-on-sukh-sej-mathura-news-c-369-1-mt11010-133369-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: सुख सेज पर श्रीजी संग श्रीबांकेबिहारी ने खेला शतरंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: सुख सेज पर श्रीजी संग श्रीबांकेबिहारी ने खेला शतरंज
विज्ञापन
श्री बांकेबिहारी मंदिर में सुखसेज पर ठाकुर जी के लिए रखा शतरंज।
तुषार चौहान
वृंदावन। श्री बांकेबिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर झूलन महोत्सव के अंतर्गत ठाकुरजी के विश्राम के लिए सुंदर और भव्य सुख सेज सजाई गई। इस भव्य शैय्या पर चांदी की बनी शतरंज की बिसात भी सजाई गई। परंपरा है कि इस दिन ठाकुरजी श्रीजी के साथ शतरंज खेलते हैं।
सोने-चांदी से बनी विशेष शैय्या (सुख सेज) पर मखमली चादर, नरम तकिए, मोतियों की झालर, झीने पर्दे और सुगंधित इत्रों से सजाया गया। सेज के चारों ओर फूलों की कलियां बिछाई गईं। इस भव्य शैय्या पर चांदी की बनी शतरंज की बिसात सजाकर भगवान के मनोरंजन की विशेष व्यवस्था की गई।
मान्यता है कि इस दिन प्रभु बांकेबिहारीजी अपनी आराध्या श्रीजी महारानी के साथ शतरंज खेलते हैं। यह लीला भक्तों को प्रभु की सजीव झांकी के रूप में दर्शन देती है। हरियाली तीज के पर्व पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ही यह अनूठी परंपरा को देखकर श्रद्धालु खुद को निहाल मानते हैं। यही कारण है कि इस दिन मंदिर में लाखों की भीड़ उमड़ती है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
वृंदावन। श्री बांकेबिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर झूलन महोत्सव के अंतर्गत ठाकुरजी के विश्राम के लिए सुंदर और भव्य सुख सेज सजाई गई। इस भव्य शैय्या पर चांदी की बनी शतरंज की बिसात भी सजाई गई। परंपरा है कि इस दिन ठाकुरजी श्रीजी के साथ शतरंज खेलते हैं।
सोने-चांदी से बनी विशेष शैय्या (सुख सेज) पर मखमली चादर, नरम तकिए, मोतियों की झालर, झीने पर्दे और सुगंधित इत्रों से सजाया गया। सेज के चारों ओर फूलों की कलियां बिछाई गईं। इस भव्य शैय्या पर चांदी की बनी शतरंज की बिसात सजाकर भगवान के मनोरंजन की विशेष व्यवस्था की गई।
विज्ञापन
मान्यता है कि इस दिन प्रभु बांकेबिहारीजी अपनी आराध्या श्रीजी महारानी के साथ शतरंज खेलते हैं। यह लीला भक्तों को प्रभु की सजीव झांकी के रूप में दर्शन देती है। हरियाली तीज के पर्व पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ही यह अनूठी परंपरा को देखकर श्रद्धालु खुद को निहाल मानते हैं। यही कारण है कि इस दिन मंदिर में लाखों की भीड़ उमड़ती है। संवाद
विज्ञापन